यूपी पंचायत चुनाव के लिए निर्धारित हुई शिक्षा व बच्चों की संख्या

  • यूपी पंचायत चुनाव के लिए योगी सरकार के नये दिशा निर्देश
  • 8वीं पास और दो बच्चे वाला व्यक्ति ही लड़ सकेगा पंचायत चुनाव
  • ग्राम, क्षेत्र और जिला पंचायत उम्मीदवार के लिए बदले नियम
  • जनसंख्या नियंत्रण बिल की यह हो सकती है पहली सीढ़ी! 

पंचायत चुनाव के लिए निर्धारित हुई शिक्षा व बच्चों की संख्या 
उत्तर प्रदेश बीजेपी के कद्दावर नेता योगी आदित्यनाथ राज्य का मुखिया बनने से पहले अपने बयानों को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहते थे और मुख्यमंत्री बनने के बाद वह अपने काम करने के तरीकों को लेकर सुर्खियों में बने रहते है हालांकि यह बात अलग है कि जनता से उलट उनका तरीका विरोधी पार्टियों को बिल्कुल भी पसंद नहीं आता है क्योंकि योगी का काम देश और राज्य के विकास को समर्पित होता है। योगी आदित्यनाथ के अलग अलग हैरान करने वाले ऐलान के बाद अब खबर यह है कि यूपी में होने वाले पंचायत चुनाव में योगी सरकार की तरफ से एक बड़ा फैसला किया जा सकता है जिसके तहत सिर्फ वही लोग चुनाव लड़ सकेंगे जिन्होने 8वीं तक की पढ़ायी की होगी और उनके सिर्फ दो बच्चे होंगे जो लोग इस कैटेगरी में नहीं आते वह इस बार चुनाव नहीं लड़ सकते है। सरकार की तरफ से अगर यह फैसला लागू होता है तो वह ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत चुनाव पर लागू होगा लेकिन इसमें क्षेत्र पंचायत चुनाव के लिए 10वीं पास होना जरुरी होगा जबकि जिला पंचायत चुनाव के लिए 12वीं तक की पढ़ाई अनिवार्य होगी।   
 
नये नियमों पर विपक्ष का दलित विरोधी रोना
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की यह पहल काफी अलग है और इसका दूर का परिणाम काफी अच्छा हो सकता है लेकिन इसका विरोध अभी से शुरु हो गया है और विरोधी पार्टियां इस फैसले को दलित विरोधी बता कर इसका विरोध कर रही है। विपक्षी दलों का कहना है कि दलित वर्ग अभी भी शिक्षा से दूर है क्योंकि वह मजदूरी करता है ऐसे में अगर वह पंचायत चुनाव लड़ना चाहेगा तो वह नहीं लड़ सकता है। वहीं दो बच्चों वाला नियम भी कठोर नजर आ रहा है क्योंकि अशिक्षा और खुदा की देन कहने वाले वर्ग भी मनमाने तरीके से बच्चा पैदा करते है।  ऐसे में योगी सरकार के इस फैसले का जमकर विरोध होने वाला है। 
 
कैबिनेट में संशोधन के लिए बिल तैयार! 
योगी सरकार के इस फैसले से जहां बहुत से लोग चुनाव लड़ने से वंचित रह जायेंगे वहीं इस फैसले से समाज में एक पढ़ा लिखा सदस्य गांव का मुखिया बन सकता है क्योंकि ज्यादातर देखा गया है कि गांव का मुखिया कोई भी साधारण आदमी होता है और उसका सब कार्यभार किसी और के द्वारा देखा जाता है जिससे मुखिया को भी नहीं पता होता कि वह खुद क्या कर रहा है। योगी सरकार पंचायती राज विधेयक को संशोधन के लिए कैबिनेट में पेश करेगी और इस पर सुधार किया जायेगा अगर सबकुछ सरकार के मुताबिक हुआ तो दिसंबर से पहले होने वाले चुनाव के प्रत्याशियो को इसका पालन करना होगा।  
 
राजनीतिक पार्टियाँ जनता को करती है गुमराह
केंद्र सरकार पिछले काफी समय से जनसंख्या नियंत्रण बिल लाने की बात कह रही है और अब योगी के इस फैसले को इसकी पहली सीढ़ी भी कहा जा सकता है क्योंकि केंद्र सरकार ने बार बार यह कहा है कि देश के विकास के लिए जनसंख्या नियंत्रण कानून जरूरी है क्योंकि जिस देश की जनसंख्या नियंत्रित नहीं होती है वह देश विकास के मार्ग पर ज्यादा लंबा नहीं चल पाता है। देश की कुछ राजनीतिक पार्टियाँ जनता को गुमराह करती है और सरकार के नये फैसलों को जनता विरोधी बताती है जिसके बाद जनता भी उनके बहकावे में आ जाती है क्योंकि यह राजनीतिक दल खुद के फायदे के लिए जनता को जाति, धर्म और समाज में बांट कर राजनीति करते है जिसमें वह कुछ हद तक सफल भी हो जाते है जिससे जनता सरकार के फैसले पर खुद से विचार करने की बजाय सीधे विरोध शुरु कर देती है। 

This Post Has 5 Comments

  1. सुनील kumar5

    बहुत सही

  2. Anonymous

    Very good Yogi ji

  3. Anonymous

    Kya look sasha Bidhansabha me bhi lagu hogi

  4. Anonymous

    अभी यह न्याय संगत नही दिख यहा है

  5. Anonymous

    बेरी गुड फैसला समाज मे काम को गति मिलेगी

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