ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कैसे बदला मध्य प्रदेश का गणित?

मध्य प्रदेश में हुए उप चुनाव में बीजेपी को बड़ी जीत हासिल हुई है। राज्य की कुल 28 सीटों पर हुए उप-चुनाव में से बीजेपी के खाते में 19 सीटें गयी जबकि कांग्रेस को मात्र 9 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा है जबकि इससे पहले विधानसभा चुनाव के दौरान इन सभी 28 सीटों में से सिर्फ 1 सीट बीजेपी के खाते में थी और बाकी 27 सीटें कांग्रेस ने जीती थी। मध्य प्रदेश में हुए इस परिवर्तन को लेकर हर कोई परेशान है कि आखिर कुछ महीनों में ही ऐसा बदलाव जनता ने क्यों कर दिया?

मध्य प्रदेश की राजनीति में पिछले कुछ समय से काफी परिवर्तन देखने को मिल रहा है। कांग्रेस सत्ता में थी लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया के जाने के बाद से अचानक से कांग्रेस भी सत्ता से बाहर हो गयी और अब उप-चुनाव में कांग्रेस को अपनी 19 सीटों से भी हाथ धोना पड़ गया। दरअसल मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया का आज भी एक राजा की तरफ सम्मान होता है और उनके कहने भर मात्र से जनता अपना फैसला बदल देती है। 20वीं सदी में अगर किसी के कहने मात्र से जनता अपना फैसला बदलने के लिए तैयार है तो उसका सीधा मतलब यह है कि सिंधिया भी अपनी जनता के दुख दर्द को सुनते और समझते है।

मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया और शिवराज की जोड़ी ने कमाल का काम किया और 19 सीटों पर विजय प्राप्त कर ली। इस जीत के बाद सिंधिया ने एक बार फिर कमलनाथ और दिग्विजय सिंह पर हमला बोला और इन दोनों नेताओं के एक पुराने बयान को लेकर कहा कि, “गद्दार मैं नहीं कमलनाथ और दिग्विजय सिंह है”। आप को बता दें कि जब सिंधिया ने कांग्रेस का हाथ छोड़ बीजेपी के साथ शुरुआत की थी तो कमलनाथ और दिग्विजय सिंह सहित कई नेताओं ने उन्हे गद्दार कहा था।

मध्य प्रदेश की जनता ने करीब 2 साल पहले राज्य की जिम्मेदारी कांग्रेस के हाथ में दी थी लेकिन पार्टी के आंतरिक कलह की वजह से ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पार्टी छोड़ दी और बीजेपी के साथ आगे का सफर शुरु कर दिया। इस बड़े फेरबदल के बाद राज्य में फिर से 28 सीटों पर उप चुनाव हुए जिसमें कांग्रेस को करारी हार झेलनी पड़ी। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने हार स्वीकार कर ली और कहा कि जनता का फैसला पार्टी ने स्वीकार कर लिया है और आगे इस पर विचार करेगी।

मध्य प्रदेश और राजस्थान दोनों ही राज्यों में कांग्रेस की सरकार की थी लेकिन मध्य प्रदेश में सिंधिया के जाने के बाद कांग्रेस भी सत्ता से बाहर हो गयी जबकि राजस्थान में अब भी अंतरकलह देखने को मिल रहा है। इस दौरान दोनों राज्यों में एक ही सवाल बार बार सामने आ रहा था कि राज्य में उन्हे की सत्ता के करीब रखा जा रहा है जो सोनिया गांधी के करीबी है जबकि युवा वर्ग को जिम्मेदारी से दूर रखा जा रहा है। ज्योतिरादित्य सिंधिया और सचिन पायटल दोनों ही युवा है और राहुल गांधी के करीबी भी बताए जाते है लेकिन बावजूद इसके भी इन दोनों को सीएम पद से दूर रखा गया। कांग्रेस से मिली अंदरुनी खबरों की मानें तो सोनिया गांंधी सिर्फ अपने करीबियों पर ही भरोसा करती है और पार्टी में राहुल गांधी की मर्जी से कोई भी फैसला नहीं होता है।

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