विद्यालय, ग्राम मौसम वेधशाला

भारत शीतोष्ण कटिबंध में स्थित है। यहां पर मानसूनी जलवायु पायी जाती है, जिसमें तीन ऋतुएं वर्षा, ग्रीष्म और शीत होती हैं। इनमें सबका अपना महत्व है, किन्तु वर्षा ऋतु सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। क्योंकि भारत एक कृषि प्रधान देश है और कृषि के लिए वर्षा की उपलब्धता सबसे जरूरी होती है। कई बार मौसम विज्ञानी वर्षा का अनुमान सही-सही नहीं लगा पाते, और इससे कृषि पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।

भारतीय लोकजीवन के अनुभवों में मौसम का अनुमान लगाना बहुत आवश्यक माना जाता है। यहां का समान्य ग्रामीण किसान भी मौसम की ऐसी सटीक भविष्यवाणी करने की क्षमता रखते हैं, जो यंत्रों के सहारे नहीं जाना जा सकता। यह उनके दैनन्दिन निरीक्षण पर निर्भर करता है।

ऐसा ही एक अध्ययन, जो दैनिक निरीक्षण पर आधारित है माडर्न हाईस्कूल शिवाजी नगर, पुणे और होलोवे प्राइमरी स्कूल दापोडी पुणे स्कूल  के विद्यार्थियों द्वारा कराया जा रहा है। हायर सेकेंडरी के विद्यार्थियों द्वारा दुनिया का अतुलनीय प्रोजेक्ट तैयार किया जा रहा है।

विद्यालयीन गतिविधियां

यह दैनिक कार्य फील्ड वर्क होता है।
– विभिन्न कक्षाओं के विद्यार्थी फोटाग्राफ इकठ्ठा करके उनके अनुरूप जैव संकेतों का दिन के दौरान निरीक्षण करके अपनी दैनिक निरीक्षण पुस्तिका में दर्ज करते हैं।
– मौसम यंत्रों के द्वारा समूह में मौसम के घटकों जैसे- तापमान, नमीं, वायुगति इत्यादि की रीडिंग लेकर उसे अपनी दैनिक निरीक्षण पुस्तिका में दर्ज करते हैं और अपने अध्ययन के दौरान विशेष निरीक्षक पर अपनी विशेष टिपण्णी लिखते हैं।
– पूरा समूह फोटोग्राफ लेकर उसकी तुलना किसी विशेष स्थान के मानक चार्ट से करते हैं और दैनिक मौसम की रिपोर्ट मौसम बोर्ड पर अंकित करते हैं।
– समूह में उसी दिन सभी आकड़ों की प्रविष्टि करते और सत्यता की जांच करते हैं और फोटो का सत्यापन करते हैं। भूगोल, विज्ञान, गणित के शिक्षकों की सहायता और सलाह से अगले 24 घंटों के मौसम का अनुमान लगाते हैं। यही समूह दैनिक रिपोर्ट की हां/नहीं कौशल, मौसम की साप्ताहिक रिपोर्ट, जैव संकेतों में बदलाव इत्यादि दर्ज करते हैं। यही समूह मौसम की मासिक रिपोर्ट भी तैयार करता है।
-नेचर क्लब ग्रुप समाज को मौसम के बदलाव की जानकारी दें।इसी तरह विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों के द्वारा स्थानीय मौसम के बदलाव का प्रभाव दर्ज किया जाता है और उसकी रिपोर्ट तैयार की जाती है। स्कूल के शिक्षकों तथा विद्यार्थियों की पूरी टीम प्रतिमाह एकत्र किए गए आकड़ों की समीक्षा करते हैं और इसके आधार पर मौसम की स्थिति का अनुमान लगाते हैं।

इससे होने वाले लाभ

– स्कूल की सहायता से शोध कार्य को बढ़ावा मिलता है।
– विद्यार्थियों के स्तर पर मौसम के मानकों का अध्ययन करने के कौशल में वृद्धि होती है।
– जैव संकेतों का अध्ययन प्रकृति का अध्ययन है, इसी तरह स्कूल स्तर पर परिस्थितिकीय कौशल्य में विकास होता है। इसके ही जीवन पर मौसम के प्रभावों का अध्ययन भी किया जाता है।
-जैव विविधता और प्रकृति के अध्ययन का कौशल विकसित होता है।

पाठ्यक्रम

-पांचवीं- कक्षा में पर्यावरण अध्ययन।
– जैव विविधता का अध्ययन।
– वैश्विक ऊष्माकरण।
– कृषि अपघात प्रबंधन।
– हाईटेक वैज्ञानिक उपकरण।
– निरीक्षण व समीक्षण का विकास।
-तकनीकी मानकों के मापन का कौैशल।
-स्कूल स्तर पर क्षमता निर्माण, टीम वर्क।
-चिंतन एवं कौशल विकास।
-तकनीकी एवं पर्यावरणीय चिंतन की समक्ष।
-स्वयं सीखने की पद्धति। औद्योगिक तरीके से प्रशिक्षण।
-डाटाबेस हैंडलिंग में निपुणता।
-समाज में वैज्ञानिक अनुसंधानों व प्रयोगों के द्वारा स्कूली शिक्षण।
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