भारत आत्मनिर्भर में एक कदम और आगे, चेन्नई से पोर्ट ब्लेयर होगी फाइबर लाइन

प्रधानमंत्री ने देश के विकास को आगे बढ़ाते हुए सोमवार को अंडमान निकोबार को तक भी फाइबर केबल की सुविधा पहुंचा दी जिससे अब पोर्ट के लोग भी हाई स्पीड नेट की सुविधा का लाभ ले पायेंगे। पीएम मोदी ने राजधानी दिल्ली से ही रिमोट से इस प्रोजेक्ट कि उदघाटन किया जिसके बाद से एक पनडुब्बी के द्वारा इस केबल को समुद्र में बिछाने का काम शुरु किया जायेगा। चेन्नई से पोर्ट ब्लेयर तक की दूरी करीब 2300 किलोमीटर की है जिससे इसे शुरु करने में काफी समय लग गया। इस फाइबर केबल के द्वारा पोर्ट ब्लेयर को स्वराज द्वीप, लिटल अंडमान, कार निकोबार, ग्रेट निकोबार और लॉग आईलैंड को भी जोड़ा जा सकेगा।  
 
पीएम मोदी ने कहा कि इस प्रोजेक्ट के बाद अब देश के बाकी राज्यों की तरह यहां के लोग भी डिजिटल दुनिया से आसानी से जुड़ सकेगें और ऑनलाइन शिक्षा का भी लाभ ले सकेंगे। मोदी ने कहा कि अंडमान-निकोबार का विकास काफी समय से रुका हुआ था जिससे अब गति दी जा रही है। इस प्रोजेक्ट पर साल 2018 से ही काम शुरु किया गया था लेकिन प्रोजेक्ट बड़ा होने की वजह से यहां चुनौतियाँ भी बहुत थी जिससे इस प्रोजेक्ट को शुरु करने में करीब 2 साल का समय लग गया। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद जहां स्थानीय लोगों को फायदा होगा वहीं समुद्री व्यापार से जुड़े क्षेत्रों में भी तेजी देखने को मिलेगी।

भारत ने अपने आत्मनिर्भर मिशन को आगे बढ़ाते हुए चेन्नई और पोर्ट ब्लेयर के बीच केबल बिछाने की लाइन भी तैयार कर ली है यह भारत के लिए बड़ी सफलता है जबकि इससे पहले भारत को इस काम के लिए दूसरे देशों की मदद लेनी पड़ती थी। इस फाइबर केबल के द्वारा चेन्नई से पोर्ट ब्लेयर तक की स्पीड 2×200 गीगाबाइट पर सेकेंड्स (Gbps) की होगी जबकि पोर्ट ब्लेयर से बाकी आइलैंड के लिए 2×100 गीगाबाइट पर सेकेंड्स (Gbps) की होगी। 
 
समुद्र में केबल बिछाने का काम एक विशेष जहाज के द्वारा किया जाता है और इस जहाज में एक बार में 2000 किमी लम्बा केबल ले जाया जा सकता है। जहाज के साथ एक विशेष तरह की मशीन होती है जिसे समुद्र के अंदर डाल दिया जाता है और जहाज के द्वारा उसे कनेंट किया जाता है फिर जहाज धीरे धीरे आगे बढ़ता है और केबल समुद्र में उसे मशीन की सहायता से बिछता जाता है।    

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