बहन बेटियों की रक्षा का कवच बनना होगा

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आज फिर से जरूरत है उसी देश भक्ति और देश प्रेम की जिसमें आक्रोश था! गुस्सा था! गुलामी की जंजीरों को उखाड़ फेंकने का जज्बा था l हालांकि विद्रोह की आग तो 1857 से भड़कनी शुरू हो गई थी, और तमाम क्रांतिकारियों  ने आजादी के इस यज्ञ में अपने जीवन…

महिला सशक्तिकरण पर टिका देश का भविष्य

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जब हमारा देश आजाद हो चुका है, तो नारी आजाद क्यों नहीं है, ? यह सवाल मेरी अंतरात्मा को बहुत कचोटता है l मजदूर तबके से लेकर शिक्षित परिवारों तक की महिलाएं घरेलू हिंसा का शिकार होती रहती है ।नारी के बढ़ते हुए कदमों को पुरुषों की सत्ता स्वीकार नहीं कर…

कोरोना की गंभीरता को समझें

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हमें कोरोना के बाद की तक़ली़फें मंजूर है, लेकिन, सावधानी मंजूर नहीं है। 15 दिन क्वारेंटाईन में रहना....अस्पताल में अकेलेपन की घुटन...और कोरोना से ज़िंदगी और मौत की जंग लड़ना.... कभी कोरोना हारता है, कभी इंसान। एक को तो हारना ही पड़ता है। हमें सरकार पर निर्भरता छोड़नी होगी।

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