जयंती विशेष: भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन की कुछ अनोखी कहानियां

 
देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को शुक्रवार को उनकी 96वीं जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की गयी। भारतरत्न से सम्मानित अटल बिहारी वाजपेयी को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह और पियूष गोयल सहित तमाम नेताओं ने सदैव अटल समाधि पर श्रद्धांजलि दी। अटल बिहारी वाजपेयी की 96वीं जयंती पर उनके स्मारक सदैव अटल पर कार्यक्रम आयोजित किया गया जहां राजनीति जगत की जानीमानी हस्तियों ने सिरकत की। सभी ने पूर्व पीएम अटल बिहारी को याद किया और उनके देश प्रेम की गाथा को एक दूसरे से साझा किया। 
 
पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी एक ऐसे नेता थे जिन्हे सत्ता के साथ साथ विपक्ष के लोग भी पसंद करते थे उन्होने पहली बार 1957 में लोकसभा का चुनाव लड़ा था और सांसद बने थे। पूरे राजनीतिक जीवन में 10 बार लोकसभा का चुनाव और 2 बार राज्यसभा का चुनाव जीता है। अटल जी तीन बार देश के प्रधानमंत्री भी रहे है। आप को बता दें कि अटल जी एक नेता के साथ साथ संघ कार्यकर्ता, एक अच्छे कवि और पत्रकार भी थे इसलिए शायद उनमें समझने और बोलने की कला अच्छी थी। वैसे तो अटल जी के जीवन से जुड़ी हजारों कहानियां है जो आज के नेताओं के लिए प्रेरक हो सकती है। अटल जी की जयंती पर हम कुछ कहानियां आप साझा करते है। 
 

 

पूर्व पीएम इंदिरा गांधी के आदेश पर पूरे देश में 1975 में आपातकाल लगा दिया गया था जो 1977 तक चला। देश 21 महीने तक आपातकाल में रहा जहां हजारों लोगों की मौत हो गयी थी लेकिन सत्ता परिवर्तन होने के बाद इंदिरा गांधी को इस बात का डर सताने लगा कि अब जनता कहीं उनके खिलाफ विद्रोह ना कर दे या फिर सरकार कहीं बदले की भावना से कोई कार्रवाई ना कर दे। 1977 में अटल बिहारी वाजपेयी विदेश मंत्री बनाए गये थे। शपथ ग्रहण के बाद अटल बिहारी वाजपेयी सीधे इंदिरा गांधी से मिलने उनके आवास पर पहुंच गये और उनके मन के डर को समझते हुए उन्हे आश्वासन दिया कि सरकार उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करेगी और जनता के बीच में किसी भी आप के विरोध में कोई बयान नहीं दिया जायेगा। पूर्व पीएम अटल जी ने इंदिरा गांधी को यह आश्वासन दिया कि आप के परिवार और पार्टी के खिलाफ कोई भी सत्ताधारी नेता बयान नहीं देगा और हिंसा भड़काने जैसी कोई साजिश नहीं की जायेगी।

 

 
बात सन 2004 की है जब अटल बिहारी वाजयेपी प्रधानमंत्री पद से विमुक्त हो चुके थे। मध्य प्रदेश में अपने जन्मदिन के दूसरे दिन एक कार्यक्रम के दौरान उन्होने परमाणु परीक्षण को लेकर एक खुलासा किया। अटल बिहारी वाजयेपी के परमाणु परीक्षण की कहानी तो सभी को पता है और उसके लिए सभी लोग अटल जी का धन्यवाद करते है क्योकि अमेरिका जैसे देश के खिलाफ जाकर यह परीक्षण करना इतना आसान नहीं था। मध्य प्रदेश में जनता को संबोधित करते हुए अटल बिहारी जी ने कहा कि, “जब में पीएम पद की शपथ ले रहा था तो पूर्व पीएम पीवी नरसिम्हा राव मेरे पास आये और एक कागज दिया जिस पर लिखा था बम तैयार है इसको सिर्फ फोड़ना है पीछे मत हटना” अटल जी की यह बात इतना बताने के लिए काफी थी कि इस परीक्षण का श्रेय कहीं ना कहीं पूर्व पीएम नरसिम्हा राव को दिया जा रहा है। अटल बिहारी वाजपेयी की इसी यदा का कायल विपक्षी दल होता था क्योकि वह कभी श्रेय लेने के पीछे नहीं भागते थे। 
  
चुनाव के दौरान अक्सर नेता अपनी बड़ी और लक्जरी कारों में आते है। नेता के साथ कारों का काफिला भी चलता है जो उनके रौब और रुतबे को बयां करता है लेकिन पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी ने एक इंटरव्यू के दौरान बताया कि चुनाव के समय उनके पास सिर्फ 2 जीप थी। एक जो पार्टी ने दिया था और दूसरी किराए पर ली गयी थी। देश की हालत बहुत अच्छी नहीं थी। गांव में ज्यादातर सड़कें कच्ची थी और जंगली इलाके ज्यादा थे। सन 1957 के चुनाव का जिक्र करते हुए अटल जी ने बताया कि उत्तर प्रदेश में फरवरी से जून के महीने में चुनाव था। जनसंघ की तरफ से सीमित दायरों में प्रचार जोरों पर था लेकिन इसी दौरान बारिश हो गयी जिससे अटल जी की जीप कच्ची सड़कों पर फंस जा रही थी और गांव गांव नहीं पहुंच पा रही थी जिसके बाद अटल जी ने 50-50 लोगों का समूह बना कर पैदल ही यात्रा शुरु कर दी। जनसंघ की तरफ से मिली जीप भी अक्सर धोखा दे देती थी। एक बार चुनाव प्रचार के दौरान जीप स्टार्ट नहीं हुई जिसके बाद कार्यकर्ताओं को धक्का लगाना पड़ा लेकिन फिर भी जब जीप चालू नहीं हुई तो खुद अटल जी भी कार्यकर्ताओं के साथ जीप को धक्का लगाने लगे फिर कहीं बड़ी मशक्कत के बाद जीप चालू हुई।
 
पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी एक कवि और पत्रकार भी थे इसलिए उनके पास हर सवाल का जवाब होता था चाहे वह सीधा सवाल हो या फिर टेढा। अटल बिहारी जी कहा कि एक बार पाकिस्तान के एक मंत्री ने कहा कि कश्मीर के बिना पाकिस्तान अधूरा है, जिस पर अटल जी ने कहा कि पाकिस्तान के बिना हिन्दुस्तान अधूरा है। एक पत्रकार ने अटल जी से सवाल किया कि बीजेपी में एक अटल बिहारी वाजपेयी का दल है, एक आडवाणी का दल है? जिस पर अटल जी ने कहा कि मैं कोई दलदल में नहीं हूं मैं दूसरों के दलदल में अपना कमल खिलाता हूं।
 
अटल बिहारी बाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर में हुआ था। अपनी शिक्षा के बाद उन्होने बहुत ही कम उम्र में स्वतंत्रता संग्राम में शामिल हो गये। सन 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान वाजपेयी जी को 23 दिन तक जेल में रखा गया था। 

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