कुछ मीठा हो जाए के नाम पर केवल चॉकलेट क्यों?

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त्यौहारों का देश कहे जाने वाले भारतवर्ष में शायद ही कोई हिस्सा हो, जहां कोई विशेष मिठाई न बनती हो लेकिन पिछले कुछ वर्षों से हिंदुओं के त्यौहारों के अवसर पर मीठे के नाम पर चॉकलेट के विज्ञापन आते हैं। बॉयकाट बालीवुड की तर्ज पर इनके विरुद्ध कार्रवाई की जानी चाहिए। सरकार को भी इस मामले में संज्ञान लेना चाहिए।

मर्द का दर्द

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महिलाएं लम्बे समय तक हाशिए पर रही थीं इसलिए उनके विकास के लिए तमाम कानून और आयोग बनाए गए लेकिन अब बहुत सारी महिलाएं उनका दुरुपयोग कर पुरुषों को प्रताड़ित कर रही हैं। आवश्यकता है कि एक बार फिर उन नियमों की समीक्षा की जाए तथा कुछ ऐसे भी नए कानून बनें कि पुरुषों के साथ न्याय हो सके।

बांग्लादेश बनता बंगाल

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बंगाल में बढ़ती हिंसा इस बात की द्योतक है कि देश का यह राज्य बहुत तेजी से बांग्लादेश बनने की दिशा में बढ़ रहा है। केंद्र सरकार को ममता बनर्जी सरकार के इस ‘खेला’ के प्रति सावधान होने तथा तत्काल बल प्रयोग करने की आवश्यकता है। यदि अभी नहीं चेता गया तो बंगाल की आग अन्य राज्यों को भी अपनी चपेट में ले सकती है।

सैनिक निर्माण करनेवाली संस्था-डॉ. दिलीप बेलगावकर

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स्वतंत्रता के 10 वर्ष पूर्व से ही एक संस्था भारत के उज्ज्वल भविष्य के लिये, एक सशक्त सेना के निर्माण के लिए सैनिक तैयार कर रही है, उस संस्था का नाम है, भोंसला मिलिट्री स्कूल। प्रस्तुत है देश की सुरक्षा व्यवस्था तथा भोंसला मिलिट्री स्कूल की भविष्यकालीन योजनाओं के संदर्भ…

उत्तराखंड भारत की सांस्कृतिक धरोहर – स्वामी विश्वेश्वरानंद महाराज

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सनातन धर्म की पुनर्स्थापना आद्य शंकराचार्य ने की। उन्होंने शस्त्र नहीं चलाया, केवल शास्त्र के माध्यम से ही समाज में सनातन धर्म की पुनर्स्थापना की। इसलिए शास्त्र परम्परा का संरक्षण व संवर्धन होना चाहिए। यह उद्गार व्यक्त करते हुए अपने साक्षात्कार में संन्यास आश्रम के महामंडलेश्वर आचार्य स्वामी विश्वेश्वरानंद गिरि महाराज ने उत्तराखंड के आध्यात्मिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला। पेश है उनसे बातचीत के प्रमुख अंश –

शरणार्थी संकट या षड्यंत्र?

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दुनिया सकते में है कि इस संकट का मुकाबला कैसे करें? लेकिन क्या सच में यह शरणार्थी संकट है या फिर एक गहरा षड्यंत्र? कुछ वर्षो बाद फिर किसी अन्य इस्लामिक देश में ऐसा ही कुछ घटनाक्रम हो, तो आश्चर्य मत कीजिएगा क्योंकि ऐसा ही होगा।

केवल राजभाषा नहीं काजभाषा बने

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देश की स्वतंत्रता के बाद हिंदी को राजभाषा का तो दर्जा दे दिया गया परन्तु राजभाषा के नाते उसे जो गौरव सम्मान मिलना चाहिए था, वह नहीं दिया गया। भाषा राष्ट्र की पहचान और सम्मान होती है। यदि उसे हमारे ही देशवासी उचित सम्मान नहीं देंगे तो भला दुनिया में कौन देगा? बावजूद इसके आज दुनियाभर में हिंदी का डंका बज रहा है और वह दुनिया में अंग्रेजी को पछाड़कर सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा बन गई है।

फैशन पर भारी खादी

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खादी वस्त्र नहीं विचार है, भारतीय संस्कृति का आधार है। खादी हिंदुस्थान की समस्त जनता की एकता और उसकी आर्थिक स्वतंत्रता का प्रतीक है। करोड़ों को वह रोजगार देती है, अपनत्व देती है। खादी ने अब करवट ली है, वह आधुनिक फैशन और ग्लैमर का हिस्सा बन गई है।

भारत के लिए खतरा रोहिंग्या मुसलमान

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जांच में पता चला कि अलकायदा का आतंकवादी रहमान कई रोहिंग्याओं से सीधे संपर्क में था और वह दिल्ली, मणिपुर और मिज़ोरम में बेस बनाकर रोहिंग्या मुसलमानों को अलकायदा में भर्ती करना चाहता था। बताया जाता है कि रहमान अल कायदा के टॉप कमांडर से सीधे संपर्क में था और उनके निर्देश पर नापाक इरादों को अंजाम देने की तैयारियों में जुटा हुआ था। यह बात किसी से छुपी हुई नहीं है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई रोहिंग्या मुसलमानों को भारत में आतंकवादी हमला करने के लिए इस्तेमाल करना चाहती है। इस काम को अंजाम देने के लिए उसने भारत में अपने स्लीपर सेल के नेटवर्क को सक्रिय कर दिया है।

एच. जे. दोशी हॉस्पिटल का कोरोना काल में योगदान

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मेडिकल डायरेक्टर डॉ. वैभव देवगिरकर के संग अधिकतर ऐसे कर्मचारी थे जो घड़ी की ओर देखते ही नहीं थे ताकि आपदा की यह घड़ी टल जाये। अपने निर्धारित कार्य को करते हुए भी स्टाफ को जो भी कार्य दिया गया या कहा गया उन्होंने उसे पुरे मनोयोग से पूरा किया।

महाकाल की महाशिवरात्रि

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महाशिवरात्रि को पृथ्वी का उत्तरी गोलार्द्ध कुछ ऐसी स्थिति में होता है कि मानव में आध्यात्मिक ऊर्जा सहज ही ऊपर की ओर उठती है इसीलिए हमारे ऋषि-मुनियों ने पूरी रात जागरण कर उत्सव मनाने की प्रथा-परंपरा स्थापित की।

चीन के चंगुल से आजाद होगा तिब्बत

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भारत-चीन तनाव के बीच अमेरिका ने दुनिया में तिब्बत का मुद्दा उठाकर एक तरह से भारत को मौका दिया है चीन के विस्तारवादी नीति का जवाब देने का। भारत के सामने भी ‘करो या मरो’ की स्थिति है। भारत के पास नेहरू की गलती को सुधारने का यही आखरी और सबसे अच्छा मौका है। यदि भारत भी दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय देकर अमेरिका की तरह अपनी नीति में आक्रामक बदलाव करे तो निश्चित रूप से चीनी ड्रैगन का फन कुचला जा सकता है।

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