डीआरडीओ देश को हर तरह की मिसाइल दे सकता है – जी सतीश रेड्डी

देश के प्रधानमंत्री इस बात का दावा करते है कि अब भारत किसी भी दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब देने का दम रखता है। वहीं रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के प्रमुख डा. जी सतीश रेड्डी ने भी अपने एक बयान में इस बात का दावा किया है कि वह सेना की जरुरत के अनुसार किसी भी तरह की मिसाइल बनाकर दे सकते है। उन्होने इस बात का भी दावा किया कि रक्षा क्षेत्र के उपयोग में आने वाली ज्याातर चीजें अब भारत में ही तैयार हो रही है। भारत अपनी रक्षा ज़रूरतों के लिए स्वदेशी सामग्री के आधार पर मिसाइल निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है और इसमें डीआरडीओ का महत्वपूर्ण योगदान है।

भारत ने हाल ही में 400 किलोमीटर से अधिक मारक क्षमता वाली ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण किया। रक्षा अनुसंधान एवं संगठन विकास संगठन (DRDO) ने मिसाइल का प्रक्षेपण बालासोर के चांदीपुर परीक्षण केंद्र से किया था। डीआरडीओ के प्रमुख जी सतीश रेड्डी ने ब्रह्मोस के अलावा अन्य मिसाइलों के परीक्षण के संबंध में बताया कि ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है और परीक्षण का मुख्य उद्देश्य मिसाइल में स्वदेशी सामानों को बढाने के लिए किया गया है। ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली में शामिल कई स्वदेशी प्रणालियों का विस्तारित रेंज के साथ परीक्षण किया गया है जो एक सफल परीक्षण था।

डीआरडीओ की तरफ से जानकारी दी गयी कि स्वदेशी प्रणालियों के प्रयोग को लगातार बढ़ाया जा रहा है और यही वजह है कि ब्रह्मोस मिसाइल में स्वदेशी सामग्री को बढ़ा दिया गया है। पिछले करीब 40 दिनों में डीआरडीओ की तरफ से 10 मिसाइलों का सफल परीक्षण किया गया है। इन परीक्षणों का मुख्य उद्देश्य मिसाइल निर्माण में आत्मनिर्भरता को बढ़ाना है। भारत पिछले 5 सालों में मिसाइल सिस्टम के क्षेत्र में जितना आगे बढ़ा है उससे हमें करीब पूर्ण आत्मनिर्भरता हासिल हो चुकी है। निर्माण क्षेत्र की निजी कंपनियां भी विकसित हो चुकी है और अब हमारे साथ साझेदारी करने के लिए तैयार है।

5 अक्टूबर को टारपीडो के सुपरसोनिक मिसाइल असिस्टेंड रिलीज के सफल परीक्षण पर जी सतीश रेड्डी ने बताया कि “इस प्रणाली के पूरी तरह से सिद्ध होने और सेना में शामिल होने के बाद नौसेना की क्षमता को बढ़ाएगी”

वहीं 7 सितंबर को हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डेमॉस्ट्रेशन व्हीकल की उड़ान परीक्षण पर जी सतीश रेड्डी कहा, “यह पहली बार है जब डीआरडीओ ने अच्छी मात्रा में इस तरह का प्रयोग किया है और इसने सफलतापूर्वक काम किया है इससे हमारे लिए इन तकनीकों पर लंबे समय तक काम करने का एक मार्ग प्रशस्त किया। इन सभी चीजों पर काम करने और संपूर्ण मिसाइल प्रणाली तैयार करने में हमें लगभग 4 से 5 साल लगे”

9 अक्टूबर को रूद्रम एंटी रेडिएशन मिसाइल के सफल परीक्षण पर डीआरडीओ प्रमुख ने कहा, “यह एक विमान से प्रक्षेपित होने वाला विकिरण रोधी मिसाइल है, यह किसी भी उत्सर्जन तत्वों का पता लगाने में सक्षम होगा। इसकी मदद से आप उत्सर्जन तत्वों को लॉक कर सकेंगे और उन पर हमला भी कर सकेंगे। हमें विभिन्न परिस्थितियों में पूर्ण प्रणाली प्रौद्योगिकी को साबित करने के लिए कुछ और परीक्षण करने की आवश्यकता है। एक बार सफल परीक्षण हो जाने के बाद यह वायु सेना में शामिल हो जाएगा और दुश्मनों के उत्सर्जन तत्वों पर हमला करने में वायु सेना को मजबूती प्रदान करेगा”

12 अक्टूबर को निर्भय सब सोनिक क्रूज मिसाइल की उड़ान परीक्षण पर डा. सतीश रेड्डी कहा, “निर्भय का पहले भी परीक्षण किया जा चुका है और उसने अपने सभी परीक्षणों को सफलतापूर्वक पूरा किया है। हम केवल स्वदेशी सामग्री बढ़ाना चाहते थे लेकिन इसमें कुछ ख़ामियाँ आ गई है जिस पर हम काम कर रहे है”

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