डाकघर की स्थापना और टिकट का इतिहास

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भारत में डाक सेवा करीब 171 साल पुरानी है और यह ब्रिटिश राज के समय से लगातार सेवा देती आ रही है। डाकघर की स्थापना 1 अप्रैल 1854 को हुई थी लेकिन उसकी सेवाएं 1 अक्टूबर 1854 से शुरू हुई। यह काल ब्रिटिश सरकार का था और उनके अंतर्गत पहले से ही…

लातूर भूकंप की 28वीं बरसी: जब सो रहे लोगों पर बरपा था कहर

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30 सितंबर 1993 की वह काली रात जिसने हजारों लोगों को काल के गाल में समा दिया। महाराष्ट्र के लातूर वासियों के लिए यह दिन किसी काले दिन से कम नहीं है जिसका दर्द वह आज भी दिलों में लिए घूम रहे है। 30 सितंबर 1993 को महाराष्ट्र के लातूर में…

प्राकृतिक आपदा में ‘समस्त महाजन’ के राहत कार्य

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समस्त महाजन पिछले दो दशक से विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रहा है। जैसे- जीव दया, पशु कल्याण, पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, मानव सेवा, गौ संरक्षण, ऑर्गेनिक खेती, संसाधन विकास, प्राकृतिक आपदा प्रबंधन एवं बचाव कार्य आज में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। संस्था के योगदान को देखते हुए उसे कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से नवाजा भी जा चुका है।

ऐतिहासिक रहा टोक्यो ओलंपिक

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नीरज चोपड़ा, मीराबाई चानू और पीवी सिंधु। ये ऐसे कई नाम हैं, जो टोक्यो की धरती पर चमके। ये वे खिलाड़ी हैं, जिन्होंने टोक्यो ओलंपिक 2020 में भारत की झोली में 7 मेडल डाले। इसके साथ भारत ने ओलंपिक इतिहास में टोक्यो में सबसे ज्यादा पदक जीतने का रिकॉर्ड बनाया। जो उपलब्धियां हासिल हुई हैं, वे इसकी पुष्टि करती हैं कि भारत के खिलाड़ी अब सिर्फ भागीदारी के लिए नहीं बल्कि जीतने की भावना के साथ खेलते हैं और यही भावना बदलते हुए भारत की नई तस्वीर है।

कोरोना की तीसरी लहर से पाई जा सकती है निजात

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अस्पतालों में चिकित्सक और स्वास्थ्य कर्मियों की कमी साफ देखी जा रही थी फिर भी प्रशासन इससे सबक लेने को तैयार नहीं है। तीसरी लहर के आने की संभावना जताई जा रही है मगर इसके बावजूद डीएम के आदेशों की अवहेलना की जा रही है। बार-बार आदेश देने के बावजूद ऑक्सीजन प्लांट नहीं बैठाया जा रहा है। इसपर पहल करते हुए समय से पहले ही व्यवस्था करने की जरूरत है, तभी कोरोना महामारी की तीसरी लहर से निजात पाई जा सकती है।

उत्तराखंड पर मिला-जुला परिणाम

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विश्व महामारी की चपेट में आते ही विश्व के ज्यादात्तर सम्भ्रान्त देशों ने कोविड-19 अर्थात कोरोना महामारी की जो दहशत देखी है, वह भले ही दूसरी लहर के अंतिम चरण में पहुंचने के बाद थोड़ी आरामदायक लगे लेकिन तीसरी लहर की सुगबुगाहट फिर देश के आंगन में सुनाई देने लगी है।

दान नहीं, बल्कि ‘दान का भाव’ है महत्वपूर्ण

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दान तभी सार्थक है, जब वह नि:स्वार्थ भाव से किया जाये। अगर दान देते समय दानदाता के मन में उसके बदले कुछ पाने की लालसा है, भले ही वह पुण्य की लालसा ही क्यूं न हो, तो वह दान नहीं व्यापार है। अगर वह अपनी इच्छा के विरूद्ध केवल लोकोपचार की वजह से दिया जाये,

कर्नाटक में कोरोना से बचाव के उपाय तेज

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कोरोना संक्रमित रोगियों को समय से समुचित उपचार मुहैया कराने के लिए सभी जिला एवं तालुका अस्पतालों में उच्च प्रवाह ऑक्सीजन सुविधा मुहैया कराई गई। तत्कालीन मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा की सरकार के प्रयास का ही असर रहा है कि यह राज्य देश के अन्य राज्यों के बीच आदर्श राज्य बनने में सफल रहा है। वास्तव में सरकार ने मेडिकल से जुड़े चिकित्सकों, विशेषज्ञों की एक समिति का गठन कर उसकी बताई गई सलाह को अक्षरशः लागू करना शुरू किया, जिससे सरकार को पहली लहर की महामारी में जनधन की हानि को कम करने में सफलता हासिल हुई।

कोरोना से निपटने में योगी का वैज्ञानिक दृष्टिकोण

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कोरोना संक्रमण की दूसरी अप्रत्याशित लहर आने के बावजूद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूरी हिम्मत और विवेक से प्रतिकूल परिस्थितियों में मुकाबला किया और प्रदेशवासियों के मनोबल को अपने वक्तव्यों से मजबूती देते रहे। योगी जी ने कहा कि आपदा की स्थिति में हमें अतिरिक्त संवेदनशील होने की जरूरत होती है।

देवभूमि हिमाचल-एक अनूठी पहल

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देवभूमि हिमाचल प्रदेश पर कदम रखते ही ये पंक्तियां जुबान पर आ जाती हैं- ‘ईश्वर की अनोखी संरचना’, ‘प्रकृति का अनूठा उपहार’- कितना मोहक कितना सुखद।

संकल्प शक्ति से चरैवेति-चरैवेति

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स्त्री परिवार रथ का एक पहिया नहीं है अपितु रथ की सारथी है। सारथी की कुशलता, दायित्वबोध तथा सुरक्षा, दक्षता और आत्मविश्वास के आधार पर ही ‘रथी’ अपने मार्ग पर आगे बढ़ सकता है, अपने कार्य में यशस्वी होता है। यह स्त्री विषयक दृष्टिकोण वं. मौसीजी ने समाज के सम्मुख रखा।

मधुमेह ने बढ़ाया काले कवक का खतरा

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आज जिसे म्यूकोसिस कहा जा रहा है वह वास्तव में बहुत पुराना रोग जाइगोमाइकोसिस ही है जो एक दुर्लभ कवक संक्रमण है। यह कवक हमारे परिवेश में मिट्टी, पत्तियों, सड़ी लकड़ी और सड़ी हुई खाद, किसी भी सीलन वाली जगह पर बड़े पैमाने पर होता है। म्यूकोंर्मासेट मोल्ड के कारण यह इंसान के जीवन पर घातक मार करता है। इसके चलते त्वचा का काला पड़ना, सूजन, लाली, अल्सर, बुखार के अलावा, यह ख़तरनाक बीमारी फेफड़ों, आंखों और यहां तक कि मस्तिष्क पर भी आक्रमण कर सकती है।

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