मानवी शिल्प की खूबसूरती

मुंबई के अंधेरी स्थित शहाजी राजे क्रीडा संकुल में अंतरराष्ट्रीय शरीरसौष्ठव प्रतियोगिता का शानदार आयोजन शनिवार 5 नवम्बर और रविवार 6 नवम्बर 2011 इन दो दिनों में किया था।
गठा हुआ बदन, मजबूत स्नायू, चुस्त और मस्त शरीर का संगीत की धुन पर 1 मिनट की शरीरसौष्ठव की पोजिंग देखकर हर क्रीडा शौकीन की तबीयत खुश हुई। तन्दुरुस्त शरीरवाले 335 खिलाड़ी विश्व के 90 देशों से मुंबई आये थे। ईश्वर ने मानवी श्ल्पि कितना खूबसूरत बनाया है यह जानना हो तो शरीर सौष्ठव का आविष्कार देखना चाहिये। इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में प्रथम तीन स्थान प्राप्त करनेवाले राष्ट्र- प्रथम- मिस्र (97 अंक), द्वितीय- भारत (77 अंक), तृतीय- ईरान (49 अंक)। 90 किलो नीचे वजन में बहरीन के बलहदाद सामी ने स्वर्ण पदक जीता और ‘विजेताओं के विजेता’ बन गए।

इस सर्वश्रेष्ठ विश्व ‘मिस्टर युनिवर्स’ प्रतियोगिता में भारत उपविजेता रहा। भारत के हीरा लाल ने 65 कि.ग्रा. में ‘मिस्टर युनिवर्स’ खिताब जीतकर अपने गुरु प्रेेमचंद की सफलता को दोहराया है। 1988 में प्रेमचंद ने यह सफलता पायी थी। उसके 23 साल बाद उन्हीं के शिष्य हीरालाल ने भारत की शान बढ़ायी।
विश्व के सफल शरीरसौष्ठव खिलाड़ी –
60 कि.ग्रा. समूह – 1) पार्क क्यांग मो. (कोरिया), 2) चो वांग युंग (कोरिया), 3) एस. के. मुश्ताक (भारत)
65 कि.ग्रा. समूह- 1) हीरालाल (भारत), 2) इरांबटा सिंग (भारत), 3) सतार अबोल रुड (इराक)
70 कि.ग्रा. समूह – 1) कोसिस इगोर (स्लोवाकिया), 2) महेश्वरन (भारत), 3) इल्कोमी गमाल अहमद (मिस्र)
75 कि.ग्रा. समूह – 1) ओस्मान मोहम्मद ओस्मान (मिस्र), 2) अलशारी हमत (कुवैत), 3) आशीश साखरकर (भारत)
80 किलो – 1) पायदार अहमद (ईरान), 2) नेमतला मोहम्मद इल्फादला (मिस्र), 3) लोसेव इगोर (रूस)
85 किलो समूह- 1) इल सदानी अहमद (मिस्र), 2) शेरीफ मोरूद (कुवैत), 3) बहनसावी अशरफ अहमद (मिस्र)
90 किलो समूह – 1) सामी अलहदाद (बहरीन) 2) इनामो मेहंदी (ईरान), 3) मोहम्मद मेहरभान (कुवैत)
100 किलो समूह – 1) इब्राहिम झकारिया (मिस्र), 2) कशानी हमीद रेझा (अझरबैजान), 3) अलासार अब्डेलेझिझ (मिस्र)
100 किलो से अधिक – 1) सोलार रस्तीस्लावा (स्लोवाकिया), 2) कोलोटेझझिक आंद्रेश (पोलंड), 3) हसन रहमाइन (ईरान)

भारत का सौष्ठव
चुने हुए अंतिम 54 खिलाडियों में भारत के केवल सात बॉडी बिल्डर थे उनमें से 9 ने सुवर्ण, 2 ने रजत और 2 ने कांस्य पदक जीतकर भारत की शान बढायी।
विजेता पंचक
60 किलो में – एस के मुश्ताक (कांस्य पदक)
65 किलो में – हीरा लाल (सुवर्ण पदक), इस्बंटा सिंह (रजत पदक)
70 किलो में – महेश्वरन (रजत पदक)
75 किलो में – आशिष साखरकर (कांस्य पदक)
यह सफलता सुनकर हर दर्शक गा रहा था –
ये प्यारी भारत मां, तेरे हम गीत गाते हैं
गुनगुनाते हैं, खुशी से गीत गाते हैं।
यह अंतरराष्ट्रीय शरीर सौष्ठव प्रतियोगिता में एक दु:खद घटना हुई। ‘मिस्टर युनिवर्स’ बनने की उम्मीद लेकर आये हुए सीरिया के शरीरसौष्ठव खिलाडी मेहमूद-अल-हिदीदी का वजन घटाने के लिये दिनभर पानी न पीना अपनी मृत्यु को निमंत्रण देना हुआ। पानी न पियो या कम पियो तो वजन कम होता है ऐसी हिदीदी की धारणा थी। वजन करने के बाद वे जमीन पर गिर पड़ं। उनके सिर में चोट लगी। उन्हें मालाड के अस्पताल बहल नर्सिंग होम में ले जाया गया, जहां उनका देहांत हो गया। खेल में सफलता पाने खेलने के लिए खिलाड़ी कितनी खतरनाक जोखिम उठाते हैं!
मुंबई अंधेरी में आयोजित इस स्पर्धा को देखने पंद्रह हजार दर्शक 700 सौ से दस हजार तक रुपयों की टिकटें खरीदकर आये थे। स्पर्धा में इजिप्त के उरोलामा मोहम्मद को 100 किलो से अधिक वजनवाले दल में पांचवा स्थान घोषित करने पर ओलामा ने कुर्सियों को तोड़ने की कोशिश की। निषेध व्यक्त करने का यह उनका अजीब तरीका था। ‘हार’ स्वीकार करने की ताकद खिलाड़ी में होनी चाहिए। अगर वेही अनुशासन न रखें तो प्रतियोगिता आयोजित करनेवालों की मुश्किलें बढ जाती हैं। खिलाड़ी, उनके अभिभावक प्रशिक्षक इन बातों पर ध्यान रखें। खेल खेल होता है, हार जीत होती रहती है मगर खिलाडी यह न भूलें प्रतियोगिता में हम अपने राष्ट्र की ओर से खेलते हैं।
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