‘ब्राह्मणों के नरसंहार’ पर हंसने लगे सुप्रीम कोर्ट के जज

देश की सुप्रीम कोर्ट के जजों की मानसिकता क्या है इसका पर्दाफाश एक बार फिर हुआ जब सुप्रीम कोर्ट के अंदर ब्राह्मणों के नरसंहार के जिक्र पर जस्टिस के एम जोसेफ हंसने लगे ।

दरअसल महाराष्ट्र में लव जिहाद के खिलाफ कुछ रैलियां हुईं थीं । इन रैलियों में जिहादियों के खिलाफ हुई नारेबाजी को हेट स्पीच बताया गया । इस याचिका पर सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की के एम जोसेफ और जस्टिस नागरत्ना की पीठ कर रही थी । जब महाराष्ट्र की रैलियों पर केंद्र के प्रतिनिधि सोलिसिटर जनरल तुषार मेहता से जवाब मांगा गया तो उन्होने कहा कि इस याचिका में कुछ और बातें भी शामिल होनी चाहिए ।

तुषार मेहता ने कहा कि DMK नेता आर राजीव ने साल 2022 में एक बयान दिया था कि तमिलनाडु के सारे तमिल ब्राह्मणों को मार देना चाहिए क्योंकि जब तक सारे ब्राह्मणों को मारा नहीं जाएगा तब तक देश के अंदर समानता नहीं होगी । हैरानी की बात ये है कि तुषार मेहता ने ब्राह्मणों के नरसंहार का जिक्र किया तो जस्टिस जोसेफ मुस्कराने लगे । इस पर सोलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि जज साहब ये हंसने की बात नहीं है । एक पूरे जाति को खत्म करने का अह्वान किया गया है । इस DMK नेता को माफ नहीं किया जा सकता है क्योंकि ये एक प्रसिद्ध व्यक्ति है ।

पेरियार ने भी 1973 में एक भड़काऊ भाषण दिया था और उस भाषण में ये कहा था कि तमिलनाडु के अंदर 3 प्रतिशत ब्राह्मण हैं अगर गैर ब्राह्मण दूसरी जाति के लोग मिलकर तमिल ब्राह्मणों को खत्म कर दें तो ठीक होगा । पेरियार ने आगे कहा कि अगर इस कत्लेआम और लड़ाई में दूसरी जाति के भी 3 प्रतिशत लोग मर जाएं तो भी दूसरी जाति के लोग तो बचे रहेंगे क्योंकि उनकी संख्या ज्यादा है लेकिन ब्राह्मण पूरी तरह खत्म हो जाएंगे

जिस तरह सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूढ़ के पिता सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रहे थे ठीक उसी तरह जस्टिस के एम जोसेफ के पिता भी न्यायापलिका में न्यायाधीश रहे थे । आप समझ सकते हैं कि न्यायापलिका के अंदर परिवारवाद किस तरह से फल फूल रहा है और क्यों ये जज कोलेजियम को बरकरार रखने की बात करते हैं शायद वो ये चाहते हैं कि उनके बेटे बेटियो का भविष्य न्यायपालिका में सेफ रखा जाए ।

जस्टिस के एम जोसेफ एक ऐसे जज हैं जो सरकार विरोधी रुख के लिए ही हमेशा चर्चा में रहते हैं । अभी हाल ही में चुनाव आयोग का मामला भी अभी चर्चा में रहा । जब जस्टिस जोसेफ ने एक नया नियम बना दिया कि अब चुनाव आयोग के मुखिया की नियुक्ति अकेले प्रधानमंत्री नहीं करेंगे बल्कि सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस, विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री की कमेटी मिलकर चुनाव आयोग के अध्यक्ष का चुनाव करेगी । साफ नजर आता है कि किस तरह कठपुतली के जैसे विपक्ष के इशारे पर कुछ जज नाच रहे हैं

एक इस्लामिक इतिहासकार हुआ जियाउद्दीन बरनी, उसने भी कहा था कि अगर भारत में इस्लाम का झंडा बुलंद करना है तो सबसे पहले भारत के सारे पंडितों को मारकर खत्म करना होगा दरअसल भारत में गजवा ए हिंद करने के लिए और भारत में इस्लामी सल्तनात लाने के लिए ब्राह्मणों का विनाश करना जिहादियों और कम्युनिस्टों का पहला लक्ष्य है ।

– दिलीप पांडे

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