कांग्रेस में कलह- सोनिया और राहुल के खिलाफ पार्टी में विद्रोह

कांग्रेस का चिट्ठी बम
कांग्रेस पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं के लिए चिट्ठी का बम भारी पड़ता दिख रहा है और जिस चिट्ठी से वह पार्टी की हालत सुधारने में लगे थे वह चिट्ठी वह उनकी हालत खराब करने पर तुली है और कुछ पार्टी के छोटे नेताओं ने तो इन सभी चिट्ठी लिखने वाले नेताओं को पार्टी से बाहर करने की मांग शुरु कर दी है। गुलाम नबी आजाद द्वारा लिखी चिट्ठी अब पार्टी के बाहर भी लीक कर दी गयी है जिस पर अब जमकर बवाल शुरु हो गया है हालांकि गुलाम नबी आजाद ने अपने पत्र पर जमकर बचाव किया और कहा कि हमने किसी को गाली नहीं दी है चिट्ठी लिखना गलत नही है। गुलाम नबी आजाद ने पूर्व पीएम इंदिरा गांधी के समय का भी हवाला दिया और कहा कि उस दौरान भी कार्यकारी बैठक की बातें लीक हो जाया करती थी। पत्र को लेकर गुलाम नबी आजाद पर अनुशासनहीनता का भी आरोप लगाया गया है कि वह उन्होने गलत समय पर पार्टी को चिट्ठी लिखी है जिस पर अपना बचाव करते हुए आजाद ने कहा कि जिन लोगों ने बैठक के दौरान उन पर बीजेपी से मिलने का आरोप लगाया वह भी अनुशासनहीनता ही थी, अगर मैने चिट्ठी लिखकर पार्टी के लिए कुछ अच्छा करने की कोशिश की तो यह अनुशासनहीनता कहां से होती है। 
 
कांग्रेस अपने ही फ़ैसलों से परेशान 
कांग्रेस पार्टी के लिए फिलहाल मुश्किल की घड़ी चल रही है और उसका हर दांव खुद के ही खिलाफ हो जा रहा है जबकि बीजेपी के लिए सारे नक्षत्र सही दिशा में है और वह जो भी कदम उठा रही है वह सही दिशा में साबित हो रहा है हालांकि यह दोनों ही पार्टियों का अपना नसीब और नक्षत्र है या फिर सही फैसले लेने का अपना अपना तज़ुर्बेा लेकिन कुल मिला कर जब से केंद्र में मोदी की सत्ता शुरु हुई है तब से कांग्रेस के उल्टे दिन शुरु हो गये है और उसे एक देश विरोधी पार्टी के तौर पर लोगों ने देखना शुरु कर दिया है। मोदी सरकार ने आते ही देश की जनता को यह हकीक़त बता दिया कि कांग्रेस सिर्फ एक परिवार की पार्टी है जिस पर आजादी के बाद से सिर्फ एक ही परिवार ने राज किया है इतना ही नहीं कांग्रेस द्वारा देश से ज्यादा खुद के फायदे को ध्यान में रखकर फैसले लिए गये है और यही वजह रही कि देश की तरक्की को रोक दिया गया। 
 
सोनिया और राहुल के नेतृत्व पर सवाल!
डूबती नांव से जैसे उसके कर्मचारी भागने लगते है वैसे ही हालत कांग्रेस पार्टी की भी है जहां से लोग पलायन करने की कोशिश में लगे हुए है जबकि कुछ लोग समय से देख निकल चुके है। वहीं एक चिट्ठी की वजह से फिर से पार्टी में खलबली मची हुई है और इसके नतीजे गंभीर हो सकते है क्योंकि चिट्ठी लिखने वाले नेताओं को हाशिए पर रखा जा रहा है उनके इस्तीफ़े की भी मांग उठने लगी है। वहीं सूत्रों की मानें तो इस चिट्ठी को लेकर महीने से विचार विमर्श किया जा रहा था लेकिन इसकी भनक गांधी परिवार तक नहीं पहुंची लेकिन अब इस चिट्ठी के द्वारा गांधी परिवार दुखी और गुस्सा है क्योंकि उसे ऐसा लग रहा है कि इस चिट्ठी के द्वारा सोनिया और राहुल गांधी के नेतृत्व पर संदेह किया जा रहा है इसके साथ ही राहुल गांधी ने चिट्ठी लिखने के समय पर भी सवाल उठा दिया और कहा कि यह बीजेपी से मिली भगत हो सकती है।
 
क्या थी कांग्रेस की चिट्ठी?
कांग्रेस के 23 वरिष्ठ नेताओं द्वारा सोनिया गांधी को लिखी चिट्ठी में आंतरिक चुनाव, निष्पक्ष निर्णय लेने की आजादी, पूर्णकालीक अध्यक्ष, राज्य कांग्रेस अध्यक्षों, ब्लाक प्रमुखों और जिला अध्यक्षों के चुनाव का जिक्र किया था और यह मांग की गयी थी कि पार्टी में उपर से लेकर नीचे तक बदलाव जरूरी है लेकिन चिट्ठी को राहुल गांधी के कामकाज के उपर हमला माना गया और इसका उल्टा रिएक्शन उन पार्टी के 23 नेताओं पर देखने को मिल रहा है और उन्हे अब पार्टी में गद्दार के रुप में देखा जा रहा है। 

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