कांग्रेस पार्टी में बढ़ता आंतरिक कलह!

बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को गठबंधन के बाद भी बुरी तरह से हार का सामना करना पड़ा है जबकि बाकी पार्टियों ने करीब करीब अपनी इज़्ज़त बचा ली और सम्मान जनक सीट से विजयी हुई है लेकिन कांग्रेस ने जितने उम्मीदवार मैदान में उतारे थे उनमें से आधे लोगों की तो जमानत भी जब्त हो गयी। कांग्रेस ने अपनी चुनावी रैली में केंद्र की मोदी सरकार पर हमला बोला था और तमाम आरोप लगाए थे लेकिन चुनाव परिणाम को देख कर ऐसा लगता है कि बिहार की जनता को कांग्रेस का यह झूठा आरोप पसंद नहीं आया।

बिहार चुनाव में करारी हार के बाद पार्टी के असंतुष्ट नेता हार का ठीकरा पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर फोड़ रहे है जबकि शीर्ष नेता इसे मानने को तैयार नही है और साथ ही पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर आवाज़ उठाने के आरोप में कारण बताओ नोटिस भी जारी कर दिया है। चुनाव में लगातार हो रही हार के बाद झारखंड प्रभारी फुरकान अंसारी ने राहुल गांधी के नेतृत्व पर सवाल उठा दिया है और हार के लिए पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को जिम्मेदार ठहराया है जिसके बाद पार्टी ने फुरकान के खिलाफ कारणबताओ नोटिस जारी कर उनसे 7 दिन में जवाब मांगा है। फुरकान को नोटिस भेज जहां उन्हे पार्टी के खिलाफ बयानबाजी करने से रोका गया है वहीं बाकी लोगों के लिए भी यह संदेश हो गया है कि अगर पार्टी के शीर्ष नेताओं के खिलाफ टिप्पणी करेंगे तो पार्टी कार्रवाई कर सकती है।

बिहार विधानसभा चुनाव के बाद अब सभी पार्टियां आत्ममंथन पर लगी हुई है कि आखिर गलती कहां पर हो रही है कि कांग्रेस के हाथ से एक के बाद एक राज्य छूटता जा रहा है। इससे पहले भी चुनाव हार के बाद पार्टी में मंथन हुआ था लेकिन तब भी पार्टी किसी अंतिम निर्णय तक नहीं पहुंच सकी थी। दरअसल पार्टी के सूत्रों के मुताबिक इस हार के लिए पार्टी का शीर्ष नेतृत्व जिम्मेदार है लेकिन वह इसे मामने को तैयार नहीं है और पार्टी के दूसरे नेता यह बात कहना नहीं चाहते क्योंकि उन पर कार्रवाई हो सकती है। कांग्रेस पार्टी में वरिष्ठ बनाम युवा की लड़ाई तो बहुत पहले से चली आ रही है और मध्य प्रदेश व राजस्थान इसके ताजा उदाहरण है। कांग्रेस पार्टी में अंदरूनी कलह इसकी वजह से बढ़ती जा रही है।

कांग्रेस पार्टी में सोनिया गांधी के करीबी अभी भी अपने पॉवर को खोना नहीं चाहते है जबकि युवा वर्ग भी विकास और सत्ता की कमान को अपने हाथ में लेना चाहता है। ऐसा कहा जाता है कि सोनियां गांधी अपने पुराने वरिष्ठ नेताओ पर ही विश्ववास करती है जबकि युवाओं को वह सिर्फ सत्ता से बाहर रख कर काम करवा चाहती है। दूसरी तरफ राहुल गांधी ने अपनी सभाओ में भी कहा कि देश के युवा को मौका मिलना चाहिए लेकिन उनकी यह बात सिर्फ रैली तक ही सीमित रह जाती है और खुद उनकी पार्टी युवाओं को मौका नहीं दे रही है। कांग्रेस पार्टी का शीर्ष नेतृत्व युवाओं को मौका देने से डरता है क्योंकि उसे डर है कि उनका 50 सालों का सिस्टम टूट सकता है।

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