यात्रीगण कृपया ध्यान दें: मडुआडीह का नाम अब बनारस जंक्शन हो चुका है

केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार जब से बनी है तब से कई शहरों और स्टेशनों के नाम बदले गये हालांकि इनको लेकर कभी कभी विरोध भी देखने को मिला लेकिन उससे सरकार को कोई फर्क नही पड़ क्योंकि पुराने नामों को फिर जिंदा करने के लिए सरकार की तारीफ भी हुई। सरकार का ऐसा मानना है कि मुगल शासकों ने बहुत से शहरों के नाम बदल दिये और भारत की पुरानी परंपरा और नाम को खत्म कर दिया जिसे सरकार फिर जिंदा कर रही है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी नाम बदलने को लेकर अक्सर चर्चा में रहते है। 
केंद्र सरकार की तरफ से वाराणसी के मडुआडीह रेलवे स्टेशन के नाम को बदलने की मंजूरी मिल गयी और अब मडुआडीह बनारस के नाम से पुकारा जायेगा। दरअसल बनारस पहले से ही बहुत विख्यात है और वहां की आम बोल चाल की भाषा में लोग काशी और वाराणसी की जगह बनारस शब्द का उपयोग ज्यादा करते है ऐसे में सरकार की तरफ से मडुआडीह का नाम बनारस करने पर किसी को कोई आपत्ति नहीं हुई है। गृह मंत्रालय ने इस पर आखिरी फैसला लेते हुए नो ऑबजेक्शन सर्टिफ़िकेट जारी कर दिया। 
आप को बतादें कि किसी भी रेलवे स्टेशन का नाम बदलने का अधिकार राज्य सरकार के पास होता है लेकिन उसे केंद्रीय गृह मंत्रालय और रेलवे से इसके लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेना पड़ता है और फिर राज्य सरकार किसी भी स्टेशन का नाम बदल सकती है।  
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के पास यह सिफारिश भेजी थी कि मडुआडीह रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर उसे बनारस कर दिया जाये जिस पर केंद्र सरकार की तरफ से विचार विमर्श किया गया और अंत में इसे गृह मंत्रालय की तरफ से मंजूरी दे दी गयी। इससे पहले बहुत लोगों ने स्टेशन का नाम बदलने को लेकर रेलवे व स्थानीय प्रशासन को ज्ञापन सौंपा था लेकिन इस पर कोई विचार नहीं हुआ। 
 
योगी सरकार स्टेशनों के नाम बदलने में तेजी से काम कर रही है। मडुआडीह से पहले मुगलसराय और इलाहाबाद स्टेशन के नाम भी बदले जा चुके है। योगी सरकार के प्रस्ताव के बाद मुगलसराय का नाम बदलकर पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन कर दिया गया जबकि इलाहाबाद स्टेशन का नाम बदलकर प्रयागराज जंक्शन कर दिया गया है।

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