अशराफ वर्ग क्यों करता है पसमांदा मुस्लिमों से भेदभाव ?

मुस्लिम समाज में जातिवाद, भेदभाव, शोषण, अत्याचार का अतिरेक, दलित पिछड़े और आदिवासी मुस्लिम समूह जिनके पूर्वज हिन्दू थे वो अजलाफ़ और अर्जाल (पसमांदा) मुस्लिम कहलाते हैं। इनमें निम्न जातियां सामिल हैं-

अंसारी (जुलाहे)

मंसूरी (धुनिया)

कुरैशी (कसाई)

सिद्दीक़ी (मनिहार)

सैफी (लोहार-बढ़ई)

राईन (कुंजड़े)

घोसी (ग्वाला)

सलमानी (हज्जाम)

इदरीसी (दर्जी)

हलालखोर (मेहतर)

हवारी (धोबी)

वनगुज्जर

इत्यादि,

इस्लाम स्वीकार करने के बावजूद अजलाफ़ और अर्जाल वर्ग अशराफ वर्ग (विदेशी मुसलमानों) से भेदभाव और शोषण का आज भी शिकार हैं जबकि देश में अशराफ वर्ग की कुल आबादी 10% से भी कम है। अशराफ वर्ग से भेदभाव झेल रहे पसमांदा मुस्लिम हिंदुओं से मुस्लिम बने हैं और देश की मुस्लिम आबादी का 90% हैं।

अशराफ और पसमांदा

मुस्लिम का अंतर जानकर आप हैरान हो सकते हैं कि देश में किस तरह पसमांदा को अशराफ द्वारा शोषण किया जाता है और इस भेदभाव और शोषण के खिलाफ कोई भी आवाज आज तक नही उठाई गई।

अशराफ मुस्लिम:

देश में जो अभिजात या कुलीन वर्ग का मुस्लिम है जैसे सैयद, शेख, मुगल, पठान जिनकी संख्या देश में कुल मुस्लिम आबादी की 5 से 10% है, और जो अपने आप को उन विदेशी मुस्लिम आक्रांताओं की औलाद मानते हैं जिन्होंने इस देश पर सैकड़ों साल राज किया है। इनमें वो मुस्लिम भी शामिल हैं जिनका धर्मांतरण हिंदुओं की ऊंची जातियों से हुआ है। अशराफ मुस्लिम अपने आपको Original मुसलमान मानते हैं। इनके बच्चे कान्वेंट स्कूलों में पढ़ते हैं न कि मदरसों में। अशराफ वर्ग आतंकवाद फैलाने के लिए पसमांदा मुस्लिमों का इश्तेमाल करते हैं। देश में मुसलमानों की शीर्ष संस्था मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड में 201 सदस्य हैं लेकिन सभी अशराफ वर्ग के हैं। इस शीर्ष संस्था में पसमांदा मुस्लिम का न तो कोई सदस्य है और न ही प्रतिनिधित्व।

पसमांदा मुस्लिम:

ये देश में मुसलमानों की कुल आबादी का 90% से ज्यादा हैं। पसमांदा मुस्लिम हिंदुओं से धर्मान्तरित मुसलमान हैं। ये देश के ST, SC, OBC से धर्मान्तरित किये गए स्वदेशी मुसलमान हैं। इनकी मस्जिद और कब्रगाह अशराफ वर्ग से अलग होती हैं। इनकी शादियों में अशराफ नहीं आते और न ही इन्हें अपनी शादी में बुलाते हैं। इनको आरक्षण का लाभ मिला हुआ है। इनको अशराफ वर्ग का मुसलमान नकली मुसलमान मानता है। पत्थरबाजी करने और आतंकवाद फैलाने के लिए अशराफ वर्ग पसमांदा मुस्लिमों का इश्तेमाल करते हैं। अशराफ वर्ग को वीर शहीद अब्दुल हमीद और पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम इसलिए अच्छे नहीं लगते क्योंकि वो पसमांदा मुसलमान थे।

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