पश्चिम बंगाल में बीजेपी हार कर भी जीत गयी!

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आ गये और तृणमूल कांग्रेस पर जनता ने फिर से विश्वास दिखाया है जिसके बाद अब ममता बनर्जी फिर से राज्य की सत्ता पर काबिज होंगी। सोशल मीडिया सहित सभी समाचार पत्रों में यह देखने को मिला कि बंगाल में बीजेपी हार गयी और दीदी ने फिर से हैट्रिक लगाते हुए सरकार बना रही है लेकिन अब इस पूरे मामले को जरा राजनीतिक नजरिये से देखते है। सबसे पहले हम पिछले विधानसभा चुनाव 2016 के आंकड़े की बात करते है। बंगाल विधानसभा में कुल 294 विधानसभा सीट है जिसमें से 148 पाने वाले का बहुमत साबित होता है। 2016 विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 3 सीट हासिल हुई थी इस लिहाज से आप समझ सकते है कि बंगाल की राजनीति में बीजेपी ने अभी एंट्री मारी है फिर ऐसे में एक ही बार में 148 के आंकड़े को छूना थोड़ा मुश्किल है लेकिन यह कहना भी गलत नहीं होगा कि इस बार बीजेपी ने अच्छा प्रयास किया और 3 सीट से सीधे 77 सीट पर पहुंच गयी।

राजनीति में एक बात सभी को पता है कि किसी भी राज्य को जीतने के लिए पहले वहां जड़े जमानी होती है और कार्यकर्ताओं की एक टीम खड़ी करनी होती है। राजनीति में बिना कार्यकर्ता की मेहनत के कोई भी विधायक या सांसद नहीं बन सकता है जबकि बीजेपी के पास बंगाल में कार्यकर्ताओं की ही कमी है क्योंकि बंगाल पर बहुत समय तक लेफ्ट ने कब्जा कर रखा था जिसे ममता बनर्जी तोड़ने में सफल रही लेकिन लेफ्ट और तृणमूल की विचारधारा में बहुत फर्क नही है इसलिए ममता बनर्जी को जल्दी सफलता मिल गयी जबकि बीजेपी की राष्ट्रवादी व हिन्दूवादी विचारधारा के लिए अभी भी बंगाल के लोग पूरी तरह से तैयार नहीं हो पाये है। शायद यही वजह है कि इस बार बीजेपी को पूर्ण सफलता नहीं मिल सकी है लेकिन बीजेपी का यह प्रयास जारी रहा तो वह दिन दूर नहीं होगा जब बंगाल में भी कमल खिल जायेगा।

बंगाल चुनाव जीतने के लिए कांग्रेस और लेफ्ट ने भी ममता बनर्जी को बधाई दी जबकि उनका एक भी सीट पर खाता ही नहीं खुला। अब आप यह सोचते होंगे कि जो खुद चुनाव में बुरी तरह से हार गया वह दुखी होने की जगह किसी को बधाई कैसे दे सकता है? तो जनाब यह राजनीति है यहां कुछ भी हो सकता है। कांग्रेस और लेफ्ट को खुद के हारने का दुख नहीं है बल्कि बीजेपी सत्ता में नहीं आ सकी इस बात की ज्यादा खुशी है। वह एक कहावत है ना कि “अपना पति भरे मर जाए लेकिन सौतन विधवा जरुर होनी चाहिए”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण और समाचार चैनलों में एक बात बार बार सुनने को मिलती रहती थी कि बंगाल में तृणमूल के गुंडे किसी को भी अपना शिकार आसानी से बना लेते है क्योंकि उन्हे राज्य की सरकार से समर्थन मिलता रहता है। अब सवाल यह खड़ा होता है कि क्या ममता की जीत के बाद यह कहर फिर से बंगाल की सड़कों पर देखने को मिलेगा? पिछले चुनाव की तुलना में इस बार बीजेपी और तृणमूल के बीच में टक्कर काफी तेज थी जिससे यह कहना भी गलत नहीं होगा कि अब बंगाल में फिर से बीजेपी कार्यकर्ताओं और नेताओं को निशाना बनाया जा सकता है। हम ऐसा इसलिए कह रहे है कि रविवार को चुनाव परिणाम की रात को ही बीजेपी के एक कार्यालय को आग के हवाले कर दिया गया। इसके साथ ही बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी की कार पर भी हमला हुआ है क्योंकि उन्होंने ममता बनर्जी को हराया है। बीजेपी कार्यकर्ताओं की दुकानों और घरों को भी नुकसान पहुंचाया गया है।

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