स्वर्ग से सुंदर देवभूमि उत्तराखंड

अतीत की गौरवशाली परंपरा और विरासत में मिली संस्कृति-संस्कार के दम पर अपने आत्मविश्वास और पराक्रम के पंख लगाकर वर्तमान राज्य सरकार भविष्य की उड़ान भरने के लिए सिद्ध हो रही है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने उम्मीद जताई है कि विकास, प्रगति, पर्यटन, पर्यावरण आदि क्षेत्रों में उत्तराखंड राज्य आदर्श वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित होगा।

देवभूमि तपोभूमि और स्वर्ग से सुंदर उत्तराखंड इस वर्ष 2020 में अपना 21वां राज्य स्थापना दिवस मना रहा है। अतीत की गौरवपूर्ण विरासत को संवारता हुआ उत्तराखंड राज्य के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के नेतृत्व में आधुनिक युग में कदमताल करता हुआ विश्व का सर्वश्रेष्ठ आदर्श राज्य कहा जा सकता है। जिसने प्रकृति, पर्यावरण, परंपरा, संस्कृति, धर्म-कर्म, पर्यटन, स्वास्थ्य, सुरक्षा, जल, जंगल, जमीन, जानवर आदि सभी की संस्कृति को संरक्षित एवं संवर्धित करते हुए विकास, समृद्धि, आत्मनिर्भर तथा नए भारत के नवनिर्माण में एक राज्य के रूप में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के विकास और मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत उत्तराखंड के विकास के लिए दृढ़ संकल्पित होकर समर्पण भाव से कार्यरत है। केंद्र सरकार के सहयोग से राज्य सरकार देश का सबसे अग्रणी राज्य बनने की दिशा में अग्रसर है, उत्तराखंड सरकार राज्य का सर्वांगीण विकास का लक्ष्य लेकर काम कर रही है।

स्थापना, स्थायित्व, समृद्धि और ऊंची उड़ान

किसी भी राज्य के अस्तित्व में आने के बाद उसे स्थायित्व प्राप्त करने में बहुत लंबा समय लगता है लेकिन उत्तराखंड राज्य इसमें अपवाद है। बेहद कम समय में ही उत्तराखंड अपने पैरों पर खड़ा हो गया और मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के आने के बाद यह राज्य आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी आगे बढ़ता ही जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत और नया भारत बनाने के लिए उत्तराखंड सरकार प्रतिबद्ध है। कहते हैं कि जब तक स्थायित्व नहीं आता तब तक प्रगति व विकास करना संभव नहीं हो पाता। अतीत की गौरवशाली परंपरा और विरासत में मिली संस्कृति-संस्कार के दम पर अपने आत्मविश्वास और पराक्रम को पंख लगाकर वर्तमान राज्य सरकार भविष्य की उड़ान भरने के लिए सिद्ध हो रही है। त्रिवेंद्र सिंह रावत ने उम्मीद जताई है कि पर्यटन, पर्यावरण आदि क्षेत्रों में उत्तराखंड राज्य आदर्श वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित होगा। जिसे देखने, जानने और समझने हेतु पूरी दुनिया यहां आएगी।

नया भारत बनाने में उत्तराखंड की भूमिका

सभी राज्यों की संगठित शक्ति से ही अखंड भारत का निर्माण हुआ है। इसलिए नया समर्थ भारत बनाने के लिए सभी राज्यों का योगदान अपेक्षित है। इसमें अपनी ओर से यथासंभव उत्तराखंड राज्य योगदान दे रहा है और आगे अधिक योगदान देने के लिए स्वयं को सामर्थ्यवान बना रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, औद्योगिक आदि अन्य क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से विकसित किए जा रहे हैं। केंद्र सरकार से तालमेल बिठाकर राज्य सरकार विकास कर रही है। इससे सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि उत्तराखंड राज्य के पहले इन्वेस्टर समिट में ही 1 लाख 24 हजार करोड़ के एएमयू साइन हुए हैं। इसके बाद 3-4 हजार करोड़ के अन्य निवेश आये। उसके बाद पांच से छह माह में 16 हजार करोड रुपए का निवेश राज्य में आया। उत्तराखंड सरकार की इसे बहुत बड़ी उपलब्धि माना जा सकता है। बता दें कि यह जो निवेश आए वह केवल मैदानी व तराई भागों के लिए ही मर्यादित थे। वर्तमान समय में पहाड़ी क्षेत्रों के लिए भी निवेश आ रहा है। पर्यटन, पर्वत, पहाड़ी, मेडिकल, मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर आदि क्षेत्रों में संतुलित निवेश ‘डेस्टिनेशन ऑफ़ उत्तराखंड’ समिट के द्वारा आया है। उत्तराखंड इन्वेस्टर्स समिट की यह प्रमुख रूप से विशेषता रही है। भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टोलेरेंस की नीति और राज्य सरकार की पारदर्शी कार्यप्रणाली के चलते ही इतनी भारी मात्रा में निवेश आना संभव हुआ है।

आत्मनिर्भर उत्तराखंड-आत्मनिर्भर भारत

कोरोना संकटकाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को आत्मनिर्भर बनने का आह्वान किया है। आत्मनिर्भर बने बिना नया भारत बनाना मुश्किल है। यदि दुनिया में भारत का डंका बजाना है तो सर्वप्रथम हमें स्वयं आत्मनिर्भर बनना होगा तभी हम दुनिया की अपेक्षाओं, आकांक्षाओं और मांगों को पूरा कर पाएंगे। दुनिया को भारत से बहुत सी उम्मीदें हैं, इस उम्मीद पर खरा उतरने के लिए हमें कमर कसनी होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करने के लिए आत्मनिर्भर उत्तराखंड का दृढ़ संकल्प मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने लिया है और इस दिशा में ठोस कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।

राज्य स्तरीय रोजगार योजनाएं

कोरोना संकट के कारण बड़ी समस्या रोजगार और पलायन की है। रोजगार के लिए लोगों को अपने राज्य से अन्य राज्यों में पलायन न करना पड़े इसलिए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अनेकानेक प्रकार से रोजगार, स्वरोजगार, स्वदेशी और घरेलू उद्योगों को बढ़ावा दिया है तथा अनेक योजनाएं राज्य स्तर पर शुरू की गई है। इनमें प्रमुख रूप से मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना, जल संरक्षण उद्योग योजना, आटा चक्की व धान कुटाई योजना, होटल और रिसॉर्ट योजना आदि शामिल हैं।

वैश्विक पर्यटन केंद्र बनेगा उत्तराखंड

पर्यटन के लिए उत्तराखंड देश दुनिया में विख्यात है। हर साल लाखों की संख्या में पर्यटक यहां आते हैं और प्रकृति की गोद में कुछ समय बिताकर संतुष्टि एवं परम आनंद प्राप्त करते हैं। यहां प्रकृति की छटा ही निराली है, जो भी यहां पर आता है उसका बार-बार आने का मन करता है। ऐसा मनमोहक रमणीय राज्य है उत्तराखंड।

दुनियाभर के पर्यटकों को अपनी ओर और अधिक आकर्षित करने के लिए उत्तराखंड सरकार बहुत तेज गति से विश्वस्तरीय 13 अन्य पर्यटन स्थलों का निर्माण कर रही है। पिथौरागढ़ में सरकार की 50 हेक्टेयर में टयूलिप गार्डन बनाने की योजना है। बताते चलें कि भारत के कश्मीर में 1 हेक्टयेर में एकमात्र गार्डन बनाया गया है, जिसमें केवल 2 माह फूल देखने को मिलते हैं। जिसे देखने के लिए दुनिया भर के लोग कश्मीर में आते हैं लेकिन उत्तराखंड में बनाए जाने वाले ट्यूलिप गार्डन में वर्ष के 8 महीने यह सुंदर मनमोहक फूल दृष्टिगोचर होंगे। इसके अलावा वैलनेस वाटर स्पोर्ट्स आदि विभिन्न प्रकार के थीम पर आधारित सर्वांग सुंदर मनोरम पर्यटन स्थल राज्य में बनाए जाएंगे। साथ ही पुरातन, पौराणिक ऐतिहासिक मंदिरों एवं अन्य धार्मिक स्थलों का भी आधुनिकरण किया जाएगा।

तीर्थ स्थलों की पवित्रता बरकरार रखनी होगी

हिन्दू धर्म के चार धामों के लिए उत्तराखंड विश्व प्रसिद्ध है। केदारनाथ, बद्रीनाथ, हरिद्वार और ऋषिकेश सहित गंगोत्री, यमुनोत्री एवं अन्य पवित्र नदियों का उद्गम स्थल भी यहीं है। इसके अलावा सिखों के लिए हेमकुंड साहिब और बौद्ध धर्मावलम्बियों के लिए मिद्रोलिंग मठ व् उसका बौद्ध स्तूप श्रद्धा के प्रमुख केंद्र है। इसलिए उत्तराखंड को देवभूमि भी कहा जाता है। भारत सहित विदेशी धर्मावलम्बी भी इन पवित्र स्थानों पर श्रद्धाभाव से बड़ी संख्या में आते है। लेकिन अब धीरे-धीरे पिकनिक और हनीमून मनाने के लिए भी लोग यहां आने लगे है, यह चिंता की बात है। क्योंकि उनके मन में श्रद्धा की भावना न होकर मौज-मस्ती की भावना होती है और वह तीर्थ स्थलों की पवित्रता को अपवित्र करते हैं। मौज मस्ती के लिए उत्तराखंड में अनेक मशहूर पर्यटन स्थल है जिनमें नैनीताल, मसूरी, अल्मोड़ा, कसौनी, भीमताल, रानीखेत, आदि है। उन्हें वहां जाना चाहिए और जी भर के आनंद लेना चाहिए। उत्तराखंड सरकार का भी यह परम दायित्व है कि वह यह सुनिश्चित करे कि पवित्र तीर्थ स्थलों की पवित्रता भंग न हो। इसके लिए चाहिए कि वह तीर्थ स्थलों के आसपास विकास कार्य पर्यटन के दृष्टी से न करे बल्कि धार्मिक दृष्टी से करे।

पंडित दीनदयाल उपाध्याय के मार्ग पर उत्तराखंड सरकार

विकास और प्रगति के अंधी दौड़ में किसी का ध्यान पिछड़े व्यक्ति तक नहीं जाता। सरकारें केवल समृद्ध लोगों के लिए ही काम करती दिखाई देती हैं, बावजूद इसके उत्तराखंड सरकार पंडित दीनदयाल उपाध्याय के मार्ग पर चलते हुए अन्त्योदय की अवधारणा को साकार कर रही है, इसलिए वह प्रशंसा की पात्र है। विकास की पंक्ति में आखिरी छोर पर खड़े व्यक्ति का जीवन स्तर ऊंचा उठाने के लिए भी उत्तराखंड सरकार सतत प्रयत्नशील है। सरकार ने राज्य का सर्वांगीण विकास और आम लोगों का जीवन स्तर सुधारने के लिए जनपद स्तर पर आंकड़े जुटाए हैं। उसी के आधार पर सभी जनकल्याणकारी योजनाएं बनाई गई हैं। जो विशुद्ध रूप से पंडित दीनदयाल उपाध्याय के सिद्धांतों पर आधारित है। गरीबों का उत्थान कैसे हो? यह राज्य सरकार की प्राथमिकता में शामिल है। इसी का परिणाम है कि भारत की प्रति व्यक्ति औसत आय से राज्य की 1 लाख 90 हजार प्लस औसत आय हैं। जो कि देश की औसत आय से बहुत अधिक आगे है। प्रत्येक व्यक्ति को विकास की धारा में शामिल करने के लिए जिला स्तर में प्रति व्यक्ति आय पर फोकस किया जा रहा है।

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