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बदलते भारत की मोदी-यात्रा

बदलते भारत की मोदी-यात्रा

सेवा से संकल्प तक: एक दशक से अधिक की वह यात्रा, जिसमें शासन का केंद्र समाज और राष्ट्र रहा ।

by हिंदी विवेक
in विशेष, सामाजिक
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17 सितंबर की तिथि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिवस मात्र नहीं है। यह उस राजनीतिक यात्रा को देखने का अवसर भी है, जिसने पिछले 12 वर्षों में भारत के शासन-विमर्श, विकास-दृष्टि और वैश्विक भूमिका को अनेक स्तरों पर प्रभावित किया है। 2014 में प्रारंभ हुई यह यात्रा अब उस पड़ाव पर है, जहाँ उपलब्धियों का उत्सव मनाने के साथ-साथ उनके दीर्घकालीन प्रभावों का मूल्यांकन भी आवश्यक है।
मोदी सरकार के 12 वर्षों को किसी एक योजना, एक निर्णय या एक राजनीतिक नारे से नहीं समझा जा सकता। इसका व्यापक स्वरूप जनकल्याण, जनभागीदारी, आत्मनिर्भरता, डिजिटल सशक्तीकरण, आधारभूत संरचना, सांस्कृतिक आत्मविश्वास और वैश्विक सक्रियता के सम्मिलित प्रयास के रूप में दिखाई देता है।

सबसे पहले शासन की उस शैली को देखना होगा, जिसने भारत के करोड़ों नागरिकों को औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ने का काम किया। जन-धन खाते, आधार और मोबाइल, इस JAM की त्रिमूर्ति ने कल्याणकारी योजनाओं के वितरण की संरचना को बदला। मार्च 2026 तक जन-धन खातों की संख्या 57.71 करोड़ और आधार की संख्या 144 करोड़ से अधिक हो चुकी थी। इसी डिजिटल आधार पर प्रत्यक्ष लाभ अंतरण और डिजिटल भुगतान का व्यापक विस्तार हुआ।

मार्च 2026 में अकेले UPI पर लगभग 2,264 करोड़ लेन-देन हुए, जिनका मूल्य ₹29.53 लाख करोड़ से अधिक था। आज भारतीय डिजिटल भुगतान प्रणाली देश की सीमाओं से बाहर भी पहुँच रही है।

UPI MDR Framework: How does it compare with card charges and credit-linked UPI? — NPCI clarifies

उज्ज्वला से स्वच्छ ईंधन, स्वच्छ भारत से शौचालय, जल जीवन मिशन से नल का जल, प्रधानमंत्री आवास से पक्का घर और आयुष्मान भारत से स्वास्थ्य सुरक्षा, इन योजनाओं ने करोड़ों परिवारों को लक्षित किया।

जब PM मोदी ने खुद थामा झाड़ू, स्वच्छ भारत अभियान ने बदली देश की तस्वीर । PM Modi govt 8 years pm narendra modi swachh bharat mission - India TV Hindi

सरकारी आकलनों के अनुसार 2014 के बाद शहरी कचरा प्रसंस्करण 16 प्रतिशत से बढ़कर 2026 में 82 प्रतिशत हुआ और डोर-टू-डोर कचरा संग्रह 43 प्रतिशत से बढ़कर 98 प्रतिशत हुआ।

राष्ट्र निर्माण कार्य को विचारवान नेतृत्व के साथ-साथ सड़क, रेल, बिजली, जल और संचार चाहिए। मोदी सरकार ने पूंजीगत व्यय को विकास की केंद्रीय धुरी बनाया। इस धुरी का परिणाम रहा कि केंद्र का पूंजीगत व्यय 2014-15 के लगभग ₹2 लाख करोड़ से बढ़कर 2026-27 में ₹12.2 लाख करोड़ हो गया।
रेलवे में विद्युतीकरण विकास का प्रमुख उदाहरण है। मार्च 2026 तक ब्रॉड गेज नेटवर्क का 99.6 प्रतिशत विद्युतीकरण हो चुका था। वंदे भारत जैसी रेल सेवाओं ने आधुनिक भारतीय रेल की नई आकांक्षा को प्रतीकात्मक रूप भी दिया है।

ऊर्जा के क्षेत्र में मार्च 2026 तक भारत की कुल स्थापित विद्युत क्षमता 532 GW से अधिक हो चुकी थी, जबकि नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 274.69 GW तक पहुँच गई। सौर ऊर्जा क्षमता 2014 के 2.82 GW से बढ़कर 150.26 GW हो गई है।
नरेंद्र मोदी जी की प्रथम अवधारणा रही है – ‘आत्मनिर्भर भारत’। इस ओर देखें तो हमें चित्र दिखता है कि भारत का रक्षा उत्पादन 2014-15 के ₹46,429 करोड़ से बढ़कर 2025-26 में ₹1.78 लाख करोड़ हो गया। रक्षा निर्यात ₹686 करोड़ से बढ़कर ₹38,424 करोड़ हो गया और भारतीय रक्षा उत्पाद 80 से अधिक देशों तक पहुँच रहे हैं। ‘सक्षम भारत’ का यह सर्वाधिक ज्वलंत उदाहरण है।

इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल निर्माण, सेमीकंडक्टर, स्टार्टअप और अंतरिक्ष क्षेत्र में भी इसी दृष्टि का विस्तार हुआ है। प्रधानमंत्री जी ने अगस्त 2026 में अपने संबोधन में पिछले बारह वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में लगभग सात गुना और मोबाइल फोन उत्पादन में 35 गुना वृद्धि का उल्लेख किया।
1 जुलाई 2017 को GST का लागू होना भारतीय कर-व्यवस्था के इतिहास का बड़ा परिवर्तन था। अनेक अप्रत्यक्ष करों को एक साझा ढाँचे में लाने का यह प्रयास आर्थिक एकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम था। GST की युक्तियुक्तकरण की यात्रा अभी जारी है।

मोदी काल को केवल आर्थिक और प्रशासनिक परिवर्तनों से समझना अधूरा होगा। इस काल में सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय प्रतीकों को सार्वजनिक विमर्श में नई प्रमुखता मिली। अयोध्या में श्रीराम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा, काशी विश्वनाथ धाम का पुनर्विकास, केदारनाथ सहित अनेक तीर्थस्थलों का विकास और भारत से बाहर गई पुरावस्तुओं की वापसी इसी व्यापक सांस्कृतिक विमर्श का हिस्सा है। यह सब औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति के विमर्श का मूर्तिरूप स्वरूप है। 7 रेसकोर्स से लोककल्याण का और राजपथ से कर्तव्य पथ का नामकरण एक बड़ा प्रतीक है।

2014 के बाद भारतीय विदेश नीति में सक्रियता और बहुपक्षीय मंचों पर भारत की भूमिका बढ़ी। 2023 की G20 अध्यक्षता इसका महत्वपूर्ण उदाहरण बनी। नई दिल्ली घोषणा पर सहमति और अफ्रीकी संघ को G20 का स्थायी सदस्य बनाए जाने की पहल ने भारत को ‘ग्लोबल साउथ’ के प्रश्नों को प्रमुखता से उठाने का अवसर दिया।

चंद्रयान-3 की सफलता ने भारत की वैज्ञानिक क्षमता को विश्व के सामने नए स्तर पर स्थापित किया। चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र के निकट सफल सॉफ्ट लैंडिंग ने भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए नया अध्याय खोला। अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी उद्यमों के लिए खोलने और स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के प्रयासों ने विज्ञान को नई आर्थिक संभावनाओं से जोड़ने की दिशा में भी कदम बढ़ाया है।

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किसी भी लोकतांत्रिक सरकार का मूल्यांकन केवल उसके समर्थकों के उत्साह या विरोधियों की आलोचना से नहीं हो सकता। रोजगार की गुणवत्ता, कृषि की आय, शिक्षा और स्वास्थ्य की गुणवत्ता, सामाजिक समरसता, शहरी जीवन, छोटे उद्यमों की चुनौतियाँ और आर्थिक असमानता जैसे प्रश्न अभी भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।

मोदी सरकार की 12 वर्ष की यात्रा को समझने का सबसे उचित तरीका न तो केवल प्रशस्ति है और न केवल आलोचना। यह उस परिवर्तन को पहचानने का प्रयास है, जिसमें राज्य की क्षमता, डिजिटल प्रौद्योगिकी, आधारभूत संरचना, सामाजिक सुरक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा और सांस्कृतिक आत्मविश्वास को एक व्यापक राष्ट्रीय परियोजना से जोड़ने का प्रयास हुआ है।

17 सितंबर को नरेंद्र मोदी का जन्मदिवस है। एक व्यक्ति का जन्मदिवस समय के साथ बीत जाता है, किंतु उसके नेतृत्व में लिए गए निर्णय संस्थाओं, नीतियों और सामाजिक मानस में दीर्घकालीन प्रभाव छोड़ सकते हैं।

मोदी सरकार के बारह वर्षों की सबसे बड़ी कथा शायद यही है कि भारत ने अपने बारे में बोलने की भाषा बदली है, याचक से सहभागी, आयातक से निर्माता, डिजिटल उपभोक्ता से डिजिटल शक्ति और वैश्विक व्यवस्था के दर्शक से सक्रिय भागीदार बनने की आकांक्षा तक।
यह यात्रा अभी पूर्ण नहीं हुई है। ‘विकसित भारत’ का संकल्प अभी लक्ष्य है, उपलब्धि नहीं। इसलिए आगामी वर्षों की चुनौती यही होगी कि योजनाओं और घोषणाओं की ऊर्जा को रोजगार, उत्पादकता, सामाजिक समरसता, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, वैज्ञानिक नवाचार और प्रत्येक नागरिक के जीवन की वास्तविक समृद्धि में रूपांतरित किया जाए।
जन्मदिवस पर सम्पूर्ण राष्ट्र की ओर से अभिनंदन, आद. प्रधानमंत्री श्रीयुत् नरेंद्र मोदी जी! आप शतजीवीं हों।

– डॉ. प्रवीण दाताराम गुगनानी

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