नया भारत बनेगा आत्मनिर्भर

लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद व विस्तारवाद के खिलाफ एकसाथ दो मोर्चों पर युद्ध का जिक्र करते हुए आत्मनिर्भता के विकास यज्ञ में आहुति देने का आवाहन किया। उनके भाषण के कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे यहां पेश हैं-

15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के शुभ अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ध्वजारोहण उपरांत आजादी के बाद पहली बार ऐसा ऐतिहासिक प्रेरणादायी जोशीला भाषण दिया, जिससे पूरे देश के आत्मविश्वास को बल मिल रहा है और देश को भरोसा हो गया है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में नया भारत आत्मनिर्भर बन कर रहेगा। महाशक्ति भारत, स्वस्थ और समर्थ भारत, शौर्य और पराक्रमी भारत, विश्व के लिए आदर्श व प्रेरणादायी भारत का संकल्प प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से लिया। आइये 74वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले के बुलंद प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए मोदी जी के उत्साही बुलंद हौसलों के सम्भाषण के प्रमुख बातों पर नजर डालते हैं। उनके संबोधन के कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे उन्हीं के शब्दों में निम्न हैं-

एलएसी से एलओसी तक भारतीय सेना मुस्तैद

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पाकिस्तान व चीन का नाम लिए बिना ही उन पर करारा प्रहार किया और कहा कि इतनी आपदाओं के बीच भी सीमा पर देश के सामर्थ्य को चुनौती देने के दुस्प्रयास हुए हैं लेकिन एलओसी से लेकर एलएसी तक देश की संप्रभुता पर जिस किसी ने आंख उठाई, देश की सेना ने, हमारे वीर जवानों ने उसका उसी की भाषा में जवाब दिया है। भारत की संप्रभुता की रक्षा के लिए पूरा देश एक जोश से भरा हुआ है, संकल्प से प्रेरित है और अपने सामर्थ्य पर अटूट श्रद्धा के साथ आगे बढ़ रहा है। इस संकल्प के लिए हमारे वीर जवान क्या कर सकते हैं? देश क्या कर सकता है? ये लद्दाख में दुनिया ने देख लिया है।

विस्तारवाद को भारत ने दी मात

हम यह भी जानते हैं कि वह भी एक कालखंड था, विस्तारवाद की सोच वालों ने दुनिया में जहां भी ़फैल सकते हैं, फैलने का प्रयास किया। अपने झंडे गाड़ने की कोशिश की लेकिन भारत का आजादी का आंदोलन दुनिया के लिए प्रेरणा का पुंज बन गया, दीप स्तंभ बन गया और दुनिया में भी आजादी की ललक जगी। जो लोग विस्तारवाद की अंधी दौड़ में लगे हुए थे, अपने झंडे गाड़ने में लगे थे, उन्होंने अपने विस्तारवाद के मंसूबों को पूरा करने के लिए दुनिया को तबाह कर दिया लेकिन ऐसे कालखंड में भी, युद्ध की विभीषिका के बीच भी भारत ने अपनी आजादी की ललक को नहीं छोड़ा। न कभी कमी आने दी, न कभी नमी आने दी। देश को जब बलिदान देने की जरूरत पड़ी, बलिदान देता रहा, कष्ट झेलने की जरूरत पड़ी, कष्ट झेलता रहा, जनांदोलन खड़ा करने की जरुरत पड़ी, जनांदोलन करता रहा और भारत की इस लड़ाई ने दुनिया में आजादी के लिए माहौल बना दिया। भारत की इस शक्ति ने दुनिया में जो बदलाव लाया, विस्तारवाद के लिए चुनौती बन गया भारत, इतिहास इस बात को नकार नहीं सकता है। मैं आज मातृभूमि पर न्योछावर उन सभी वीर जवानों को लाल किले की प्राचीर से आदरपूर्वक नमन करता हूं।

जम्मू कश्मीर में विकास के नए युग का आरंभ

हम सभी के लिए गर्व की बात है कि जम्मू कश्मीर में स्थानीय इकाइयों के जन प्रतिनिधि सक्रियता और संवेदनशीलता के साथ विकास के एक नए युग को आगे बढ़ा रहे हैं। मैं वहां के सभी पंच सरपंच को विकास यात्रा में उनकी सक्रिय सहभागिता के लिए ह्रदय से बहुत – बहुत बधाई देता हूं। भविष्य में चुनाव होगा और वहां के विधायक, सांसद, मंत्री और मुख्यमंत्री सभी मिलकर विकास के मार्ग पर आगे बढ़ेंगे, इसके लिए देश प्रतिबद्ध है और प्रयासरत भी है।

विकास के महायज्ञ में हर हिंदुस्थानी को देनी होगी आहुति

अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर के निर्माण का कार्य शुरू हो गया है। राम जन्मभूमि के सदियों पुराने विषय का शांतिपूर्ण समाधान हो चुका है। देश के लोगों ने जिस संयम के साथ और समझदारी के साथ आचरण, व्यव्हार किया है, यह अभूतपूर्व है और भविष्य में हमारे लिए के लिए प्रेरणा का स्रोत है। शांति, एकता, सद्भावना यही तो आत्मनिर्भर भारत की ताकत बनने वाली है। यही मेलजोल, यही सद्भावना भारत के उज्ज्वल भविष्य की गारंटी है। इसी सद्भाव के साथ हमें आगे बढ़ना है. विकास के इस महायज्ञ में हर हिंदुस्थानी को अपनी कुछ न कुछ आहुति देनी है।

भारत का आत्मनिर्भर बनना अनिवार्य

कोरोना वैश्विक महामारी के बीच 130 करोड़ देशवासियों ने आत्मनिर्भर बनने का संकल्प लिया है। आत्मनिर्भर भारत आज हर हिंदुस्थानी के मन मस्तिष्क में छाया हुआ है। आत्मनिर्भर भारत का सपना संकल्प में परिवर्तित होते हम देख रहे हैं। आत्मनिर्भर भारत 130 करोड़ देशवासियों के लिए केवल संकल्प ही नहीं अपितु एक मंत्र बन गया है। हमारे परिवार में भी जब युवक-युवतियां 20 – 25 साल के होते हैं तब उनके माता पिता और बुजुर्ग लोग कहते हैं कि अब तो अपने पैरों पर खड़े हो जाओ। मात्र 20 – 25 साल में ही परिवार अपने संतानों से अपने पैरों पर खड़े होने की अपेक्षा करता है। हम तो आजादी के 75वें वर्ष से एक कदम दूर है तब हमारे लिए भी भारत जैसे देश को अपने पैरों पर खड़ा होना अनिवार्य है, आत्मनिर्भर भारत बनना अनिवार्य है।

एफडीआई में हुई 18 प्रतिशत बढ़ोत्तरी

बीते वर्ष भारत में एफडीआई में अब तक के सारे रिकोर्ड तोड़ दिए हैं। गत वर्ष भारत में एफडीआई में 18 प्रतिशत वृद्धि हुई है। कोरोना काल में भी दुनिया की बड़ी – बड़ी कंपनिया भारत की ओर रुख कर रही हैं। यह विश्वास ऐसे ही पैदा नहीं हुआ है। ऐसे ही दुनिया मोहित नहीं हुई है। इसके लिए भारत ने अपनी नीतियों, लोकतंत्र, अर्थव्यवस्था के बुनियाद की मजबूती पर जो काम किए हैं, इसने यह विश्वास जगाया है। दुनिया भर के अनेक बिजनेस भारत को सप्लाय चेन के केंद्र के रूप में देख रहे हैं। अब हमें मेक इन इंडिया के साथ – साथ मेक फॉर वर्ल्ड के मंत्र को भी लेकर आगे बढ़ना है। इसमें अहम् भूमिका रहेगी नेशनल इन्फ्रास्ट्रक्चर पाइप लाइन प्रोजेक्ट की। इस पर 110 लाख करोड़ से अधिक खर्च किये जाएंगे. इसके लिए अलग – अलग सेक्टर्स में लगभग 7000 प्रोजेक्ट की पहचान कर ली गई है। इससे इन्फ्रास्ट्रक्चर को एक नई दिशा मिलेगी और एक नई गति मिलेगी। कहा जाता है कि ऐसे संकट के समय पर जितना इन्फ्रास्ट्रक्चर पर बल दिया जाए, जिससे आर्थिक गतिविधियां बढती हैं, लोगों को रोजगार मिलता है, लोगों को अधिक संख्या में काम मिलता है। उससे जुड़े कई काम एकसाथ शुरू होते हैं। छोटे – बड़े उद्योग, किसान, माध्यम वर्ग के लोगों को इसका बहुत लाभ होता है।

आज दुनिया एक दूसरे से जुडी हुई है। आज दुनिया एक दूजे पर निर्भर है। समय की मांग है कि विश्व अर्थव्यवस्था में भारत जैसे विशाल देश का योगदान बढ़ना चाहिए। विश्व कल्याण के भी भारत का यह कर्तव्य है और भारत को अपना योगदान बढ़ाना है तो भारत को स्वयं को सशक्त होना होगा। भारत को आत्मनिर्भर होना होगा। हमें जगत कल्याण के लिए भी अपने आप को सामर्थ्यवान बनाना ही होगा। जब हमारी रीढ़ मजबूत होगी, हमारा अपना सामर्थ्य होगा तब हम दुनिया का कल्याण करने की दिशा में कदम उठा साकते हैं। एक समय था जब हम बाहर से गेंहू मंगवा कर अपना पेट भरते थे। हमारे देश के किसानों ने कृषि क्षेत्र में कमाल कर के दिखा दिया। आत्मनिर्भर भारत आज कृषि क्षेत्र में बना है। आज भारत का किसान केवल भारत के नागरिकों का ही पेट भरते है इतना ही नहीं है। आज भारत इस स्थिति में है कि दुनिया में जिसको जरूरत है उसे हम अन्न दे सकते हैं।
देश में उत्पादन बढ़ाना होगा

हमारे देश में अथाह प्राकृतिक सम्पदा है। हमारे देश में क्या कुछ नहीं है। आज समय की मांग है कि हमारे इन प्राकृतिक संसाधनों में हम वैल्यू एडिशन करें। हम हमारे मानव सम्पदा में मूल्य वृद्धि करें, नई ऊंचाइयों पर ले जाएं। हम कब तक अपने देश से कच्चा माल विदेशों में भेजते रहेंगे। रॉ मटेरियल दुनिया में भेजना और फिनिश माल दुनिया से वापस लाना, ये खेल कब तक चलेगा? देश में ही हमें उत्पादन बढ़ाना होगा।

दुनिया के 184 देश भारत के साथ

पिछले दिनों संयुक्त राष्ट्रसंघ में अस्थायी सदस्य के रूप में 192 में से 184 देशों का भारत के पक्ष में समर्थन मिलना, यह हमारे देश के लिए गर्व की बात है। इससे साफ़ जाहिर होता है कि दुनिया में भर की साख बढ़ी है। इससे याह भी स्पष्ट होता है कि भारत की विदेश नीति कितनी प्रभावी और परिणामदायक है। भारत के लिए यह बहुत बड़ी उपलब्धि है।

इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन, का ऐलान किया। जिसके अंतर्गत प्रत्येक भारतीय को एक हेल्थ आईडी दी जाएगी। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति स्किल डेवलपमेंट पर ध्यान देने के साथ ग्लोबल सिटिजन बनाएगी। कोरोना वैक्सीन, नई साइबर सुरक्षा नीति, आशियान देशों से भारत के बेहतर संबंध, गांवों में रोजगार उपलब्ध कराने हेतु गरीब कल्याण रोजगार अभियान आदि विषयों पर भी प्रधानमंत्री ने खुलकर अपनी बात रखी।
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