स्वर्ग से सुंदर देवभूमि उत्तराखंड

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अतीत की गौरवशाली परंपरा और विरासत में मिली संस्कृति-संस्कार के दम पर अपने आत्मविश्वास और पराक्रम के पंख लगाकर वर्तमान राज्य सरकार भविष्य की उड़ान भरने के लिए सिद्ध हो रही है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने उम्मीद जताई है कि विकास, प्रगति, पर्यटन, पर्यावरण आदि क्षेत्रों में उत्तराखंड राज्य आदर्श वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित होगा।

कला में परिवर्तन हो रहा है

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निजी तौर पर तो कला के क्षेत्र में हो तो बहुत कुछ रहा है जिसके कारण भारत के चित्रकारों को निरंतर पहचान मिल रही है किन्तु आवश्यकता है इस दिशा में सरकार द्वारा भी कोई ठोस कदम उठाने की। कलाकारों को महज सम्मानित कर देने से कला का सम्यक विकास नहीं होगा।कला तभी जीवित रह सकती है, जब कलाकार जीवित रहे और अपने जीवन निर्वाह के लिए किए जाने वाले प्रयासों से परे होकर विचार करने के लिए उसका मन स्वतंत्र हो।

पर्यटन उद्योग के विकास में तेजी

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पर्यटन में साधनों के विकास के साथ तेजी से इजाफा हो रहा है। आज देश के जीडीपी में पर्यटन उद्योग की भागीदारी लगभग साढ़े नौ प्रतिशत है। इससे नए-नए रोजगार उपलब्ध हो रहे हैं। ‘उड़ान’ जैसी नई योजना के अंतर्गत देश के छोटे हवाई अड्डों का विकास किया जा रहा है, जिससे देश में आंतरिक हवाई सफर आम नागरिकों की पहुंच में आ गया है।

भारतीय पर्यटन की जान : वन पर्यटन

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सम्पूर्ण भारत के वन्य-जीवन का आनंद उठाने के लिए तो शायद कुछेक साल भी कम पड़ेंगे। लेकिन हमारे नियमित पर्यटन स्थलों के कार्यक्रम के साथ यदि हम वन-पर्यटन का कार्यक्रम भी जोड़ दें तो भारत के कुछ महत्वपूर्ण अभयारण्यों का दर्शन करना और कुछ अनोखे जीव-जंतुओं को देखना शायद मुश्किल न होगा। हजारो वर्षों की परंपरा और गौरवशाली इतिहास के साथ-साथ ही, हमारे देश को समृद्धशील भूगोल और सतरंगी प्राकृतिक संपदा का वरदान भी मिला है। जहां एक ओर विदेशी पर्यटकों के लिए हमारा भारत, ताजमहल और अजंता-एलोरा का देश है, आलिशान राजमहलों

हमर छत्तीसगढ़!!

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छत्तीसगढ़ की विशेषता है यहां का अपनापन, यहां का आदर-आतिथ्य, यहां की संस्कृति, यहां का भोजन, यहां के वन, यहां के वनवासी, यहां का मौन, यहां का शांत जीवन, यहां के व्रत और यहां के उत्सव। इसलिए पधारो हमर छत्तीसगढ़!!  १ नवंबर २००० यही वह तारीख है जब, एक नए राज्य छत्तीसगढ़ का जन्म हुआ था। केवल १७ वर्ष पहले जन्मे इस राज्य में अछूते पर्यटन स्थलों की भरमार है। आदिवासी और ग्राम्य संस्कृति से सराबोर इस राज्य में आना, किसी स्वर्ग में आने के समान है। शहरी आपाधापी से दूर... मौन, शांति और आनंद के लिए, छत्तीसगढ़ से बेहतर

अद्भुत गोवा

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गोवा के समुद्री किनारे तो अद्भुत हैं। मीरामार समुद्री तट यानी सुनहरी रेत का समुद्री किनारा। यहां के सनबाथ का अनुभव अवर्णनीय है। गोवा की सैर हमेशा सैलानियों की स्मृतियों में छायी रहती है। गोवा का नाम सुनकर ही मन चर्च और समुद्र किनारों की छवि बनाने लगता है परंतु गोवा के मंदिर भी अद्भुत हैं और इन मंदिरों ने ही गोवा की संस्कृति की रक्षा करने का कर्य किया है।  भारत १५ अगस्त १९४७ को स्वतंत्र हुआ फिर भी गोवा में पराधीनता कायम रही। उसके बाद कुछ काल शांति रही परंतु बाद में सन् १९५६ में गोवा लिबरेशन आर्मी की स्थ

पर्यटन क्षेत्रों से समृद्ध महाराष्ट्र

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महाराष्ट्र इतिहास, अध्यात्म एवं संस्कृति से भरापूरा है और पर्यटन के अनोखे अवसर प्रदान करता है। प्रकृति ने इसे खूब सौगात दी है। यहां के समुद्र तट और अरण्य दोनों समान रूप से आकर्षक है। महाराष्ट्र पर्यटन की दृष्टि से बहुत समृद्ध है। परंतु ऐसा लगता है कि जितना आवश्यक है उतनी शासकीय मदद नहीं मिलती या फिर राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी के कारण प्रदेश पर्यटन के विकास में पिछड़ रहा है। यहां कई ऐतिहासिक किले हैं, पत्थरों में उकेरी हुई उत्कृष्ट चित्रकारी है, कास पठार जैसे अनेक स्थान हैं जो महाराष्ट्र में ‘वैली

उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत और मीडिया

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  उत्तर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा रही है। शिक्षा, कला, संगीत, साहित्य, संस्कृति क्षेत्र में यहां के शिक्षाविदों एवं कलाकारों ने पूरे देश में ही नहीं अपितु वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। हिंदी पत्रकारिता का प्रारंभ भी उत्तर प्रदेश के

मानसरोवर की दैवीय अनुभूति

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कैलाश मानसरोवर को देखने की तीव्र इच्छा हमेशा से ही मेरे में थी। मेरी इस इच्छा को साक्षात कैलाशपति ने पूर्ण भी किया। ठाणे की एक टूर कंपनी ‘ईशा टूर्स’ के साथ मैंने और मेरी बेटी ने यात्रा करना निश्चित किया। यात्रा के लिये आवश्यक तैयारियां कीं। सारे आवश्यक मेडिकल सर्टिफिकेट तैयार किये।

मेरा यूरोप सफर

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रोम शहर में प्राचीन रोम साम्राज्य का भूषण कहलाने वाला कोलोसिअम है। प्राचीन काल में सत्तर से अस्सी हजार प्रेक्षक यहां बैठते थे। अब ये इमारत भग्नावस्था में है।

नालंदा का पुनरुद्धार

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हमारा अतीत बड़ा ही समृद्ध, वैभव से भरा और गौरवशाली रहा है। यह पुण्यभूमि प्रसिद्ध है और इसके निवासी आर्य हैं, विद्या कला कौशल्य में सबसे प्रथम आचार्य हैं।

माउंट एवरेस्ट- बेस कैम्प ट्रेक

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मनोरम निसर्ग के बीच पगडंडी से चलना आरंभ हुआ। आगे क्या होगा, कैसे होगा, चढ़ाई के कितने कष्ट होंगे आदि शंकाएं थीं ही। कुछ देर चलने पर बाईं ओर कलकल बहती दूधकोसी नदी दिखाई दी।

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