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उत्तर प्रदेश में भाजपा को मिले भारी जनादेश के बाद गठित योगी आदित्यनाथ की सरकार ने किसानों की कर्जमाफी से लेकर मनचलों पर अंकुश रखने और कानून-व्यवस्था की स्थिति सुधारने जैसे विभिन्न और त्वरित जनोपयोगी निर्णय करने शुरू कर दिए। पिछले १०-१५ वर्षों में क्षेत्रीय दलों के चक्कर में बीमारू बन चुके राज्य को पुनः पटरी पर लाने के लिए राज्य सरकार अथक कोशिश कर रही है। मुख्यमंत्री मा. योगी आदित्यनाथ से हिंदी विवेक की हुई विशेष बातचीत के महत्वपूर्ण अंश यहां प्रस्तुत है।

योगीजी, आपकी दृष्टि में ‘सुशासन’ की व्याख्या क्या है?

मेरी दृष्टि से सुशासन का सीधा अर्थ है, रामराज्य। इसका प्रत्यक्ष सम्बंध धर्म से नहीं है। इस शब्द का निहितार्थ बहुत व्यापक है। रामराज्य का अर्थ भेदभाव विहीन समाज का निर्माण करना है। भयमुक्त समाज, समरस समाज, स्वास्थ्य युक्त, सम्पन्न समाज, सुरक्षित समाज हो। शासक अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह शासक की भावना से नहीं बल्कि सेवक के भाव से करें। देश अथवा राज्य की जनता सर्वोपरि, यह भाव शासक में हो तो जनता में ‘रामराज्य’ का भाव निर्माण होता है। जिसमें सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक और आध्यात्मिक स्तर पर विकास की गति हो। जहंा दमन और भय की कोई बात न हो। यह ‘रामराज्य’ है और वही ‘सुशासन‘ है।

कानून एवं व्यवस्था पर पैनी नजर

* महिलाओं/ किशोरियों के मन में सुरक्षा का विश्वास जागृत करने हेतु ‘एन्टी रोमियो स्क्वॉड’ का गठन। ८,५५, ७१४ व्यक्तियों की जांच, ६५१ अभियोग पंजीकृत तथा १३६७ व्यक्तियों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई एवं ३,८४, ९२१ को चेतावनी।
* अवैध पशु वध रोकने हेतु प्रत्येक जनपद में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में १० सदस्यीय समिति गठित।
* महिला उत्पीड़न के पंजीकृत १६, १५२ अभियोगों में ११,९२२ अभियुक्त गिरफ्तार तथा १९२२ अभियुक्तों का आत्मसमर्पण।
* अनुसूचित जाति/जनजाति उत्पीड़न सम्बंधी अपराधों में ३,३२६ पंजीकृत अभियोगों में ४,६२० अभियुक्त गिरफ्तार तथा १,१४८ अभियुक्तों का आत्मसमर्पण।
* गैंगस्टर अधिनियम की धारा १४(१) के अन्तर्गत रु० ३५ करोड़ मूल्य की अवैध सम्पत्ति जब्त।
* गुण्डा अधिनियम के अंतर्गत ५,०६७ व्यक्तियों की चालानी रिपोर्ट, १,५ ९७ अभियुक्त निरुद्ध।
* प्रदेश में ३९२ ईनामी अपराधी गिरफ्तार।

आदित्यनाथ योगी एक हिंदू संन्यासी हैं। एक हिंदू संन्यासी के उत्तर प्रदेश राज्य का मुख्यमंत्री बनने पर राष्ट्रव्यापी बहस हुई। इस बहस में सकारात्मक और नकारात्मक दोनों भाव मौजूद थे। इसके पृष्ठभूमि में मुख्य कारण क्या है ?

मैं भारत के प्रधानमंत्री आदरणीय श्री नरेंद्र मोदी जी एवं भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह जी का आभारी हूं, जिन्होंने मुझ जैसे कार्यकर्ता को उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य का मुख्यमंत्री बनने का अवसर प्रदान किया। मेरी सरकार अपनी पार्टी तथा उत्तर प्रदेश की जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने का हर संभव प्रयास करेगी। वस्तुत: किसी संन्यासी का शासन के प्रमुख पद पर पहुंचना न तो पहली और न ही अनोखी बात है। हमारे आदरणीय प्रधानमंत्री जी भी एक संन्यासी ही हैं जो देश की जनता के कल्याण के लिए अहर्निश कार्यरत हैं।

उत्तर प्रदेश में हर दिन किसी बलात्कार, अपहरण एवं फिरौती की खबरें आती हैं। एक संन्यासी इस स्थिति में किस प्रकार बदलाव ला सकता है?

यह सही है कि कभी उत्तर प्रदेश कानून-व्यवस्था के मामले में देश का सबसे खराब राज्य माना जाता था। लेकिन १९ मार्च २०१७ के बाद इस स्थिति में काफी सुधार आया है। लोगों की धारणा कानून व्यवस्था को लेकर अब बदल रही है। राज्य की पुलिस इस दिशा में गंभीरता से काम कर रही है। राज्य सरकार ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी अपराधी को, चाहे वह अपराधी कितना भी बड़ा हो, किसी भी दल या किसी भी वर्ग का हो यदि वह अपराध करता है, तो उसे बख्शा नहीं जाएगा।

आपने सत्ताग्रहण के पहले चरण में ही राज्य भर के सभी यांत्रिक एवं अयंात्रिक बूचड़खाने बंद करवाए हैं। क्या आपके इस निर्णय से उत्तर प्रदेश बूचडखाने और गोमांस मुक्त राज्य बन सकेगा?

नॅशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के साथ मा. सर्वोच्य न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को अवैध बूचड़खानों के मुद्दे को लेकर निर्देश जारी किया था। हमारी सरकार द्वारा मा.न्यायालय द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों की सूचनाओं का सख्ती से पालन किया गया जो संपूर्ण समाज के व्यापक हित में है। इससे पर्यावरण एवं समाज के प्रति हमारी सरकार की प्रतिबद्धता स्पष्ट होती है। जहां तक गोमांस की बात है तो इस मामले में हमारी सरकार द्वारा किसी भी प्रकार की रियायत की कल्पना करना ठीक नहीं है।

प्रधानमंत्री मोदी जी का संकल्प है कि महिलाओं को उनका हक दिलाना सरकार की जिम्मेदारी है। मुस्लिम सहित सभी महिलाओं के सशक्तिकरण का प्रयास क्या उत्तर प्रदेश राज्य में संभव हो पाएगा?

हमारी सरकार केंद्र सरकार की तर्ज पर ‘सबका साथ, सबका विकास’ की भावना से कार्य कर रही है। महिलाएं चाहे किसी वर्ग एवं समुदाय की हों, सभी के विकास एवं कल्याण के लिए समान अवसर प्रदान करने की दिशा में ही हमारी सरकार काम कर रही है। सभी वर्ग की बालिकाओं को स्नातक स्तर तक की नि:शुल्क शिक्षा उपलब्ध करवाने के लिए ‘अहिल्याबाई शिक्षा योजना’ शुरू की जा रही है। महिलाओं में कुपोषण की समस्याओं को समाप्त करने के लिए ‘शबरी संकल्प अभियान’ शुरू किया गया है। इस प्रकार राज्य सरकार केंद्र सरकार की ही अपेक्षा के अनुसार प्रदेश की महिलाओं को सशक्त बनाने का कार्य कर रही है।

देश एवं राज्य को सफल बनाने के लिए सशक्त शासन की आवश्यकता होती है। उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी को सत्ता मिली है पर सशक्त शासन लाने हेतु कौन-कौन सी नीतियां आपकी सरकार तय कर रही है?

सशक्त शासन व्यवस्था केवल उत्तर प्रदेश राज्य में ही नहीं बल्कि संपूर्ण देश के लिए एक जरूरी बात है। मुझे खुशी है कि आदरणीय प्रधानमंत्री मा.श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में देश में एक सशक्त सरकार कार्य कर रही है। केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली को देखते हुए ही, उत्तर प्रदेश की जनता ने भारतीय जनता पार्टी को सरकार चलाने के लिए विशाल बहुमत देकर अपना समर्थन दिया है। हमारी सरकार सभी विभागों के माध्यम से सशक्त एवं जनकल्याणकारी नीतियों को लागू करके उत्तर प्रदेश को विकास के रास्ते पर अग्रसर रखने के लिए दृढ़ संकल्पित है।

उत्तर प्रदेश को ‘उत्तम प्रदेश’ बनाने के लिए अल्पावधि और दीर्घावधि विकास की कौन-कौन सी योजनाएं हैं?

करीब २२ करोड़ आबादी वाला देश का सबसे बड़ा राज्य है उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश को ‘उत्तम प्रदेश’ बनाने के लिए वर्तमान राज्य सरकार पूरी गंभीरता से काम कर रही है। क्योंकि उत्तर प्रदेश को एक विकसित राज्य बनाए बिना, देश का विकास संभव नहीं है। यह सरकार कानून व्यवस्था को ठीक करते हुए आधारभूत सुविधाओं के विकास एवं जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रभावी पूर्णता हेतु लगातार काम कर रही है।

आपने भेदभाव रहित समाज के लिए कौन से निर्णय लिए हैं?

जैसे कि मैंने आपको पहले ही बताया है कि यह सरकार बिना किसी भदेभाव के ‘सबका साथ, सबका विकास’ की भावना से कार्य कर रही है। हम सभी के लिए कार्य करने के लिए वचनबद्ध हैं। लेकिन तुष्टीकरण किसी का नहीं किया जाएगा; न किसी विशेष जाति वर्ग का अथवा न किसी धर्म का। विभिन्न विभागों के माध्यम से जो योजनाएं एवं परियोजनाएं चल रही हैं, उनके माध्यम से सभी को समान लाभ पहुंचाने की नीयत से कार्य किया जा रहा है। हमने वी.आई.पी. संस्कृति को समाप्त किया है। इमरजेंन्सी सेवाओं के वाहनों को छोड़कर सभी सरकारी वाहनों से लाल-नीली बत्ती हटा दी गई है। बिजली के मामले में भी हमने भेदभाव समाप्त किया है। पहले चंद महत्वपूर्ण जिलों को २४ घण्टे विद्युत आपूर्ति होती थी, लेकिन अब ऐसी भेदभाव पूर्ण व्यवस्था को समाप्त कर हमने इस वर्ष १४ अप्रैल को डॉ.आंबेडकर जयंती से ग्रामीण इलाकों को १८ घण्टे, तहसील एवं बुंदेलखंड क्षेत्र को २० घण्टे तथा सभी जिला मुख्यालयों को २४ घण्टे की विद्युृत आपूर्ति सुनिश्चित कर दी है।

रोशन होगा हर गांव
* प्रदेश में सभी परिवारों को माह अक्टूबर, २०१८ तक विद्युत सुलभ कराने के लिए भारत सरकार के साथ ‘पावर फॉर ऑल’ का समझौता दिनांक १४ अप्रैल, २०१७ को सम्पन्न।
* विद्युत आपूर्ति में आम और खास जिलों का भेदभाव समाप्त। सभी स्थानों पर एक जैसा विद्युत आपूर्ति शिड्यूल लागू। ग्रामीण क्षेत्रों में भी रात्रि में निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित।
* २८०६ करोड़ रुपये लागत के २३ बड़े विद्युत उपकेन्द्र ऊर्जीकृत किए गए। १०० दिन में ६,०६,३१९ पावर कनेक्शन दिए गए। ८००० अतिभारित ट्रांसफार्मरों की क्षमता वृद्धि सम्पन्न।
* पहली बार किसानों के निजी नलकूपों के क्षतिग्रस्त परिवर्तकों को लाने-ले जाने एवं ४८ घण्टों में प्रतिस्थापित करने हेतु विभागीय व्यवस्था।
* दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के अंतर्गत विद्युतीकरण का कार्य पूर्ण किया गया।

आपने सत्ता पर आते ही १०० दिनों में उत्तर प्रदेश में परिवर्तन लाने के लिए आवश्यक निर्णय लेने के जनता से वादे किए थे। आपकी सरकार इस कसौटी पर अब तक कितनी खरी उतरी है?

हालांकि अब हमारी सरकार को लगभग ४ महीने से अधिक समय हो गया है, लेकिन पहले १०० दिनों मे हमारी सरकार द्वारा जो महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं, उन निर्णयों का उल्लेख करते हैं, लोक कल्याण संकल्प पत्र में जनता से किए गए वायदों की पूर्णता करने के लिए राज्य सरकार ने अपनी मंत्री परिषद की प्रथम बैठक से ही जनता के हित में निर्णय लेना शुरू कर दिया था। इस क्रम में आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद प्रदेश के करीब ८६ लाख किसानों के एक लाख रुपये तक फसली ऋण माफ किए गए। इस निर्णय से ३६ हजार करोड़ रुपये का वित्तीय भार प्रदेश सरकार पर पड़ने के बावजूद कोई अतिरिक्त कर नहीं लगाया गया। इसी प्रकार एंटी भू माफिया टास्क फोर्स एवं एंटी रोमियो स्न्वाड का गठन, अवैद्य बूचड़खानों के विरुद्ध कार्रवाई तथा नई खनन नीति आदि कई ऐसे निर्णय हैं, जिन्हें हमारी सरकार ने अपने कार्यक्रम के पहले १०० दिनों में या तो लागू कर दिया या इनके लिए ठोस निर्णय ले लिए।

योगी जी आपने सत्ता ग्रहण करते ही एक के बाद एक त्वरित निर्णय किए जिनमें छेड़छाड़ या मनचलों पर रोक जैसी सामान्य लगने वाली बातें और गौमांस के अवैध कारोबार पर प्रतिबंध जैसे कठिन निर्णय भी शामिल हैं। इसकी पृष्ठभूमि में आपकी दृष्टि क्या है?

प्रदेश के विकास एवं यहां की जनता को बेहतर कानून-व्यवस्था उपलब्ध कराने तथा उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने के उद्देश्य से ही राज्य सरकार द्वारा ये त्वरित निर्णय लिए गए हैं।

नमामि गंगे

* नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत झूंसी, नैनी, फाफामऊ और वृंदावन की कुल ६०० करोड़ की योजनाएं भारत सरकार से स्वीकृत।
* प्रयाग अर्द्धकुंभ-२०१९ के आयोजन से पूर्व गंगा को स्वच्छ बनाने का काम युद्धस्तर पर जारी।
* गंगा की सहायक नदियों यमुना, गोमती, सरयू, राप्ती और गण्डक को भी निर्मल व स्वच्छ बनाने का संकल्प।
* गंगा किनारे के १६२७ गांवों में ४,४३,७१८ व्यक्तिगत शौचालयों का निर्माण।
* २ मई २०१७ को गंगा नदी के किनारे २५ जनपदों में एवं ५९५ ग्रामसभाओं में गंगा स्वच्छता संकल्प दिवस मनाया गया।

जनता की अपेक्षा उत्तर प्रदेश को सम्मान देने की है। इसीलिए विधान सभा चुनाव में जनता ने भव्य जनादेश भाजपा को दिया है। आपके शासन में वह कितना सार्थक होगा?

निश्चित रूप से हमारी सरकार प्रदेश की जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने के लिए दिन-रात काम कर रही है। मुझे विश्वास है कि जनता का दिया गया विशाल जनादेश, उत्तर प्रदेश के लिए हित में सार्थक सिद्ध होगा।

उत्तर प्रदेश गड्ढामुक्त और भष्ट्रचारमुक्त करने का आपका वादा है। इनके सफल क्रियान्वयन के लिए आपके सरकार की कौन सी योजना है?

यह सही बात है कि हमारी सरकार ने १५ जून २०१७ तक प्रदेश की सड़कों को गड्ढामुक्त करने की घोषणा की थी। सड़कें गड्ढामुक्त करने का हमारा प्रयास दिखावा कतई नहीं है। अब तक करीब पौने एक लाख कि.मी. से अधिक सड़कों को गड्ढामुक्त किया गया है। मा.उच्च न्यायालय द्वारा खनन पर प्रतिबंध लगाने के कारण उस समय पत्थर और बालू की अनुपलब्धता के कारण कार्य थोड़ा प्रभावित अवश्य हुआ है, लेकिन बरसात के बाद पुन: हमारी सरकार इस दिशा में तेजी से कार्य करेगी। सड़कों के रक्षण और गड्ढामुक्त करने के लिए इस वर्ष करीब ४ हजार करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। जहां तक भ्रष्टाचार की बात है तो इस मामले में हमारी सरकार की नीति जीरो टॉलरेंस की है। आपने अनुभव किया होगा कि सरकारी कार्य में पारदर्शिता लाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं,जो इसी दिशा में किया जा रहा प्रयास है।

उत्तर प्रदेश में सड़क, पानी, बिजली, स्वास्थ, रोजगार, शिक्षा और विकास के लिए आपकी सरकार की नीति क्या है?

खराब सड़कें एवं चारों तरफ अंधेरा उत्तर प्रदेश की नियति बन चुकी थी। हमारी सरकार सड़कों के चौड़ीकरण एवं गड्ढामुक्ति के लिए काम कर रही है। सभी खेतों को पानी पहुंचाना एवं प्रत्येक व्यक्ति को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। प्रत्येक घर को २४ घण्टे बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के लिए केंद्र सरकार के साथ २४x७ पॉवर फॉर ऑल के करार पर हस्ताक्षर किए गए हैं। हमारी सरकार अक्टूबर-२०१८ से सभी को २४ घण्टे बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए काम कर रही है। राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए बड़े पैमाने पर प्रयास किए जा रहे हैं। राजकीय अस्पतालों की स्थिति सुधारने, सस्ती जेनेरिक दवाओं की उपलब्धता के लिए प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों की स्थापना का निर्णय लिया गया है। १५० एडवांस लाइफ सपोर्ट एम्बुलेन्स सेवाएं शुरू की गई हैं। चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उनकी निवृत्ति आयु ६२ वर्ष करने का निर्णय किया गया है। इसके साथ ही, लगभग १०० राजकीय अस्पतालों में ई-हॉस्पिटल योजना लागू करने के लिए भी काम किया जा रहा है।
इसी प्रकार बड़े पैमाने पर प्रदेश के नौजवानों को रोजगार की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए नई औद्योगिक नीति लागू की गई है। केंद्र सरकार की मदद से बड़े पैमाने पर कौशल विकास का कार्य किया जा रहा है। इस वर्ष करीब १० लाख युवाओं को प्रशिक्षित कर रोजगार उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। प्रदेश सरकार राज्य के सभी १८ मण्डल मुख्यालयों में हेवी वेहिकल ड्रायविंग ट्रेनिंग स्कूल खोलने की दिशा में कार्य कर रही है। मुझे विश्वास है कि इससे बड़े पैमाने पर प्रदेश के नौजवानों को रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। इसी प्रकार प्रत्येक स्तर पर शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों के छात्र-छात्राओं को निःशुल्क पुस्तक, यूनीफॉर्म, जूता, मोजा एवं बैग तथा पुस्तक दी जा रही है। राज्य सरकार ने प्रदेश के छात्रों को गुणवत्तापरक शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए अगले सत्र से NCERT के कोर्स को लागू करने का निर्णय लिया है। साथ ही उच्च शिक्षा में सुधार के लिए भी कई कदम उठाए गए हैं। इसी प्रकार प्रदेश को बुनियादी सुविधाओं के मामले में विकसित राज्य बनाने के लिए कई परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है। इसके तहत सिंचाई परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। वहीं बुंदेलखंड जैसे क्षेत्र को सीधे दिल्ली से जोड़ने के लिए एक्सप्रेस-वे बनाने का प्रस्ताव केंद्र सरकार से किया गया है। गोरखपुर, आगरा, कानपुर में मेट्रो रेल परियोजना प्रस्थापित की गई हैं, जबकि लखनऊ मेट्रो रेल परियोजना में तेजी से काम किया जा रहा है।

कहा जाता है कि देश के प्रमुख शहरों का विकास इसलिए रुक गया है क्योंकि उत्तर प्रदेश से इन शहरों में तेजी से पलायन हो रहा है। इस संदर्भ में आपके क्या विचार हैं?

गत ७० सालों से उत्तर प्रदेश में राजनीति ही होती रही है। उसकी जगह विकास की बातें होतीं तो यह नौबत नहीं आती। जब प्रदेश के नौजवानों को राज्य में रोजगार के अवसर प्राप्त नहीं होंगे तो उनका देश के अन्य राज्यों में उनका पलायन स्वाभाविक है। इसलिए हमारी सरकार विकास परियोजनाओं के साथ-साथ कौशल विकास एवं निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए काम कर रही है, जिससे नौजवानों का पलायन रुकेगा। हमारी सरकार ने विभिन्न प्रदेशों की उद्योग नीति का गहराई से अध्ययन कर अपनी जरूरतों को दृष्टिगत रखते हुए औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति २०१७ को लागू करने का निर्णय लिया है। नई नीति को प्रभावी बनाने के लिए कई और कदम उठाए गए हैं। जिसमें विशेष निवेश बोर्ड व सिंगल विण्डो क्लियरेंेंस की स्थापना शामिल है। इसके साथ ही, बुंदेलखंड तथा पूर्वोत्तर प्रदेश में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए अलग से व्यवस्था भी नई उद्योग नीति में की गई है। इससे भविष्य में न केवल उत्तर भारतीयों का अन्य राज्यों के शहरों की ओर पलायन रुकेगा बल्कि अन्य राज्यों के युवाओं को उत्तर प्रदेश में आमंत्रण मिलेगा।

शहरों का विकास

* आयोध्या- फैजाबाद एवं वृंदावन-मथुरा को नगर निगम
का दर्जा दिया गया।
* झांसी, इलाहाबाद और अलीगढ़ को मिली स्मार्ट सिटी की सौगात।
* प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत कराए गए मांग सर्वेक्षण में प्राप्त ३१७७८८ आवेदन-पत्रों में से २२३८१६ आवेदन-पत्रों का वैलिडेशन सम्पन्न। १६३ नगरों में ई.ब्लू. एस. के ४४३३५ लाभार्थी; आधारित डी.पी.आर. भारत सरकार को प्रेषित, जिन पर भारत सरकार से स्वीकृति प्राप्त।
* ५७९ अतिरिक्त वार्डों में डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रहण का कार्य प्रारंभ। स्वच्छता की स्थिति में गुणात्मक सुधार।
* अयोध्या में सरयू नदी के जीर्ण-शीर्ण घाटों का पुनरोद्धार कराने का निर्णय लिया गया। सरयू नदी तट पर गंगा आरती की तर्ज पर प्रत्येक संध्या आरती की व्यवस्था करायी गई।
* मथुरा -वृन्दावन-ब्रज परिक्रमा क्षेत्र के सौन्दर्यीकरण एवं पर्यटन सुविधाओं के विकास की वृहद् कार्य योजना बनाई गई है।
* ६१ चयनित शहरों में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर कूड़ा पृथक्करण योजना का अलीगढ़ से शुभारंभ।

देश के अन्य राज्यों में किसानों का आक्रोश महसूस हो रहा है, उत्तर प्रदेश में किसान क्यों शांत हैं?

प्रधानमंत्री आदरणीय श्री नरेंद्र मोदी जी किसानों की कठिनाइयों को अच्छी तरह से समझते हैं। इसलिए वर्ष २०२० तक किसानों की आमदनी दो गुना करने के लिए उन्होंने कई फैसले किए। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना इसी दिशा में किया गया प्रयास है। जहां तक उत्तर प्रदेश की बात हैं, तो लोक कल्याण संकल्प पत्र के अनुरूप सबसे पहले किसानों की १ लाख रुपये तक कृषि ऋण माफ करने का निर्णय लिया गया। इसके साथ पहली बार आलू उत्पादक किसानों को राहत पहुंचाने के लिए फसल हस्तक्षेप योजना के तहत किसानों से करीब १ लाख क्विंटल आलू खरीद लिया गया। पहली बार गेंहू खरीद केंद्रों को प्रभावी बनाकर सीधे किसानों से गेहूं खरीद लिया गया। इसी प्रकार भारी मात्रा में गन्ना किसानों के मूल्य का भी भुगतान कराया गया। प्रदेश के किसान अब अनुभव करने लग गए है कि वर्तमान राज्य सरकार उनकी भलाई के लिए गंभीरता से कार्य कर रही है।

उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में भाजपा की जो सुनामी आई उसमें विपक्ष के नाम पर एक बड़ा खालीपन आया है। ऐसी स्थिति में उत्तर प्रदेश विधान सभा को संवाद का केंद्र कैसे बनाएंगे?

भारतीय जनता पार्टी की सरकार विधान सभा को संवाद का सार्थक मंच बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। वर्तमान सत्र के दौरान विधि मंडल के कार्यों को निपटाने के साथ -साथ वर्ष २०१७-१८ का बजट भी प्रस्तुत किया गया है। बजट पर सामान्य चर्चा के दौरान सदस्यों ने अपने विचार रखे थे। इसमें विपक्ष के २७ सदस्य भी शामिल थे। इसके अलावा भी सदन की कार्यवाही में सदस्यों द्वारा जनहित से जुड़े मुद्दे उठाए गए। उनमें विपक्ष के सदस्य भी सहभागी थे।

जातीय दंगा उत्तर प्रदेश की अब तक की नियति है। आपके सत्ता काल में भी सहारनपुर में जातीय संघर्ष की घटना घटी है। आए दिन होने वाली इन समस्याओं को खत्म करने के लिए कौन सी नीतियां अपनानी जरूरी हैं?

निश्चित रूप से कानून व्यवस्था बनाए रखने एवं विभिन्न समस्याओं के समाधान की कोई समय सीमा अथवा तिथि निश्चित नहीं की जा सकती। यह एक सतत प्रक्रिया है। जहां तक सहारनपुर की बात है तो यह घटना राज्य सरकार को बदनाम करने की नीयत से कुछ राजनैतिक दलों एवं अराजक तत्वों द्वारा रची गई थी। प्रदेश की नौकरशाही में पिछले १५ वर्षों में पनपी प्रवृत्ति के कारण सहारनपुर की घटना को और अधिक उछाला गया। मुझे विश्वास है कि प्रदेश की नौकरशाही राज्य सरकार की मंशा के अनुसार अब आगे कदाचित ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होने देगी।

अन्य राज्यों के विकास में पर्यटन उद्योग अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दा है पर ताजमहल और बनारस को छोड़कर पर्यटन की दृष्टि से कोई आकर्षण पर्यटकों के सामने नहीं होते। पर्यटन के माध्यम से उत्तर प्रदेश में देशी विदेशी निवेश कब बढ़ेगा?

यह सही है कि अभी तक देश एवं दुनिया के समक्ष ताजमहल को ही उत्तर प्रदेश की पहचान बताने की कोशिश की जाती रही है, जिसके कारण अधिकांश पर्यटकों के लिए ताजमहल ही उत्तर प्रदेश की पहचान हो चुका था। लेकिन अब वर्तमान सरकार प्रदेश की सांस्कृतिक, धार्मिक एवं प्राकृतिक विविधता एवं खूबसूरती को प्रोत्साहित करते हुए पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए गंभीरता से प्रयास कर रही है। इसलिए अयोध्या में रामायण सर्किट, वाराणसी मे बौद्ध सर्किट एवं मथुरा में कृष्ण सर्किट के माध्यम से विकास कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इसके साथ ही, दुनिया का सबसे विशाल धार्मिक आयोजन कुंभ को पर्यटन का महत्वपूर्ण कारक बनाने के लिए अर्ध कुंभ २०१९ के लिए युद्ध स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। सभी प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों को अच्छी सड़कों से जोड़ने, वहां २४ घण्टे विद्युत आपूतिर्र् की व्यवस्था एवं अन्य संसाधन विकसित करने के कार्य किए जा रहे हैं। इन स्थलों को हवाई मार्ग से जोड़ने एवं यहां अंतरराष्ट्रीय सुविधाएं भी उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। हमें देश एवं दुनिया को बताना होगा कि उत्तर प्रदेश की पहचान केवल ताजमहल नहीं बल्कि अयोध्या, मथुरा, काशी, प्रयाग आदि भी हैं, जिनसे उत्तर प्रदेश की ही नहीं बल्कि देश की पहचान जुड़ी है।

अयोध्या में राम जन्मभूमि का मसला फिर करवट ले रहा है। पर इस समय यह मुद्दा समाधान की राह पर है। आपका दृष्टिकोण किस प्रकार है?

5 मा. सुप्रीम कोर्ट की भावना थी कि दोनों पक्ष बैठकर अयोध्या विवाद का समाधान निकाले। जो समाधान का भाव सामने आया है उससे संतोष की भावना है। यदि दोनों पक्षों को लगता है कि इसमें सरकार को मदद करनी चाहिए, तो सरकार भी मदद के लिए तैयार है।

२०२२ में भारतीय स्वतंत्रता के ७५ वर्ष पूर्ण हो रहे हैं। क्या २०२२ तक उत्तर प्रदेश को ‘योगी मंत्र’ के द्वारा ‘उत्तम प्रदेश’ बनाएंगे?

उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने का प्रयास शुरू हो चुका है। हमारी सरकार, केंद्र सरकार के सहयोग से कई क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर विकास कार्य कर रही है। केंद्र सरकार की मदद से ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में लोगों को अपनी छत मुहैया कराने के लिए ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ के तहत कार्य किया जा रहा है। मुझे विश्वास है कि वर्ष २०२२ तक प्रदेश के सभी परिवारों को उनको अपना निजी घर अवश्य मिल जाएगा। इसी प्रकार सभी परिवारों को स्वच्छ पेयजल की सुविधा भी प्रदान की जा रही हैं। गांवों को पक्की सड़कों से जोड़ने की योजना तेजी से चल रही है। प्रदेश के जो गांव अभी तक विद्युत व्यवस्था से नहीं जुड़े थे, उन्हें जोड़ने के लिए युद्ध स्तर पर कार्य हो रहा है। प्रत्येक विभाग में पारदर्शी व्यवस्था लागू कर उनके कार्यक्रमों से जनता को लाभान्वित करने के लिए लगातार समीक्षाएं की जा रही हैं। भ्रष्टाचार के विरुद्ध सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि वर्ष २०२२ तक उत्तर प्रदेश देश के विकसित राज्यों में से एक राज्य होगा।

गोरखपुर के मेडिकल कॉलेज में ६५ से ज्यादा बच्चों की मौत हो गई है। इस दुर्घटना से सरकार की स्वास्थ्य विषयक धारणा पर प्रश्नचिह्न खड़ा हो रहा है। प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाते आप इस दुर्घटना को किस दृष्टि से देखते हैं?

गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कालेज में ५ दिन में ६५ बच्चों की मौत हुई है, इस घटना के कारण सारा देश आहत है, उत्तर प्रदेश सरकार भी आहत है। आज की तारीख में उत्तर प्रदेश सरकार आलोचना की शिकार हो रही है। इन मासूमों की मौत की जांच होनी बेहद जरूरी है ताकि सही तथ्य सामने आ जाए। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में जांच समिति बनाई गई है। जो मौत के कारणों का पता लगाएगी। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। राज्य की जनता के स्वास्थ्य और स्वच्छता कोे लेकर सरकार गंभीर है। उसकी नियमित समीक्षा मुख्य सचिव और जिला अधिकारी स्तर पर की जाती है। चिकित्सकों के १००० पदों को वॉक इन इंटरव्यू के माध्यम से भरे जाने का निर्णय किया गया है। ६० वर्ष पूर्ण कर चुके चिकित्सा अधिकारियों को, जिनका कार्य संतोषजनक नहीं है, उनकी स्क्रिनिंग करते हुए सेवानिवृत्त करने का निर्णय किया गया है।

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