विवेकानंद एज्युकेशन सोसायटी

1959 का वर्ष था। मुंबई के उपनगर चेंबूर में ध्येय से प्रेरित हुए एक शिक्षणप्रेमी युवक ने विभाजन से विस्थापित हुए निर्वासितों का पुनर्वसन करने का कार्य करते समय एक ऐसी पाठशाला का सपना देखा, जो भारतीय संस्कृति को नंदनवन की तरह विकसित करेगी। जिस युवक ने यह सपना देखा था वे थे हशू अडवाणी- विवेकानंद एज्युकेशन सोसायटी के जनक। इस सोसायटी की स्थापना 1959 में हुई। हशू अडवाणी के जीवन का एक उत्कट सपना 1962 में साकार हुआ।

आज विवेकानंद एज्युकेशन सोसायटी का साम्राज्य 24 संस्थाओं में फैला है। अंगनवाड़ी से लेकर मैनेजमेंट कॉलेज तक का समावेश इसमें है। हर साल अठारह हजार से अधिक छात्र शिक्षा के माध्यम से विवेकानंद सोसायटी की ज्ञानज्योत प्रज्ज्वलित करते हैं। संस्थापक का अंत न होने वाला कार्य दिन-ब-दिन बढ़ता ही जा रहा है। 6 जनवरी 2003 को तत्कालीन प्रधान मंत्री मा. अटल बिहारी वाजपेयी ने हशू अडवाणी कॉम्प्लेक्स की नींव रखी और हशू अडवाणी का गौरव करते हुए कहा, ‘इस नि:स्वार्थी सामाजिक कार्यकर्ता ने समाज के लिए अपना सब कुछ न्योछावर किया है। नगरसेवक से मंत्री तक के पदों को गौरवान्वित किया, लेकिन अपने पद का उपयोग सरकारी व्यवस्था से लाभ उठाने के लिये कभी नहीं किया। उनका जीवन याने तात्विक मूल्यों का अप्रतिम उदाहरण है। उन्होंने कभी अपना विचार तक नहीं किया। अमरमल और अन्य सहयोगियों के सहयोग से शैक्षणिक संस्था स्थापन की, उसे पनपने दिया। यह संस्था आज महाराष्ट्र की गौरवशाली संस्था है।

वृक्ष लता बनी बरगद

विवेकानंद एज्युकेशन सोसायटी के विश्वस्त और सदस्य उच्च शिक्षित नहीं थे, और न हो उनके घरों में लक्ष्मी का निवास था। उनके कार्य का श्रीगणेश, एकदम छोटे स्तर से हुआ था। दस शिक्षा-प्रेमियों ने मिलकर 262 विद्यार्थियों की पाठशाला हाथ में लीे। आज इस वृक्ष लता का एक बरगद के रूप में विकास हुआ है। आज विवेकानंद सोसायटी की 24 संस्थाओं में से 6 संस्थाएं सामाजिक कार्य में व्यस्त हैं। बाल केंद्र में छोटे बच्चों की परवरिश की जाती है। विवेकानंद सिंधी केंद्र में और नारी शाला में स्त्रियों को सिलाई-बुनाई में कुशल बनाया जाता है। ‘वोकेशन गायडन्स ब्यूरो’ में विद्यार्थियों को अपने भविष्य के बारे में निर्णय लेने के लिए मार्गदर्शन किया जाता है। वैसे ये संस्थाएं अपनी-अपनी ओर से समाज कार्य के लिए विधायक कार्य करने में प्रयत्नशील हैं।

इस संस्था में प्रवेश मेरिट पर दिया जाता है। किसी भी तरह का दान अथवा कैपिटेशन फीस स्वीकार नहीं की जाती। संस्था का आर्थिक अथवा प्रबंधन का कार्य विश्वस्तों की ओर से देखा जाता है। इन सभी संस्थाओं ने असामान्य यश प्राप्त किया है। इसका सारा श्रेय सभी दृष्टि से ट्रस्टियों की कार्यक्षमता और किसी भी लक्ष्य को सार्थक करने की प्रवृत्ति को जाता है। विवेकानंद इंजीनियरिंग कॉलेज की गिनती महाराष्ट्र के उत्कृष्ट इंजीनियरिंग कॉलेज के रूप में होती है। अन्य क्षेत्रों की संस्थाओं की उड़ान भी अद्वितीय है। संस्था का बल तात्विक मूल्य, अनुशासन और लक्ष्य पर अधिक होता है। विद्यार्थियों को मूल्याधारित श्रेष्ठ दर्जा की शिक्षा देकर उनको कर्तृत्ववान बनाना इसी ध्येय से यह संस्था सतत कार्यरत है।

संस्कृति का जतन

1977 में यह संस्था आर्थिक संकट से गुजर रही थी। संस्था की गाड़ी चलाने के लिए ब्याज पर कर्ज लेना पड़ा। कर्ज और ब्याज के शिकंजे में जकड़ी संस्था को चलाना मुश्किल हो गया। ऐसी स्थिति में संस्था के सदस्यों ने संसार भर के शिक्षा प्रेमी, दानशूर, लक्ष्मीपुत्रों के सामने हाथ फैलाए। विवेकानंद एज्युकेशन सोसायटी का सच्चाई से, ईमानदारी से चलने वाला समाज कार्य देखकर इनलॅक फाउंडेशन, केवलराम चनराय फाउंडेशन संस्था, वटुमल फाउंडेशन और अन्य दानशूर सज्जनों ने अपने पैसों की थैलियों की धारा प्रवाहित कर दी। संस्था को नई शाखा तथा कॉलेज की स्थापना करने की प्रेरणा दी। संस्था के कार्यकर्ताओं ने सिंगापुर, हांगकांग, लागोस, इंग्लैंड, अमेरिका, स्पेन, इंडोनेशिया इन देशों में जाकर पैसा खड़ा किया। आज विवेकानंद एज्युकेशन ट्रस्ट स्वावलंबी बनकर शिक्षा का अत्यंत गुणकारी कार्य बड़ी लगन से कर रहा है।

ज्यादा से ज्यादा संस्था स्थापन कर सामाजिक कार्य अविरत शुरू रखने का ट्रस्ट का संकल्प है। भारतीय कला और संस्कृति का जतन करने के लिए कला के संकुल की रचना करना संस्था का उद्देश्य है। सिंधी संस्कृति का पाकिस्तान में विनाश हो रहा है। अफगानिस्तान में तालिबान के शासनकाल में भगवान बुद्ध के पुतलों को तहस-नहस करने मेें कुछ हद तक पाकिस्तान का ही हाथ है। सिंधी समाज का मूल मोहन-जो-दड़ो की संस्कृति उनको नष्ट करनी है। सिंधी संस्कृति का जतन करने के लिए सिंधी कल्चरल सेंटर का गठन कर ‘इंडस वैली सिविलायजेशन’ की स्मृति तरोताजा रखने का लक्ष्य सामने रखा है। ‘हशू अडवाणी कॉप्लेक्स’ का होस्टल और स्टाफ क्वार्टर्स की इमारत को खड़ा करने का कार्य दिसम्बर 2006 में भोजराज हसूमल चैरिटेबल ट्रस्ट और नरेनदास दयाराम अमरज्ञानी के दान से पूरा हुआ।

स्वामी विवेकानंद ने अपने ‘कर्मयोगी’ पुस्तक में ज्ञान, कर्तव्य, कर्म और स्वभाव इन विषयों का विस्तृत विश्लेषण किया है। विवेकानंद एज्युकेशन सोसायटी के ज्युनियर कॉलेज में विवेकानंद का सपना प्रत्यक्ष में लाने के लिए विद्यार्थियों को सभी क्षेत्रों में प्रोत्साहन देकर जीवन के श्रेष्ठ लक्ष्य प्राप्त करने के लिए शिक्षा की मूलभूत नींव पक्की की जाती है।

अत्युच्च ज्ञान

‘वेदांत’ शब्द का अर्थ है अत्युच्च (महान) ज्ञान। यह जगत्व्याप्त ज्ञान है। सबके लिए आवश्यक है। इसके लिए जाति, धर्म और सामाजिक स्थान आदि का बंधन नहीं है। इस संस्था में दी जानेवाली वेदांत की शिक्षा से छात्रों का प्रत्येक विषय की ओर देखने का दृष्टिकोण बदल गया है। इतना ही नहीं उनमें आत्मविश्वास भी निर्माण हो गया है। सर्व धर्म समभाव की बालघुट्टी अपने संकुल के सपूतों को देकर जगत की ओर खुली नजरोें से देखने की दृष्टि देना संस्था का उद्देश्य है।

1995 से कार्यरत कला और संस्कृति संस्था ने हर साल भक्ति-संगीत का कार्यक्रम आयोजित करने की परम्परा कायम रखी है। 12 जनवरी 2003 में ‘चैतन्य’ नामक कार्यक्रम में पद्मभूषण संगीतकार नौशाद अली मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थिति थे। उन्होंने विवेकानंद सोसायटी के कार्यक्रम का गौरव किया। आज विवेकानंद एज्युकेशन सोसायटी के हिंदी, अंग्रेजी माध्यम के प्राइमरी स्कूल, अंग्रेजी, हिंदी और मराठी माध्यम के हाईस्कूल ज्युनियर कॉलेज (हिंदी, अंग्रेजी माध्यम), डिग्री कॉलेज (आर्टस्, सायन्स, कॉमर्स), इंजीनियरिंग कॉलेज, पॉलिटेक्निक और पदव्युत्तर मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट, केटरिंग क्राफ्ट सेंटर, नारीशाला, वोकेशनल गायडन्स ब्यूरो, वेदांत अभ्यास, वेल्फेअर सेंटर और स्पोर्ट सेंटर ऐसे विविध प्रकल्प हैं।

तुलसी टेक्निकल इंस्टीट्यूट में इलेक्ट्रिक, वायरमैन, एअर कंडीशनिंग और रेफ्रिजरेशन, कंप्यूटर ऑपरेशन, कंप्यूटर प्रोग्रॅमिंग, कंप्यूटर एप्लिकेशन, एकाउंटिंग और ऑटोमोशन मीटर और आर्मेचर वाईडिंग ऐसे सर्टिफिकेट पाठ्यक्रम चलाए जाते हैं।

नया वी. एस. कॉलेज ऑफ कॉमर्स में अगस्त 2007 से फार्मेसी के पहले वर्ष का पाठ्येक्रम 60 विद्यार्थियों की कक्षा से शुरू हुआ। इस कॉलेज की स्थापना डॉ. लाना, श्रीमती झरना दास और आई.एच.एम. दुबई आदि के दान से हुआ। इंजीनियरिंग कॉलेज की नई इमारत जून 2008 में पूर्ण होने की संभावना है।

2007 में कॉलेज को मुंबई विश्वविद्यालय ने (अलर्लेीपींरपलू) च.ील. (अपरश्रूींळलरश्र उहशाळीीीूं) रपव च.ील (जीसरपळल उहशाळीीीूं) ऐसे तीन स्नातकोत्तर मान्यता पाठ्यक्रम चलाने की स्वीकृती दी है।

विश्व पर्यावरण के दिन एन. एन. एस. शाखा के विद्यार्थियों ने नई मुंबई के सानपाड़ा में जुलाई 2007 में 300 वृक्षों को लगाया। दत्तक ली गई कोकणनगर झोपड़पट्टी में 10 सितम्बर 2007 को पोलियो प्रतिबंधक टीका देने के लिए शिविर आयोजित किया गया। इस प्रकार विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ सामाजिक जिम्मेदारी के क्षेत्र में कार्य करने के लिए प्रवृत्त किया जाता है।

विवेकानंद एज्युकेशन सोसायटी शाला-कॉलेज के विद्यार्थियों ने विविध क्षेत्रों में यश प्राप्त कर आज भारत में ही नहीं तो विदेशों में उच्च पदों पर पहुंच कर इस संस्था का नाम उज्ज्वल किया है।

इस संस्था में हमेशा विद्यार्थी को केंद्र बिंदु माना जाता है। अत: उनका सर्वांगीण विकास, प्रगति हो, उनका संसार की ओर देखने का दृष्टिकोण आशावादी हो इसके लिए ऐसे कई उपक्रम चलाए जाते हैं।

‘कर्मण्ये वाधिका रस्ते मा फलेशु कदाच न’ इस गीता वचन का अनुसरण कर संस्था का वही ध्येयवाक्य स्वीकारते हुए संस्था ने यह पौधा सींचा है। उसे वृद्धिगत किया है, जो आज बरगद का रूप धारण कर रहा है जिसके छत्रछाया में भारतीय जीवन गतिमान हो रहा है।
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