एक प्रेम सज्ञानी, दूजा घमंडी अज्ञानी

अरविंद केजरीवाल का दिल्ली विधान सभा मे 17 अप्रैल को भाषण हुआ था। उन्होंने “एक था राजा…. कहकर शुरू किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कहानी बताई। “नरेंद्र मोदी चौथी पास हैं, वे बहुत घमंडी हैं, वे विरोध सहन नहीं कर पाते, इस महान देश के राजा को रानी नही है, गरीब परिवार मे उनका जन्म हुआ, बचपन में तो स्टेशन पर चाय बेचता था, अर्थशास्त्र की उसे बिल्कुल समझ नही है, नौकरशाह उसके सामने फाइल रखते हैं और वो उन पर हस्ताक्षर करता है, देश को चलाने की उसे समझ नही है, महंगाई आसमां छू रही है और जनता उसमे जल रही है”। अरविंद केजरीवाल भाषण दे रहे थे और उनके दल के सदस्य और मंत्री सुन रहे थे। वे केजरीवाल के भाषण की तालियां बजाकर प्रशंशा कर रहे थे।

मुझे संस्कृत सुभाषित याद आ गया

उष्ट्रणनां च गृहे लग्नम्  गदरभाः

स्तुति पाठका: ।

परस्परम् प्रशनसन्ति अहो रूपममहो ध्वनि:।।

जिसका अर्थ है, ऊँट के घर विवाह था और गधा उसकी प्रशंसा कर रहा था। वह कह रहा था, ऊँट का रूप कितना सुंदर है और ऊँट गधे से कह रहा था, गधे का स्वर कितना मधुर है।इस तरह एक दूसरे की स्तुति कर रहे थे। कहा जा सकता है, कि दिल्ली विधानसभा मे यह संस्कृत सुभाषित उसके अर्थ सहित अवतरित हो गया।

उसी समय मुझे भगवान गौतम बुद्ध की एक जातक कथा याद आ गई। बोधिसत्व पक्षी कुल का राजा था। उसने अपनी पुत्री के विवाह का सोचा। उसने अपनी पुत्री से कहा “मै सभी पक्षियों की सभा बुलाता हूँ, तुम स्वयम अपनी पसंद के पति का चुनाव कर लो”। इस तरह सभी पक्षियों की सभा बुलाई गई। राजकुमारी ने मोर का चुनाव किया। यह देखकर मोर को बहुत आनंद हुआ और वह अपने पंख ऊपर कर नाचने लगा। इससे उसका चूतड दिखने लगा। यह देखकर राजकुमारी ने शर्म से गर्दन झुका ली और बोली “ऐसा बेशरम पति मुझे नही चाहिए”।

दिल्ली विधानसभा में केजरीवाल का नँगा नाच देखकर, दिल्ली की जनता क्या निर्णय लेगी हम सब देखेंगे पर उसके लिए राह देखनी होगी। जनता की बुद्धिमानी पर विश्वास रखने में कोई हर्ज नहीं है।

इस केजरीवाल ने सारी मर्यादाएं धूल में मिलाकर देश के सबसे चहीते प्रधानमंत्री की, विधानसभा जैसी पवित्र जगह पर खिल्ली उड़ाई है।करोंडो भारतियो का उन्होंने अपमान किया है। हर एक ने उन्हें जूते मारे, फिर भी इसकी भरपाई नहीं होगी। उन्होंने नरेंद्र मोदी के माता पिता कर बारे मे तो कहा ही, उनकी पत्नी के बारे मे भी कहा। चौथी पास मुख्यमंत्री, चौथी पास राजा कहकर उनकी खिल्ली उड़ाई।

अरविंद केजरीवाल खड़गपुर आई. आई. टी. के मैकेनिकल इंजीनियर हैं। आई. आई.टी. पढ़ने वाले बहुतांश बच्चों को ऐसालगता है कि, वो समाज के सबसे बुद्धिमान् प्राणी हैं। वो महान और बाकी सब, चौथी पास। केजरीवाल राजनीति में आने से पहले नौकरशाह ही थे। इनकम टैक्स विभाग मे बड़ेअधिकारी थे। राजनीति के कीड़े ने उन्हें कब काटा, ये तो पता नहीं पर अन्ना हज़ारे के भृष्ट्राचार निर्मूलन आंदोलन में सहभागी होकर,और अन्ना के साथ रहकर भरपूर प्रसिद्धि पाई।

आम आदमी पार्टी की स्थापना की। अन्ना ने गांधी टोपी पहनी और स्वयं आप की टोपी पहनी। यह टोपी मतलब अन्ना का विश्वासघात। सत्ता की लालसा और दूसरों को तुच्छ समझने की मानसिकता। आप की टोपी के 3 रंग हैं। केजरीवाल आईआईटीयन है। वे समझते हैं, दुनिया का सारा ज्ञान मेरे पास है। अर्थशास्त्र का ज्ञान मेरे पास है। प्रशासकीय ज्ञान मेरे पास है। कानून का ज्ञान मेरे पास है। यह उनका घमंड है। यह घमंड इनको डुबाने वाला है। तब तक हम रुकते हैं।

प्रधानमंत्री से ज्यादा मै कितना महान हूँ। मै तो आईआईटीयन हूँ, और मोदी कुछ भी नहीं। उनका चेहरा, उनकी आँखें, उनके होंठ, होंठों की रचना और थोड़ा सा झुका हुआ नाक। इसका निरीक्षण करें तो, व्यक्ति के स्वभाव का अंदाज लगाया जा सकता है। अरविंद केजरीवाल अत्यंत धूर्त हैं। इस राजनेता की कोई भी राजनीतिक विचारधारा नहीं है। उनकी नीति एक ही है। जनता को सब कुछ मुफ्त में प्रदान करने का वचन देना। बिजली मुफ़्त, पानी मुफ़्त, अनाज मुफ़्त, सब कुछ मुफ़्त। मुफ़्त देने में उनके बाप का क्या जाता है। सब कुछ तो जनता का है। ऐसे ही सब मुफ़्त बांट कर ,मतदाताओ को मुर्ख बनाकर वे दो बार दिल्ली के मुख्यमंत्री बने हैं । उन्होंने दिल्ली का विकास किया मतलब क्या किया? मुफ़्त खाने वाली एक पीढी ही तैयार कर दी।

मुफ़्त खाने की वृत्ति असंख्य शारीरिक और मानसिक बीमारियों को जन्म देने वाली है। आलस, काम ना करने की इच्छा, काम टालने की प्रवृत्ति, ख़ाली समय  होने के कारण बुरी चीजों की लत, समाज घातक कार्य सब इस मुफ़्त मानसिकता से उत्पन्न होते हैं। केजरीवाल को सत्ता चाहिए । लोगों की आर्थिक, नैतिक, और  सामाजिक उन्नति से उन्हें कोई लेना देना नहीं है। बदनामी के उन पर सैकडों मुकदमें चले । इनमें से अधिकांश  मुकदमों में उन्होंने, शिकायत करनेवालों की, बिनाशर्त माफ़ी मांगी । उन्हें जेटली की माफ़ी मांगनी पड़ी। गडकरी की भी माफ़ी मांगनी पड़ी।

राहुल गाँधी को माफ़ीवीर चाहिए। उनके पड़ोस में मैगसेसे पुरस्कार प्राप्त माफ़ीवीर रहते हैं। गुजरात विश्वविद्यालय ने केजरीवाल को अदालत में बुलाया है। केजरीवाल का आरोप है कि, विश्वविद्यालय ने मोदी को झूठी पदवी दी है। मोर जैसे पंख फैलाकर नाचने की आदत जब हो जाती है तो, नाचनेवाला यह नहीं देखता कि पीछे क्या क्या खुला रह गया है। मोदी की पदवी की चर्चा देश नहीं करता। वैसे भी पदवी का कोई मतलब नहीं होता। कागज के एक तुकड़े के अलावा उसकी कोई कीमत नही होती।

रामकृष्ण परमहंस किसी पाठशाला में नहीं गये।मगर उन्होंने देश को विवेकानंद जैसा व्यक्ति दिया। शिवाजी महाराज के बालचरित्र में बाल शिवाजी पाठशाला जाते थे, ऐसा उल्लेख नही है। मगर शिवाजी महाराज ने स्वतंत्रता की प्रखर ऊर्जा निर्माण की। आई आई टी के इस केजरीवाल नामक उपाधि वीर ने मुफ़्त खोरों की फ़ौज तैयार की। क्या आई आई टी मैं ऐसा पढ़ाया जाता है क्या? ऐसा सवाल की पूछे तो, आईआईटीयंस को नाराज नही होना चाहिए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संघ शाखा की उपज हैं। यहाँ जो शिक्षा दी जाती है, वो किसी भी पाठशाला में नहीं मिलती। यह शाखा अपना देश कैसा है? अपने लोग कैसे हैं? अपनी संस्कृति क्या है? अपना देश पहले कैसा वैभवशाली था? अपना श्रेष्ठ तत्वज्ञान क्या है? हमारी भव्य परम्परा क्या है? उसे कैसे समृद्ध किया जाए? और उसके लिए मुझे क्या करना चाहिए ,यह सिखाती है। अनेकों आईआईटीयन् केजरीवाल भी, साथ आ गए तो भी इस ज्ञान की बराबरी नहीं कर सकते। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऐसे ज्ञानी हैं।

उनका ज्ञान यह देश मेरा है, मैं देश का हूँ और मुझे देश के लिए जीना है, इस एक ही वाक्य से प्रकट होता है। मेरा  ध्येय देश की गरीबी और अज्ञान दूर कर देश को सक्षम बनाना, उद्योगप्रवन करना , मेहनत करने की इच्छा निर्माण करना, और सामूहिक शक्ति से भारतमाता को विश्व गुरु के पद पर बिठाना है। प्रतिदिन वो इसके लिए काम करते हैं। शराब लाईसेंस घोटाला, कर और भ्रष्टाचार कर अपने ही, उपमुख्यमंत्री को कारावास भेजने वाले, केजरीवाल को यह समझना कठिन है।

पोथी पढ़ी पढ़ी जग मुआ, पंडित भया ना कोय।

ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय ।।

संत कबीर कहते हैं  “बड़ी बड़ी किताबें पढ़कर दुनिया के अनेक लोग कोई भी ज्ञान लिए बिना, श्मशान घाट पर पहुँच जाते हैं । इनमे से कोई भी विद्वान नहीं होता। परंतु ढाई अक्षर प्रेम का जान लेने से वो पंडित हुए बिना नही रहता “। कबीर कहना चाहते हैं कि ,जैसा मैं वैसे सारे यह भावना रखकर सबसे प्रेम करें। किसी के भी माता, पिता, पत्नी के बारे में ना कहें । उनकी शिक्षा की चर्चा ना करें। उनके गुणों की चर्चा करें। उसे पंडित कहें। जो इसके विपरीत व्यवहार करे, उसे अरविंद केजरीवाल कहें।

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