संस्कृत  साहित्य  परम्परा

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कुमाऊं और गढ़वाल में कई ऐसे साक्ष्य प्राप्त हुए हैं जिनसे यह स्पष्ट हो जाता है कि उत्तराखंड में संस्कृत साहित्य की परंपरा मौजूद थी। इन साक्ष्यों तथा ऐतिहासिक धरोहरों में से अधिकतर बहुत ही जीर्ण-क्षीर्ण स्थिति में हैं। इन धरोहरों का रखरखाव तथा संस्कृत का प्रचार-प्रसार इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि उत्तराखंड की द्वितीय राज्यभाषा भी संस्कृत है।

विश्व साक्षरता दिवस की शुरुआत कब और कैसे हुई?

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खुद के और दुनिया के विकास के लिए लोगों का पढ़ा लिखा होना बहुत जरुरी है क्योंकि अब देश सिर्फ किसान से नहीं चल सकता है बल्कि किसान के साथ साथ कलकारखानों की भी जरूरत हो चुकी है और कारखानों को सिर्फ वही लोग चला सकते हैं जो शिक्षित होंगे। कुल…

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