विकास मजबूरी – संतुलन जरूरी

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कुछ न होने वाला, डराओ मत, हमेशा नकारात्मक ही क्यों सोचते व बोलते हो, प्रकृति के पास अपार संसाधन हैं इसलिए उनके उपयोग पर रोक टोक न लगाओ आदि आदि। प्रकृति प्रेमी और पर्यावरणविद् अधिकांश: इसी तरह के जुमले सुनने के आदि होते हैं। जब प्राकृतिक आपदाएं आती हैं और…

प्रलय में नव निर्माण

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जून और जुलाई के बरसाती मौसम में प्रकृतिने फिर एक बार अपनी ताकत सभी को दिखा दी है। केदारनथ की दुर्दशा को हम सभी देख चुके हैं। एक-दो घण्टों में ही सब कुछ तबाह हो गया।

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