आध्यात्मिक पर्यटन का वैश्विक केंद्र

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धर्म और अध्यात्म का अनूठा संगम है अयोध्या। श्रीरामलला के मंदिर का कपाट खुलते ही अयोध्या पर्यटन का एक मुख्य केंद्र भी बन जाएगा। देश-विदेश से लाखों की संख्या में पर्यटक भगवान श्रीराम के दर्शन कर प्राकृतिक सौंदर्य बिखेरते अयोध्या घूमेंगे।

भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण का अमृत काल

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राम जन्मभूमि मंदिर का निर्माण गर्व का क्षण है, लेकिन इन क्षणों में इस पर भी विचार किया जाना चाहिए कि हिंदू समाज को किन कारणों से विदेशी हमलावरों के अत्याचार और उनकी गुलामी का सामना करना पड़ा. निस्संदेह हिंदू समाज के एकजुट न होने के कारण विदेशी हमलावरों ने फायदा उठाया. यह स्वीकार किया जाना चाहिए कि भेदभाव और छुआछूत हिंदू समाज को कमजोर करने का एक बड़ा कारण बना। अब जब समाज के हर तबके को अपनाने वाले भगवान राम के नाम का मंदिर बनने जा रहा है तब सभी का यह दायित्व बनता है कि वे पूरे हिंदू समाज को जोड़ने और उनके बीच की बची-खुची कुरीतियों को खत्म करने पर विशेष ध्यान दें। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि अयोध्या एक ऐसा केंद्र बने जो भारतीय समाज को आदर्श रूप में स्थापित करने में सहायक बने।

हर घर अयोध्या बने

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हर मनुष्य में रामत्व होना चाहिए। हर घर में रामराज्य होना चाहिए। संतुलित जीवन, उचित आहार, उचित शिक्षा, संस्कारित दिनचर्या, सकारात्मक विचार और कुशल जीवन शैली को अपने जीवन में उतारना चाहिए। आने वाली पीढ़ी को यह मार्ग वर्तमान पीढ़ी ही दिखा सकती हैं तभी रामराज्य का संकल्प सार्थक होगा।

रामराज्य की संकल्पना

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‘दैहिक दैविक भौतिक तापा, रामराज नहिं काहुहि ब्यापा’ श्रीराम आदर्श पुरुष थे। राम राज्य में न कोई अल्पायु था और न वहां की प्रजा दरिद्र ही थी। सभी प्राणियों में संतोष का भाव था। एक सुंदर और नीतिगत जीवन, आदर्श व्यवहार, धर्म की रक्षा, राजा और प्रजा दोनों करते थे।

आदर्श लोक तंत्र को समर्पित श्रीराम

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श्रीराम आदर्श हैं तो रामायण हमारी संस्कृति है। जीवन के पथ पर इनके आदर्शों का अनुकरण ही हमारा मार्गदर्शन करते हैं जो बताते हैं कि एक पिता, पति, भाई, सखा और राजा के रुप में मानवीय आचरण और व्यवहार कैसा होना चाहिए। रामायण के पन्नों को पलट कर देखें तो राजा होने के पश्चात भी राम मन-वचन-कर्म से लोकतांत्रिक थे।  

दिव्य आदर्श का भव्य मंदिर

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अयोध्या पुन: अपने अलौकिक स्वरूप को प्राप्त करने जा रही है, भगवान श्रीराम पुन: अपने मंदिर में विराजमान होने जा रहे हैं, भारत का आदर्श पुन: प्रस्थापित होने जा रहा है, अब भारतवासियों का यह कर्तव्य है कि इस आदर्श का हमेशा चिंतन करें और उसे अपने जीवन का अंग बनाकर उसके अनुरूप चलने का पूर्ण प्रयत्न करें।

तटीय पर्यटन है गोवा की शान

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गोवा अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए विश्व विख्यात है। यहां आनेवाले देशी-विदेशी पर्यटक यहां की मनमोहक छटा को देखकर मंत्रमुग्ध हो जाते है। गोवा अपने समुद्री तट के लिए विख्यात है।गोवा में पर्यटक भीड़-भाड़ से दूर एकांत और शांत समुद्री लहरों का आनंद लेना चाहते हैं।

सरकार आपके द्वार

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विकास का घोड़ा योजनाओं पर दौड़ा। जी हां गोवा के संदर्भ में यह पूरी तरह सटीक बैठती है। गोवा राज्य के विकास के लिए कई तरह की योजनाएं लागू की गई हैं। योजनाएं कागजों पर ही सीमित नहीं है बल्कि यह पूरी तरह से कार्यान्वित भी है। एमपीएलएडीएस हो, या फिर महिलाओं के लिए कल्याणकारी योजनाएं हों, मछुआरों की नावों का आधुनिकीकरण हो या फिर प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना या अन्य योजनाएं हों, सभी का लाभ लाभार्थियों को मिल रहा है। विकास की ताल पर सरकारी योजनाएं चल रही हैं।

आदर्श स्थापित करना मेरा लक्ष्य डॉ. प्रमोद सावंत – मुख्यमंत्री-गोवा

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गोवा राज्य की प्रतिमा अभी तक भोग-भूमि के रूप में की जा रही थी। वर्षों तक राजनैतिक उदासीनता के चलते गोवा का विकास कई रोडों में अटका रहा। परंतु आज उसे एक ऐसा नेतृत्व प्राप्त है, जिसके पास गोवा के विकास का स्पष्ट रोड मैप तैयार है। भविष्य का गोवा कैसा होना चाहिए, इसकी स्पष्ट संकल्पना उनके मस्तिष्क में तैयार है। गोवा के मुख्य मंत्री डॉ. प्रमोद सावंत ने अपने साक्षात्कार में उनकी गोवा के विकास के प्रति कटिबद्धता को स्पष्ट रूप से चिन्हित किया है।

इतिहास के पन्नों में गोवा

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स्कंद पुराण के अंतर्गत सहयाद्री खंड में गोवा के लिए गोराष्ट्र तथा गोमांत शब्द का उल्लेख किया गया है, वहीं नए पाषाण युग की मानव बस्तियों के अवशेष भी गोवा में मिले हैं। गोवा का इतिहास बहुत विस्तृत है। डालते है उसपर एक नजर।

भारतीय चष्मे से देखें गोवा

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कुल मिलाकर मुख्य मंत्री डॉ. प्रमोद सावंत का यह लक्ष्य साफ दिखाई देता है कि वे गोवा को उसके सम्पन्न इतिहास के साथ विकास के उच्च पायदान पर ले जाना चाहते हैं और अपनी तीव्र इच्छाशक्ति, कर्तव्यपरायणता तथा गति के कारण उसमें सफल भी हो रहे हैं। केंद्र की सरकार का भी उनको पूर्ण समर्थन मिल रहा है। वे स्वयं कई बार यह कह चुके हैं कि डबल इंजन सरकार होने के कारण गोवा प्रगति पथ दौड रहा है।

गजब के हैं ये अजब मंदिर

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अगर कोई पूछे कि मंदिर किसके लिए प्रसिद्ध है तो उत्तर होगा भगवान के लिए परंतु भारत में कई ऐसे मंदिर हैं जो केवल भगवान के लिए नही अपितु कुछ अलग ही कारणों से प्रसिद्ध हैं। कुछ मंदिरों के तो भगवान भी बंदर या मोटरसाइकल हैं। ऐसे अजब-गजब मंदिरों की जानकारी दे रहा है यह लेख।

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