परिंदा भी पर न मार सके

अयोध्या में आगामी 22 जनवरी को राम मंदिर के कपाट खुलते ही भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ेगी। आधुनिक सुविधाओं से लैस रामनगरी में सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए है। सुरक्षा ऐसी की परिंदा भी पर नहीं मार सकेगा। एंटी ड्रोन तकनीक की भी व्यवस्था की गई है। मंदिर के आसपास के इलाके में किसी को मैपिंग करने की अनुमति नहीं है।

450 वर्षों के संघर्ष, लाखों हिंदू श्रद्धालुओं के बलिदान, लंबी कानूनी लड़ाई के पश्चात अयोध्या में निर्माणाधीन भव्य राम मंदिर विघ्न संतोषी आतंकियों की आंखों में खटक रहा है। चर्चा है कि पाकिस्तानी खूफिया एजेंसी आईएसआई और लश्कर जैसे कई आतंकी संगठन अयोध्या में हमले की फिराक में हैं। पिछले दिनों कुछ आतंकी और संदिग्ध लोग सुरक्षा एजेंसियों के हत्थे चढ़े भी हैं। ऐसे में, मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था में परिंदा भी पर न मार सके, डबल इंजन की सरकार ने यह ठान लिया है।

साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में श्रीराम मंदिर के पक्ष में फैसला सुनाया था। उसके बाद से अब तक अयोध्या और उसके आसपास के जिलों से 15 आतंकी और आईएसआई एजेंट पकड़े जा चुके हैं। अयोध्या में 22 जनवरी 2024 को रामलला के नूतन विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम से पहले कई आतंकी संगठन आतंकी हमले की प्लानिंग में हैं। इंटेलिजेंस एजेंसियों से मिले इनपुट और लश्कर से संपर्क में रहे दो आतंकियों की अक्तूबर 2023 में दिल्ली में गिरफ्तारी के बाद अयोध्या में सुरक्षा व्यवस्था को और चाकचौबंद कर दिया गया। आतंकवादी संगठन अल कायदा ने तो अपनी पत्रिका ‘गज़वा-ए-हिंद’ में धमकी दी है कि राम मंदिर को ध्वस्त कर दिया जाएगा और मूर्तियों की जगह पर बाबरी मस्जिद का पुनर्निर्माण किया जाएगा।

अयोध्यावासी 5 जुलाई 2005 का दिन भूले नहीं हैं, जब विराजमान रामलला के टेंट के अस्थाई मंदिर पर आतंकियों ने हमला किया था। परिसर के पास पहुंचते ही आतंकियों की मार्शल जीप में धमाका हुआ और परिसर की बैरीकेडिंग पूरी तरह से टूट गई थी। गोली चलने की आवाज के बीच 5 आतंकी परिसर के अंदर दाखिल हो गए थे। दो आतंकियों के निशाने पर रामलला का टेंट था, तो अन्य तीन का लक्ष्य बगल में स्थित सीता रसोई में प्रवेश करना था। सीता रसोई ऊंचाई पर स्थित एक बड़ा भवन था, जो अधिकाधिक क्षति पहुंचाने की रणनीति का हिस्सा था। हालांकि, सभी आतंकी मारे गए। पुलिस को पता चला था कि नेपाल से घुसकर अंबेडकरनगर जिला होते हुए ये आतंकी अयोध्या पहुंचे थे।

करीब दो दशक पूर्व प्रेशर कुकर बम के जरिए हनुमानगढ़ी को दहलाने का प्रयास हुआ था, तब भी हनुमान जी के प्रतीक बंदरों की ही वजह से यह बम बरामद हो सका था और आतंकी हमले की साजिश विफल हुई थी। 2019 में पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश-ए-मुहम्मद के सरगना मसूद अजहर का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें मसूद अपने साथी आतंकियों को अयोध्या में भीषण आतंकी हमला करने को उकसाता हुए देखा गया था। खूफिया एजेंसियों ने अयोध्या भूमि पूजन के दौरान संभावित आतंकी हमले के संबंध में पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के कई जासूसों को पकड़ा था।

राम जन्मभूमि मंदिर अति संवेदनशील जगहों में शामिल है। दूसरी ओर, आए दिन अयोध्या में पर्यटकों की संख्या बढ़ती जा रही है। अनुमान है कि मंदिर में प्रतिदिन एक लाख से अधिक श्रद्धालु आ सकते हैं और 2047 तक, सालाना 10 करोड़ से अधिक श्रद्धालु अयोध्या आ सकते हैं। ऐसे में, राम मंदिर की सुरक्षा के लिए वृहद कार्य योजना बनाई गई। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई में गृह मंत्री अमित शाह ने केंद्रीय एजेंसियों से समन्वय किया। वहीं, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जमीनी स्तर पर पुख्ता सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक विस्तृत योजना तैयार की। बताया जाता है कि सुरक्षा योजना के पहले चरण के लिए प्रदेश सरकार ने 40 करोड़ रुपए जारी किए हैं।

देश की विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के साथ सीआईएसएफ ने एक सुरक्षा योजना तैयार की है। इसमें आधुनिक सुरक्षा उपकरणों, तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का इस्तेमाल होगा।  सीआईएसएफ भारत की एकमात्र ऐसी संस्था है जो संवेदनशील स्थानों की सुरक्षा के लिए परामर्श देती है। सीआईएसफ को राम मंदिर सुरक्षा योजना के लिए परामर्श देने के लिए इसलिए भी चुना गया, क्योंकि इससे पहले सीआईएसएफ ने तिरुपति मंदिर, शिरडी साई बाबा मंदिर, गोरखनाथ मंदिर, महाकालेश्वर मंदिर, काशी विश्वनाथ मंदिर और महाबोधि मंदिर की सुरक्षा के लिए भी अपनी सेवाएं दी हैं।

सबसे पहले राम मंदिर पर खतरों का आकलन किया गया। फिर, उन स्थानों को चिन्हित किया गया, जहां खतरा है। अनहोनी की सूरत में उस वक्त राम मंदिर में कितने लोग मौजूद होंगे, इसके हिसाब से रिस्क का सटीक आकलन किया गया। इसके बाद भीड़ के हिसाब से ये डिजाइन किया गया कि मंदिर के किस हिस्से को कितना खतरा है, उस हिसाब से मल्टी लेयर सिक्योरिटी, उच्च क्षमता वाले सीसीटीवी कैमरे, अलग बॉम्ब डिस्पोजल स्क्वाड और डॉग स्क्वाड का सुझाव दिया गया। सुरक्षा योजना के सुझाव को तैयार करने में दो महीने का वक्त लगा। इस दौरान सीआईएसएफ और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच कई दौर की बैठकें हुईं।

राम मंदिर सुरक्षा प्लान के लिए सुझाव देते वक्त सीआईएसएफ ने इस बात का खास ध्यान रखा है कि परिसर की सुरक्षा अपने उच्चतम स्तर पर हो। मुख्य द्वार की सुरक्षा मानव रहित होगी। कंट्रोल रूम से ही गेट पर पूरी नजर रखी जाएगी। मुख्य द्वार पर बूम बैरियर लगा होगा। अंदर प्रवेश होने से पहले सेंसर से गाड़ी स्कैन हो जाएगी। यदि गाड़ी के अंदर कोई विस्फोटक या अन्य कोई हथियार होगा तो बैरियर नहीं खुलेगा। इसके बाद यदि व्यक्ति बैरियर तोड़कर जबरन गाड़ी को गेट के अंदर ले जाने की कोशिश करता है तो आगे जमीन के अंदर से तीन फीट ऊंची नुकीली दीवार बाहर निकल जाएगी। यह वाहन को वहीं पर रोक देगी।

सूत्रों का कहना है कि राम मंदिर तक पहुंचने के मार्ग भी सुरक्षा के हिसाब से तय किए गए है। एक स्पेशल मार्ग है, जहां पर तीन जगह चेकिंग होती हैं। ऐसा नहीं है कि कोई व्यक्ति किसी भी मार्ग से मुख्य मंदिर तक पहुंच सकता है। उसके लिए एक मार्ग निश्चित किया गया है। मंदिर में कुछ भी लाना वर्जित है। फायर सेफ्टी अटेंडेंस एडमिनिस्ट्रेशन जैसे पहलू भी पूरी तरीके से दुरुस्त हों, इस बात का ध्यान रखा गया है। ड्रोन हमले से राम मंदिर को बचाने को लिए यहां पहली बार एंटी ड्रोन तकनीक भी देखने को मिलेगी।

कुछ समय पहले ही एक व्यक्ति ने डार्क नेट का इस्तेमाल कर मंदिर को उड़ाने की धमकी दी थी। पुलिस की तत्परता से वह व्यक्ति पकड़ा गया। इसके बाद सोशल मीडिया पर भी सुरक्षा एजेंसियों की नजर है। डार्क नेट और इंटरनेट के जरिए अपराध को अंजाम देने वाले दूसरे तौर तरीकों पर भी नजर रखी जा रही है। मंदिर की सुरक्षा के लिए आसपास के इलाके में भी गहन जांच पड़ताल होती है। स्थानीय निवासियों के यहां कौन आ रहा है, ये सब बताना पड़ता है। किसी व्यक्ति के यहां कोई समारोह है तो बाकायदा उस पर इंटेलिजेंस इकाई की नजर रहती है। मंदिर के आसपास के इलाके में किसी को मैपिंग करने की अनुमति नहीं है।

आतंकी गतिविधियों से निपटने के लिए आजमगढ़ में कमांडो तैयार किये जा रहे हैं। इन्हें अत्याधुनिक हथियार चलाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे वह राम मंदिर की सुरक्षा कर सकें। बताया जाता है कि इन्हें स्पेशल सिक्योरिटी फोर्स में रखा जाएगा, इसके गठन के लिए पुलिस और पीएसी से 75-75 जवानों का चयन किया गया है।

मंदिर के पास बहने वाली सरयू नदी से उत्पन्न होने वाले संभावित खतरों पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इसके लिए मंदिर के पास नावों पर सुरक्षाकर्मी तैनात किये जाएंगे। रामजन्मभूमि परिसर की सुरक्षा के लिए उसके आसपास बहुमंजिला इमारतों के निर्माण पर रोक लगाने की तैयारी है। मंदिर परिसर को ‘नो-फ्लाइंग जोन’ घोषित करने की पूरी तैयारी हो चुकी है। इसके बाद ड्रोन, हवाई जहाज या चॉपर, कोई भी यहां से नहीं गुजर सकेगा। मंदिर के आसपास आठ मस्जिद हैं। वहां तैनात सुरक्षा बलों को यह ट्रेनिंग दी गई है कि हमले की स्थिति में किसकी क्या जिम्मेदारी रहेगी।

 

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