नूपुर मामले में सुप्रीम कोर्ट को मिला तालिबान का समर्थन

-पिछले कई दिनों से सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ भारत के अंदर काफी रोष देखा जा रहा है । खासतौर पर सोशल मीडिया और ट्विटर पर सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ ट्रेंड चल रहे हैं लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट को एक बड़ी राहत मिलती हुई नजर आ रही है । सुप्रीम कोर्ट के लिए ये बेहद खुशी की बात है कि अफगानिस्तान के तालिबान ने सुप्रीम कोर्ट का समर्थन कर दिया है ।

-कई राज्यों में FIR, सिर कलम करने की धमकियां और बलात्कार की धमकियों को झेल रही नूपुर शर्मा जब सुप्रीम कोर्ट गई थी तब सुप्रीम कोर्ट ने कन्हैया लाल का सिर कलम किए जाने का जिम्मेदार भी नूपुर शर्मा को बताया था । अब तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों का पुरजोर समर्थन किया है ।

– तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों के समर्थन में ट्वीट करते हुए लिखा कि सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा को माफी मांगनी चाहिए । इसी बात को आगे बढ़ाते हुए जबीउल्लाह मुजाहिद ने लिखा कि नूपुर शर्मा को माफ नहीं किया जाना चाहिए बल्कि फांसी दी जानी चाहिए

-जबीउल्लाह मुजाहिद अफगानिस्तान का सूचना एवं संस्कृति मंत्री भी है । भारत में लगातार विरोध झेल रहे सुप्रीम कोर्ट को तालिबान के समर्थन से राहत मिली है ।

– जबीउल्लाह मुजाहिद ने अपने ट्वीट के साथ एक तस्वीर भी शेयर की। इसमें एक कट्टरपंथी जूते से नूपुर शर्मा की फोटो को कुचलते हुए दिख रहा है। तस्वीर पर लिखा है, “नूपुर शर्मा को गिरफ्तार करो।” साथ ही उस पर जूते के निशान बने हुए हैं और हथकड़ी का चित्र भी है।

– याद हो कि जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जेबी पारदीवाला की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा था, “नूपुर शर्मा के बयान भड़काने वाले थे। देश में जो कुछ हो रहा है, उसके लिए केवल यह महिला ही जिम्मेदार है। इसके लिए उन्हें देश से माफी माँगनी चाहिए।” हांलांकी उदयपुर में टेलर कन्हैया लाल तेली का गला मोहम्मद रियाज और गौस मोहम्मद ने काटा था और उसके बाद एक वीडियो बनाकर पूरी दुनिया के सामने इस जघन्य हत्या की जिम्मेदारी ली थी।

-हालांकी जो टिप्पणियां जज साहब ने की थीं उसको जज साहब ने खुद ही अपने ऑर्डर में नहीं लिखा । हम जैसे कम बुद्धि वाले लोग ये जानना चाहते हैं कि जज साहब ने अगर इतनी सटीक टिप्पणियां की थीं तो उसको ऑर्डर में लिखने में क्या हर्ज था ? समझ में नहीं आ रहा है कि क्या जज साहब ने अपने ही किए हुए सर्वेक्षण और टिप्पणी को इतना भी सम्मान नहीं दिया कि उसको ऑर्डर में लिख पाते ।

– खैर एक भारतीय नागरिक होने के नाते मेरे लिए ये बात संतोषजनक है कि कम से कम तालिबान की सरकार में तो सुप्रीम कोर्ट का काफी सम्मान हो रहा है बाकी कानून की देवी अंधी होती है और उसकी आंख तब खुल जाती है जब हिंदू कांवड़ यात्रा निकालता है, जहांगीरपुरी में बुलडोजर चलता है, आतंकी आधी रात को अदालत में गुहार लगाता है तब अदालत का दरवाजा भी आधी रात को खुल जाता है

 

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