मैं एक मीसा बंदी

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“समाज का जाति अनुसार विचार करने वाले प्रगतिशील महानुभावों द्वारा संघ को मनुवादी कहते देखकर मेरे क्रोध की सीमा न रही। हिंदू समाज का अस्तित्व उन्हें स्वीकार नहीं था। परंतु जातीय अहंकार, जातीय भावना भड़काने से उन्हें कोई एतराज नहीं था। जातीय भावना भड़काकर समता पर आधारित समाज रचना करने का उपदेश करना यह उनके ढोंगीपन की सीमा थी।”

आपातकाल (26 जून १९७५) का आधुनिक संदर्भ

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वर्तमान पीढ़ी को चूंकि यह जानने का अधिकार है कि आपातकाल में आखिर क्या हुआ था, अतः इसे पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए। इससे जो बातें छनकर आएंगी, वे तत्कालीन प्रधान मंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी की स्वेच्छाचारिता, अतिमहत्वाकांक्षा तथा पदलोलुपता को तो प्रदर्शित करेंगी ही, कांग्रेस के शासन की करतूतें भी सामने आएंगी।

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