कोविड-19 की वजह से भारत में 41 लाख युवा बेरोजगार

  • अंतराष्ट्रीय श्रम संगठन व एशियाई विकास बैंक ने बेरोज़गारी पर पेश की रिपोर्ट
  • भारत में कोविड से 41 लाख युवा हुए बेरोज़गार
  • अप्रैल-मई में बेरोज़गारी का आंकड़ा 23 फीसदी था
  • 21 जून को बेरोज़गारी दर 8.5 फीसदी तक फिसला

कोविड-19 की वजह से पूरी दुनिया में बेरोज़गारी तेजी से बढ़ रही है। एक रिपोर्ट की मानें तो भारत में कोविड की वजह से करीब 41 लाख युवाओं को रोज़गार से हाथ धोना पड़ा है लेकिन यह आंकड़ा अभी और भी बढ़ सकता है क्योंकि कोविड का असर अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। कोविड की वजह से निमार्ण और प्रोडक्शन क्षेत्र में बड़ा नुकसान हुआ है और देश की ज्यादातर जनता इससे ही जुड़ी हुई थी जिससे बेरोज़गारी के तेजी से बढ़ती नजर आयी। वहीं बेरोज़गारी पर अंतराष्ट्रीय श्रम संगठन और एशियाई विकास बैंक ने एक साझा रिपोर्ट जारी करते हुए बताया है कि भारत में करीब 41 लाख युवा बेरोज़गार हुए है। 
 


अंतराष्ट्रीय श्रम संगठन और एशियाई विकास बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक एशियाई क्षेत्रों में बड़ी संख्या में बेरोज़गारी देखने को मिल रही है और यह अभी और भी बढ़ सकती है। रोज़गार के तमाम क्षेत्रों में से उत्पादन, निर्माण और कृषि क्षेत्र से सबसे ज्यादा लोग बेरोज़गार हुए है। कोविड की वजह से इन क्षेत्रों पर बुरा असर हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक कोविड की वजह से रोज़गार पर तो बुरा असर हुआ ही है साथ ही कॉलेज से पास आउट युवा इंटर्नशिप और अपरेंटिक्स के लिए भी परेशान हो रहे है और कोविड की वजह से कोई भी कंपनी उन्हे मौका नहीं दे रही है। 
 
 
देश में कोविड-19 से पहले भी रोज़गार की समस्या देखने को मिल रही थी और युवाओं में बेरोज़गारी दर 13 प्रतिशत थी जबकि वयस्कों (25 वर्ष से अधिक) में यह 3 प्रतिशत से अधिक थी और अब कोविड की वजह से यह और भी बढ़ती जा रही है। लॉकडाउन से पहले की बात करें तो बेरोज़गारी दर घट कर 9 फीसदी तक आ गयी थी। लॉकडाउन के दौरान अप्रैल-मई में बेरोज़गारी दर 23 फीसदी तक पहुँच गयी थी क्योंकि उस दौरान पूरा देश बंद था लेकिन 21 जून के आखिरी सप्ताह में यह घट कर फिर से 8.5 फीसदी पर आ गयी। लॉकडाउन के बाद ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों में रोज़गार में सुधार हुआ है लेकिन शहर के मुकाबले गांव में रोज़गार जल्दी शुरु हुए और ज्यादातर लोग अपने रोज़गार पर वापस लौट गये जबकि शहर के रोज़गार के आंकड़े में अभी भी पूरी तरह से सुधार नहीं हुआ है।

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