तूफानी कर्तृत्व की महत्वाकांक्षा रखें


अब तक हम सफल उद्योग के तीन सूत्र जान चुके हैं। उद्योग-व्यवसाय दूसरे के पैसे पर कीजिए, ईमानदारी से फायदे का व्यवसाय हो सकता है, कम मुनाफा और ज्यादा टर्नओवर यह तत्व किस तरह उपयोगी है, इसे आपने जाना पर इस सूत्र का उपयोग करने के लिए आपका उद्यमी होना, व्यावसायिक बनना जरूरी है और इसके लिए सबसे महत्वपूर्ण बात है महत्वाकांक्षा का होना। नौकरी के सुरक्षित, सुख देने वाले मार्ग में खुद को बंदी न बनाकर अपने में मौजूद कल्पकता गुणवत्ता को व्यापार की तरफ मोड़ कर थोड़ा खतरा लेने की मानसिकता तभी निर्माण होती है, जब महत्वाकांक्षा बहुत प्रबल होती है। हम किसी उद्योग-व्यवसाय में तूफानी काम करे, कुछ तूफानी कर्तृत्व करे यह आपको मन से न लगे तो चाहे कितना भी बड़ा निवेशक मिले या कोई रेड़िमेड़ उद्योग-व्यवसाय चलाने को मिले तब भी उसका कोई उपयोग नहीं होनेवाला है। होटल अथवा पर्यटन जैसा सेवा उद्योग हो, पेट्रोलियम, स्टील जैसा भारी उद्योग हो, ग्राहकों के लिए उपयोगी उत्पादन बनानेवाला उद्योग हो, प्रत्येक क्षेत्र में सफल, अग्रिम पंक्ति के उद्यमियों का प्रवास देखें तो उनकी प्रगति के पीछे की ‘ड्रायविंग फोर्स’ उनकी महत्वाकांक्षा ही होती है, यह बात ध्यान में आएगी।

नौकरी में महत्वाकांक्षा न पालकर, रूटिन तरीके से काम करके आप अपनी नौकरी टिका सकते हैं। स्थिर हो सकते हैं। अधिक जिम्मेदारी न हो और बढ़ा हुआ काम न हो इसीलिए नौकरी में आप पदोन्नति के लिए प्रयत्न न करें तो आपका थोड़ा आर्थिक नुकसान होता है, पर नौकरी सुरक्षित रहती है। ‘जैसे हैं, वैसे ही रहने दें’ की प्रवृत्ति नौकरी में शायद चल सकती है, लेकिन उद्योग-व्यवसाय में तो महत्वाकांक्षा होनी ही चाहिए और वह भी छोटी-मोटी नहीं बल्कि हमेशा आगे रहने की, शिखर पर पहुंचने की। मेरे पास अभी जो ग्राहक हैं, वे पर्याप्त हैं, ऐसा विचार यदि उद्यमी करे तो मानिए वह समाप्त हो गया। ऐसा विचार करनेवाला और थोड़े में समाधान माननेवाला उद्यमी बाजार की स्पर्धा में पीछे रह जाता है। मराठी कवि केशवसुत ने एक कविता में कहा है, ‘बाग को मेरी बाड़ लगे, यह मुझे मंजूर नहीं।’ यह प्रवृत्ति उद्यमी में होनी चाहिए। आज मेरा उत्पादन जिला स्तर पर तो कल वह राज्य स्तर पर कैसे जाएगा और वहां से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कैसे जाएगा, ऐसा विचार जब आप करते हैं, तभी आप सही अर्थ में प्रगति करते हैं। बाजार में वर्चस्व जमाने के लिए स्पर्धकों से आगे जाने की महत्वाकांक्षा जब आप रखते हैं तो अपने उत्पादन को अधिक अच्छा और श्रेष्ठ दर्जे का बनाने के लिए आप प्रयत्न करते हैं, तब आपकी सेवा अधिक तत्पर, अधिक आधुनिक बनाने कि कोशिश होती है और इस दिशा में आपकी यात्रा शुरू हुई कि वह सफलता के शिखर पर पहुंचती है।

भवन-निर्माण जैसा जटिल व्यवसाय दूसरा कोई नहीं है। परंतु आज भी निर्माण गु्रप के अजित मराठे, नाशिक के प्रकाश पाटील, पुणे के एस. आर. कुलकर्णी, मुंबई के मोहन देशमुख जैसे अनेक लोगों ने अपने तूफानी कर्तृत्व से काम करते हुए शून्य से विश्व निर्माण किया है। खुद हमारे उद्योग समूह की कहानी भी इससे अलग नहीं है। हावरे उद्योग समूह का निर्माण मेरे भाई सतीश की महत्वाकांक्षा के कारण हुआ। एक वास्तुविशारद के यहां नौकरी करनेवाला सतीश नौकरी जाने पर भी नाउम्मीद नहीं हुआ और अब किसी की नौकरी न करके खुद का व्यवसाय करना है और वह भी ऐसा जिससे सैकड़ों हाथों को काम मिले ऐसी महत्वाकांक्षा पालकर उसने जोर शोर से हावरे समूह का निर्माण किया। ये उदाहरण मैंने इसीलिए दिए क्योंकि आप में से कुछ लोगों के मन में ऐसी बड़ी महत्वाकांक्षा का बीज होने के बाद भी पारंपरिक विचार, संकुचित दृष्टिकोण के दबाव के नीचे वह शायद दबा हो तो उसे खुलकर सृजित होने दीजिए, फलने-फूलने दीजिए। बड़ी महत्वाकांक्षा पालना गुनाह नहीं बल्कि सफल उद्यमी बनने के लिए वह एक आवश्यकता है। हम लोग अनेक बार इतना छोटा सपना देखते हैं कि अपनी क्षमता की पूरी कसौटी नहीं लगती। ऐसा न होने दीजिए। मैं जो करूंगा वह सर्वोत्तम होगा, मैं जहां जाऊंगा, वही सर्वोच्च स्थान होगा, ऐसी आकांक्षा रखने पर ही आप अपनी क्षमता का पूर्ण उपयोग कर सकते हैं। इसीलिए हमेशा तूफानी कर्तृत्व करने की महत्वाकांक्षा रखें।

मेरे खुद के अनुभव से मैंने उद्योग के चार सूत्र बताए क्योंकि अनुभव हो या ज्ञान हमेशा देने से बढ़ता है, ऐसा मेरा विश्वास है। इन चार सूत्रों के आधार पर आप कोई भी उद्योग-व्यवसाय सफल तरीके से कर सकते हैं, इसका मुझे विश्वास है। अधिकाधिक युवाओं को उद्योग-व्यवसाय की चुनौती स्वीकार करनी चाहिए। इसीमें आपका कल का उज्ज्वल भविष्य छिपा है। अत: इस चर्तु:सूत्री को दिल से स्वीकार करें और सफल उद्यमी बनें!
ऑल द बेस्ट!
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