राजनीतिक हथियार बनी पुलिस

आज दोपहर में जब पंजाब पुलिस तजिंदर बग्गा को लेकर पंजाब जा रही थी, तब पूरी टीम बड़ी खुश थी। आखिर इतने बड़े अपराधी को पकड़ने के लिए इतने हफ्तों से लगे हुए थे बेचारे, SIT बनी हुई थी आज इतने आराम से सारा काम हो गया था। अब जल्दी ही बग्गा को मोहाली कोर्ट में पेश कर देंगे और फिर अपना काम खत्म।

DCP साहब भी टीम के काम से खुश थे, और इतने बड़े ऑपरेशन को सफलतापूर्वक करने की एवज में भविष्य में प्रमोशन या पैसा मिलने की सम्भावना भी बन रही थी।

लेकिन तभी अचानक एक पेट्रोल पंप के पास हरियाणा पुलिस का काफिला आता है, पंजाब पुलिस की गाड़ियों को रोकता है, और उन्हें निकट के थानेसर थाने चलने को कहते हैं। सारा लावजमा केजरीवाल से प्रेरित हो कर U टर्न लेता है और वापस चल पड़ता है।

थानेसर थाने में बड़ी गरमा गर्म बहस होती है, हरियाणा पुलिस के अफसर कहते हैं कि दिल्ली पुलिस ने उन्हें संपर्क करके कहा है कि आप बग्गा को गैरकानूनी तरीके से गिरफ्तार करके ले जा रहे हैं। इस पूरे मामले में आपने CRPC का उल्लंघन किया है, वहीं सर्विस रूल्स भी तोड़े हैं, पंजाब पुलिस ने सारे आरोपों को नकार दिया।

इतने में ही जानकारी मिलती है कि दिल्ली पुलिस की एक स्पेशल टीम भी रवाना हो गयी है। इसी दौरान हरियाणा के गृहमंत्री अनिल विज का बयान आ जाता है कि बग्गा को दिल्ली पुलिस को ही सौंपा जाएगा। इसी बीच पंजाब से इस मामले के सारे कागज हरियाणा पुलिस को भेज दिए जाते हैं।

पंजाब पुलिस के अफसरों को समझ नहीं आ रहा था कि इस स्थिति से कैसे निबटा जाए इसी बीच थाने के बाहर ABVP और BJYM के सैंकड़ो कार्यकर्ताओं का जमघट लगा चुका था, जो नारेबाजी कर रहे थे। पंजाब सरकार, केजरीवाल और पंजाब पुलिस के खिलाफ नारेबाजी हो रही थी।

इतनी ही देर में दिल्ली पुलिस की स्पेशल टीम वहां पहुँचती है टीम आते ही सबसे पहले बग्गा को अपनी कस्टडी में लेती है फिर पंजाब पुलिस के दिए हुए कागजो को देखा जाता है। दिल्ली पुलिस के अधिकारी आपस में बात करते हैं, और फिर पंजाब पुलिस के DCP को कहते हैं आपको हमारे साथ चलना पड़ेगा श्रीमान।

ये सुनते ही पंजाब पुलिस की टीम सकते में आ गयी इसी बीच पंजाब सरकार की तरफ से उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर हुई, उसके अनुसार बग्गा को हरियाणा से कहीं और ना भेजने की प्रार्थना की गयी लेकिन न्यायालय ने ऐसा कोई आदेश देने से मना कर दिया।

अब पंजाब पुलिस के सामने कोई रास्ता नहीं था आगे आगे दिल्ली पुलिस का काफ़िला था, जिसमें बग्गा बैठे थे पीछे पीछे पंजाब पुलिस के DCP और कुछ और अफसर भी दिल्ली के लिए रवाना हो गए।

ये भारत के इतिहास में पहली बार ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई थी जहां एक प्रदेश की पुलिस बिना जानकारी के दूसरे प्रदेश से किसी को गिरफ्तार करती है, फिर तीसरे प्रदेश से गुजरते हुए वहां की पुलिस उन्हें रोक कर वापस दूसरे प्रदेश भेज देती है थोड़ी देर पहले बग्गा गिरफ्तार हो कर पंजाब जा रहे थे लेकिन अब वो घर जा रहे थे, वहीं पंजाब पुलिस के सीनियर अफसर अब दिल्ली पुलिस के साथ जनकपुरी थाने जा रहे थे।

जनकपुरी थाने में पंजाब पुलिस के DCP और अन्य अफसरों को कई घंटे बैठा कर पूछताछ की गयी उनके कागज़ देखे गए उन्हें सर्विस रूल्स और CRPC के उल्लंघन के बारे में बताया गया बग्गा के पिताजी द्वारा दायर की गयी अपहरण की FIR के बारे में, संलग्न धाराओं के बारे में बताया गया पंजाब पुलिस के अफसरों को काटो तो खून नहीं ये तो वो बात हुई, गए थे नमाज़ पढ़ने और रोजे गले पड़ गए।

केजरीवाल और उनके कुटिल सलाहकारो की वजह से एक कानूनी, कार्यविधिक, और प्रशासनिक विसंगति उत्पन्न हो गयी है और इस पर पंजाब पुलिस की स्थिति बड़ी खराब है अंततः उन्ही का सबसे ज्यादा नुक्सान होने जा रहा है।

वैसे कोई बड़ी बात नहीं है कि ये सब केजरीवाल का ही किया धरा हो, कोर्ट से पंजाब सरकार और पुलिस को थप्पड़ पड़ना ही है। पंजाब सरकार की बेइज्जती होनी है इस केस में, कहीं केजरीवाल इस ताक में तो नहीं बैठे है कि इस बहाने भगवंत मान को एक कमजोर प्रशासक बता दे और फिर पिछले रास्ते से खुद पंजाब के मुख्यमंत्री बन जाए।

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