समर्पित संघ कार्यकर्ता मनहरभाई मेहता


भारतीय मजदूर संघ के पूर्व अखिल भारतीय अध्यक्ष तथा मेरे लिए ज्येष्ठ बंधुवत थे मनहरभाई, जो स्वयं एक स्वयंसेवक थे। संघ को ही जीवन गाथा समझकर उसी के अनुसार जीवन की आखिरी साँस तक अपना काम करने वाले मनहरभाई मेहता जैसे सैकड़ों कार्यकर्ता गत 80 वर्षों में हुए हैं। संघ ने जिस क्षेत्र में जाकर काम करने को कहा उसे ही संघ कार्य समझकर करने वाले मनहरभाई मेहता एक श्रेष्ठ व्यक्ति थे।

मनहर भाई का जन्म अहमदाबाद जिले के राणपुर गांव में हुआ था। कराची में उनकी मैट्रिक तक पढ़ाई हुई। संघ विचारों का सुवर्ण स्पर्श और नियमित शाखा में जाना कराची में ही शुरू हुआ। सुयोग से भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी भी उसी शाखा के स्वयंसेवक थे।

सन् 1947-48 में उन्होंने गुजरात म संघ प्रचारक के रुप मेें काम किया। उच्च शिक्षा के लिए वे मुंबई आए। बी. कॉम, एल.एल.बी. करते हुए बेस्ट अंडरटेकिंग में नौकरी की, वहां गजानन राव गोखले, बाल ठोसर आदि संघ स्वयंसेवकों से उनका संबंध जुड़ा, उस समय वे कांदिवली में रहते थे, वहाँ भी संघ का काम कर ही रहे थे। पढ़ाई पूरी होने पर उन्होंने नौकरी छोड़ दी।

चढ़ती कमान

सन् 1952 से 1953 की अवधि में उन्होंने भारतीय जनसंघ की मुंबई शाखा की जिम्मेदारी सफलता से निभाई। इन दिनों में राम नाईक, बालासाहब कानिटकर, काका दामले आदि संघ के वरिष्ठ स्वयंसेवकों से उनका संबंध आया। सन् 1959 के आस-पास उनको भारतीय मजदूर संघ का काम करने के लिए कहा गया, उस समय बाला साहब साठे और रमण भाई शहा मजदूर संघ का काम कर रहे थे। इन तीनों ने एक साथ मिलकर काम किया,जिससे भारतीय मजदूर संघ को मुंबई में प्रतिष्ठा प्राप्त हुई।

मनोहर भाई को अर्थशास्त्र का गहरा अध्ययन था। लाभ-हानि और वार्षिक तुलना पत्र का उनको विशेष ज्ञान था, वे आयकर सलाहकार के नाते व्यवसाय करते थे, इसलिए भा.म.संघ के संगठनात्मक काम के साथ ही औद्योगिक न्यायालय में औद्योगिक मामलों की पैरवी करने की जिम्मेदारी उन पर आई, उन दिनों अनेक निष्ठावान कामगार कार्यकर्ता नेता कार्यरत थे। समाजवादी, वामपंथी विचारों के अनेक वकील थे, उन सबके साथ उनके घनिष्ठ संबंध थे। उनमें से उल्लेखनीय कुछ नाम यानी कम्युनिस्ट वकील नेता के. टी. सुले, स्वतंत्र कामगार आंदोलन के मुख्य आर.जे.मेहता, कम्युनिस्ट नेता जी. आर. खानोलकर, समाजवादी पार्टी के पी. डी. कामेरकर वकील, कामगार नेता बगाराम तुलपुले हैं।

कामगार नेताओं के साथ उनके जैसे घनिष्ठ संबंध थे, वैसे ही मालिकों के वकील सलाहकारों से भी उनके मित्रता के संबंध थे। स्व. राजपाल पुरी, एफ. एम. काका के साथ उनका स्नेह था, एक तरफ उनका वकालत का व्यवसाय जारी था और दूसरी तरफ मजदूर संघ की जिम्मेदारियाँ बढ़ती जा रही थीं। प्रथम मुंबई के अध्यक्ष, बाद में प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य, उसके बाद महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष, आगे केंद्रीय कार्यकारिणी सदस्य और तपश्चात अखिल भारतीय अध्यक्ष इस तरह उन्होंने कई पदों पर कार्य किया।

सबसे पहले राष्ट्रहित

जन-सामान्य की समझ में कामगार क्षेत्र यानी केवल हड़ताल, तालाबंदी, झगड़ा-फसाद और आंदोलन आदि भारतीय मजदूर संघ के बारे में धारणा थी, उसमें पहली बार परिवर्तन कराया। स्व. दत्तोपंत ठेंगडी के मार्गदर्शन, अपने वैयक्तिक विचार, मनन, चिंतन की सहायता से मनहरभाई ने कामगार क्षेत्र में संघ विचार प्रचारित करने के लिए लेखन किया। सन्1968 में न्या. गजेंद्र गडकर की अध्यक्षता में पहला ‘राष्ट्रीय श्रम आयोग’ की स्थापना हुई। कामगार हितों तथा राष्ट्र हित में आयोग से क्या अपेक्षा है, इस बारे में भा. म. संघ ने लिखित निवेदन दिया, जिसे स्व. ठेंगडी, गजानन राव गोखले और मनहरभाई मेहता ने तैयार किया था। उन दिनों आयोग के सामने आर्थिक विषयों के साथ राष्ट्रहित तथा कामगार संघों की जिम्मेदारी प्रस्तुत करने वाला भा. म. संघ एकमात्र संगठन था।

कार्यकर्ताओं को विविध विषयों की जानकारी हो, उनके ज्ञान के स्तर का विस्तार हो, इसलिए उन्होंने विविध विषयों पर पुस्तिकाएं लिखीं।

भा. म. संघ के लिए मनहरभाई ने अनेक मामलों में पैरवी की, परंतु महाराष्ट्र विद्युत मंडल सरकारी अधिकार क्षेत्र में होने के कारण इनके कामगारों को बोनस नहीं मिला था, उनको 8.33% बोनस दिलवाने का मामला बहुत महत्त्वपूर्ण था। सन्1966 में विद्युत मंडल कर्मचारियों को बोनस मिले, इसके लिये दावा दाखिल किया, तो अन्य कामगार संगठनोँ के नेताओं ने खिल्ली उड़ाई, परंतु मनहर भाई के गहरे अध्ययन के कारण न्यायालय में दावे का सन् 1974 में निपटारा हुआ और विद्युत मंडल के कामगार बोनस कानून के अधीन आते हैं, ऐसा निर्णय न्यायाधीकरण ने दिया, जिसके अनुसार सन् 1966 से 1974 की अवधि का 8.33% की दर से बोनस देने का आदेश जारी हुआ, इसलिए विद्युत मंडल में मजदूर संघ प्रणीत सशक्त संगठन खड़ा हो गया, बाद में उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में भी हमने यह दावा जीत लिया।

मनहरभाई अ. भा. अध्यक्ष थे, तब ऑल चायना फेडरेशन ऑफ ट्रेड युनियंस ने, जो चीन में एकमेव कामगार संघटन था, भा. म. संघ को चीन की सदिच्छा यात्रा करने की अपील की। मनहर भाई के नेतृत्व में दत्तोपंत ठेंगडी तथा चार महानुभावों ने चीन कीे यात्रा की। 28 अप्रैल 85 को मनहरभाई का बीजिंग रेडियो पर भाषण प्रसारित हुआ, जो पठनीय है। उन्होंने ‘चायना इन ट्रान्जिशन’ पुस्तिका लिखी।

आखिरी क्षण तक संघ कार्यरत मनहरभाई का दुःखद अंत 17 अप्रैल सन् 1990 को हुआ, उनकी पत्नी मंजुला बेन मेहता ने भारतीय जनता पार्टी का काम आगे जारी रखा है। मनहर भाई की स्मृति को विनम्र प्रणाम।
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