संसद सत्र: लॉकडाउन नहीं होता तो कितना होता मौत का आंकड़ा – हर्षवर्धन

सदन के सत्र से पहले पॉजिटिव हुए सांसद
कोरोना वायरस की वजह से पहली बार संसद का मानसून सत्र बाधित हो रहा है और इसे शुरु करने के लिए सरकार को तमाम परेशानियों से गुजरना पड़ रहा है। संसद के मानसून सत्र को लेकर सरकार चाहती है कि यह चले और कई विधेयक को पारित किया जा सके जबकि विपक्ष भी मानसून सत्र को इसलिए शुरु करना चाहता है कि उनके पास भी सैंकड़ो सवाल है जिसका जवाब उन्हे सरकार से लेना है लेकिन सोमवार से शुरु हो रहे मानसून सत्र के पहले ही पांच सांसद कोरोना पॉजिटिव पाये गये है जिससे एक बार फिर से सत्र को लेकर सवाल उठने लगा है। सांसदों के पॉजिटिव रिपोर्ट आने के बाद अब कुछ सांसदों ने सत्र में भाग लेने से मना कर दिया और संसद को पत्र लिखकर इसकी जानकारी भी दे दी है कि वह संसद में उपस्थित होने में असमर्थ है। 
 
सदन में कम होगा पेपर वर्क
कोरोना के खतरे को देखते हुए इस बार संसद में सुरक्षा की कड़ी व्यवस्था की गयी है। कोविड के दौरान संसद में विशेष व्यवस्था की गयी है जिससे लोग एक दूसरे के दूर रह सके इतना ही नहीं संसद में इस्तेमाल होने वाले पेपर वर्क को भी कम कर दिया गया है और ज्यादातर चीजों को डिजिटल कर दिया गया है जिससे संक्रमण फैलने का खतरा कम रहे। संक्रमण पर रोक लगाने के लिए थर्मल स्कैनिंग, 40 स्थानों पर आउटोमैटिक सेनेटाइजट स्प्रे, मेडिकल टीम और एंबुलेंस तैयार रखी गयी है जिससे किसी भी आपात स्थिति के दौरान आसानी से निपटा जा सके।   
सैनिकों के साथ खड़ी है संसद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद शुरु होने से पहले ही मीडिया से मुलाकात की और कहा कि पूरी संसद देश की सीमा पर तैनात सुरक्षा बलों के साथ खड़ी है। देश की रक्षा के लिए पहाड़ों और बर्फ में हमारे सैनिक खड़े है ताकि हम चैन से रह सके। सुरक्षा बलों को लेकर संसद में जितनी भी चर्चा होगी वह सभी के लिए अच्छा है लेकिन मुझे विश्वास है कि हमारी संसद सैनिकों के साथ हमेशा खड़ी रहेगी हालांकि विपक्ष का रवैया इससे उलट नजर आ रहा है और विपक्ष लगातार चीन से जारी विवाद पर सरकार से सफाई मांग रही है इतना ही नहीं गलवान में हुई हिंसा के दौरान चीनी सैनिकों की मौत का जो आंकड़ा सेना की तरफ से बताया गया था उस पर विपक्षी दलों ने शंका जाहिर की थी और सरकार पर देश को गुमराह करने का आरोप लगाया था।
 
स्वास्थ्य मंत्री की कोरोना पर रिपोर्ट
सदन के पहले दिन की चर्चा में स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने सदन के माध्यम से देश को जानकारी देते हुए बताया कि लॉकडाउन लगाना सरकार का सही फैसला था और इसकी ही वजह से लाखों के संक्रमण और हजारों की मौत को रोका गया है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि अगर देश में लॉकडाउन नहीं लगता तो करीब 29 लाख कोरोना संक्रमण और बढ़ सकता था और इसके साथ ही करीब 78000 लोगों की मौत भी और हो सकती थी लेकिन लॉकडाउन की वजह से इस सब को रोकने में सरकार कामयाब रही है। 

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