आत्महत्या का क्यों बढ़ रहा प्रचलन और कौन है जिम्मेदार ?

आत्महत्या यानी खुद को मार देना, अपनी ही जान का दुश्मन बन जाना और पिछले कुछ समय से इसमें तेजी देखने को मिल रही है अलग अलग कारणों की वजह से आत्महत्या की घटनाएँ सामने आयी। डॉक्टरों की भाषा में बात करें तो कुछ लोग डिप्रेशन में आकर आत्महत्या कर रहे है जबकि कुछ लोग अपनी आर्थिक और सामाजिक परिस्थिति की वजह से भी आत्महत्या कर रहे है। जिंदगी से निराश हुए लोगों के लिए आत्महत्या सबसे आसान तरीका होता है जिससे वह अपने जीवन को समाप्त कर सभी जिम्मेदारियों से मुक्त हो जाते है हालांकि कभी कभी ऐसे लोग भी आत्महत्या कर लेते है जिनके पीछे पूरा परिवार होता है और अंत में परिवार को बेसहारा होना पड़ता है। 
 
कोरोना महामारी के दौरान भी आत्महत्या करने वालों की ख़बरें ज्यादा आ रही है। महामारी के बहुत से लोग बेरोज़गार हो गये है जबकि कोरोना की वजह से कई परिवार भी बिखर गये। वहीं बहुत सारे काम बंद होने की वजह से भी लोग डिप्रेशन में जा रहे है जिससे लोग निराश है और उन्हे आत्महत्या करना ही सबसे आसान तरीका नजर आ रहा है। एक सर्वे के मुताबिक पूरी दुनिया में करीब हर साल 8 लाख लोग आत्महत्या करते है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक करीब हर 40 सेकेंड में एक व्यक्ति आत्महत्या करता है। 
 
 
मनोचिकित्सक के मुताबिक डिजिटल दुनिया के बढ़ते प्रचलन की वजह से हर इंसान एक दूसरे से दूरी बनाने लगा है और पूरा दिन अपने ही काम और उलझन में लगा रहता है वह ना किसी से बात करता है और ना ही मनोरंजन के लिए बाहर निकलता है ऐसे में डिप्रेशन लगतार बढता जाता है। मनोचिकित्सक की मानें तो कुछ लोग इसलिए भी आत्महत्या करते है क्योंकि वह दूसरों को ऐसा करते देखते है और टीवी में उसकी न्यूज़ कई दिनों तक चलती रहती है इसे कॉपी कैट सुसाइड कहते है। 
 
 
सफलता और असफलता जिंदगी का ही हिस्सा होती है वह आती और जाती रहती है हमें उसका सामना करना चाहिए और धर्य के साथ काम लेना चाहिए और अपनी सफलता के लिए मेहनत करनी चाहिए लेकिन वर्तमान में लोगों ने ऐसी धारणा बना ली है कि उन्हे इंतजार नहीं करना है और जल्द से जल्द सब कुछ कर देना है लेकिन जब ऐसा नहीं हो पाता तो वह डिप्रेशन में चले जाते है और अंत में आत्महत्या ही उनके लिए आखिरी उपाय बचता है।
आत्महत्या के लिए परिवार की संरचना भी बहुत हद तक जिम्मेदार होती है वैसे देखा जाए तो वर्तमान में एकल परिवार (Single family) का विस्तार तेजी से हो रहा है। रोज़गार और व्यापार के लिए लोग तेजी से शहर की तरफ रुख कर रहे है लेकिन इस दौरान लोग परिवार से अलग होते जा रहे है और सिर्फ दो लोगों का ही परिवार शहर में रह रहा है ऐसे में अगर किसी भी तरह की बुरी परिस्थिति उत्पन्न होती है तो मदद और मोटिवेशन के लिए कोई भी नही होता नतीजा लोग जिंदगी से निराश होने लगते है और अंत में आत्महत्या का विचार करने लगते है। 
 
पिछले कुछ महीनों में बॉलिवुड से कई सुसाइड की खबरें सुनने को मिली है और सभी की रिपोर्ट में डिप्रेशन की बात सामने आ रही है ज्यादातर लोग काम ना मिलने की वजह से परेशान चल रहे थे जबकि कुछ लोग अपने ही किसी खास से धोखा खा चुके है। एक रिपोर्ट के मुताबिक सिर्फ लॉकडाउन के दौरान बॉलिवुड से कुल 6 लोगों ने आत्महत्या की है जिसमें से सुशांत सिंह राजपूत और दिशा सालियान की मौत को लेकर कुछ साफ नहीं है कि उन्होने आत्महत्या की थी या फिर उनकी हत्या की गयी थी। 
   

आपकी प्रतिक्रिया...