पाकिस्तान में कट्टरपंथियों ने की श्रीलंकाई नागरिक की हत्या

कुछ दिन पहले ही भारत में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने ईशनिंदा कानून की वकालत की थी और कहा था कि भारत में भी इसे लागू करना चाहिए। इसे लागू करने के लिए तर्क भी दिए गये थे हालांकि बाद में उसका मुस्लिम समुदाय की तरफ से भी विरोध किया गया और यह कहा गया कि यह कानून देश की शांति को भंग करेगा। दुनिया के तमाम मुस्लिम देशों में ईशनिंदा कानून लागू किया गया है लेकिन उसके परिणाम समाज के लिए सार्थक नहीं बताए जा रहे हैं।  
 
हाल ही एक मामला पाकिस्तान में देखने को मिला है जहां ईशनिंदा के आरोप में एक व्यक्ति की पीट पीट कर हत्या कर दी गयी। दरअसल पाकिस्तान के पंजाब में एक श्रीलंकाई व्यक्ति को ईशनिंदा के आरोप में पीट पीट कर मार डाला गया। श्रीलंका के निवासी रहे प्रियांथा कुमारा सियालकोट की एक फैक्ट्री में काम करते थे लेकिन शुक्रवार को भीड़ ने उन पर ईशनिंदा का आरोप लगाया और पीटना शुरु कर दिया जिसके बाद उनकी मौत हो गयी। घटना के बाद भीड़ ने उनके शव को भी जला दिया। इस घटना से जुड़े वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं जिसके बाद लोगों का गुस्सा और भड़क रहा है। 
पाकिस्तान में घटित इस घटना की पूरे विश्व में निंदा हो रही है इतना ही नहीं बल्कि खुद पाकिस्तान के लोग भी इसकी निंदा कर रहे हैं कि आखिर हम कहां जा रहे हैं? हम धर्म के नाम पर किसी के खून के प्यासे कैसे हो सकते है?  पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने इस घटना की निंदा करते हुए लिखा कि, ”श्रीलंका के एक मैनेजर को जिंदा जला दिया गया, यह पाकिस्तान के लिए शर्म की बात है, दोषियों को इसकी सजा जरूर दी जाएगी” पाकिस्तानी प्रधानमंत्री का यह बयान राजनीतिक तौर पर तो बहुत ठीक है लेकिन पाकिस्तान का भी इतिहास रहा है कि गुनहगारों को सजा नहीं मिलती है खासकर उन दोषियों को जो किसी और देश के नागरिक पर हमला करते हैं।   
 
पाकिस्तानी पत्रकार सैयद तलत हुसैन ने इस घटना की निंदा की और तमाम राजनीतिक दलों पर हमला बोलते हुए लिखा कि, ” इस घटना पर घड़ियाली आंसू बहाने वालों को शर्म आनी चाहिए, सरकार का विरोध करने के लिए भीड़ का सहारा लिया जाता है और अब यह भीड़ देश के हालात को बिगाड़ने पर तुली हुई है।
 

 

पाकिस्तान के संविधान में ईशनिंदा कानून को लागू किया गया है और अभी तक तमाम लोगों को ईशनिंदा कानून के तहत सजा भी दी गयी है जिसमें ज्यादातर लोग बाहरी देशों के होते हैं या फिर अल्पसंख्यक हिंदू होते है। अब अगर पाकिस्तान के हालात पर नजर डालें तो इस कानून के बाद भी वहां हालात बिगड़ते जा रहे हैं बल्कि यह कह सकते हैं कि इस कानून की वजह से वहां आंतरिक शांति भंग होती जा रही है। आज एक बार फिर से ईशनिंदा की वजह से एक व्यक्ति को अपनी जान गवानी पड़ी और पाकिस्तान को दुनिया के सामने जिल्लत का सामना करना पड़ा। 

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