प्लास्टिक और ई-कचरे का संकट

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नई-नई खोजों के साथ हमने प्लास्टिक और ई-उपकरणों की शृंखला खड़ी कर दी है; लेकिन इनसे उत्पन्न होने वाले कचरे के संकट का समाधान नहीं खोजा। यदि सृष्टि को बचाना है तो हमें इसका जवाब खोजना ही होगा।

जुगाड़ अर्थात प्रगति

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आज तक हमने अनेक ‘इनोवेटर्स’ के बारे में जाना। वस्तुत: ‘इनोवेशन’ कहते किसे हैं यह भी जाना। अब हम ‘जुगाड़’ को एक अलग नजरिये से देखेंगे।

जुगाड़ – एक कलाविष्कार

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इस दुनिया में सब से बड़ा आविष्कार कौनसा यह पूछें तो ‘पहिये-चक्के’ से लेकर रॉकेट तक कितने सारे उत्तर हमें मिलते हैं। फिर भी वैश्विक स्तर के वरिष्ठ वैज्ञानिक, विशेषज्ञ, विचारवान आदि एक चीज को सब से अधिक पसंद करते हैं और वह है रबड़।

प्रलय में नव निर्माण

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जून और जुलाई के बरसाती मौसम में प्रकृतिने फिर एक बार अपनी ताकत सभी को दिखा दी है। केदारनथ की दुर्दशा को हम सभी देख चुके हैं। एक-दो घण्टों में ही सब कुछ तबाह हो गया।

पानी अर्थात जीवन

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बारिश! भगवान का सबसे बड़ा चमत्कार। जल ही जीवन है । इस धरती के प्रत्येक सजीव में 90 प्रतिशत पानी होता है। मछलियां पानी के बिना एक मिनट भी जिन्दा नहीं रह सकतीं। रेगिस्तान का जहाज कहा जाने वाला ऊंट भी भले ही दो हफ्ते पानी न पिये, परन्तु वह पानी का संचय जरूर करता है।

रद्दी में से टिकाऊ

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आदमी ने अभी तक बहुत सारे आविष्कार किये हैं। इन सभी आविष्कारों में से पिछली दो सदियों में हुए आविष्कारों ने मानव जीवन में बड़ा परिवर्तन किया है।

नया अंदाज, नयी दिशा

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नया अंदाज, नयी दिशा । राजस्थान ! भारत का सबसे गरम राज्य। लगभग 3,500 चौ. मी. क्षेत्र पर फैले राजस्थान की आबादी लगभग 7 करोड है। कभी राजाओं का स्थान रहा यह राज्य पिछले कई वर्षों से बढते तापमान का शिकार बन गया है। पानी की समस्या और बढते तापमान की चिंता के बीच फसा हुआ राजस्थान फिर भी डटकर खडा है और मुकाबला कर रहा है।

आने वाले कल की युवा शक्ति

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बच्चे देश का भविष्य होते हैं। बच्चे नटखट और शैतान भी होते हैं। बच्चों की इस शैतानियत और ऊर्जा का अगर कोई भी देश सही इस्तेमाल करेगा तो उसे अपनी उन्नति के लिए कल तक का इंतजार भी नहीं करना पड़ेगा।

नारीशक्ती भी है भारी

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आज अपने राष्ट्र में, जिसकी आधारभूत शक्तीदेवता और स्वतंत्रता की देवी भी महिला रूप है, उसके सामने ही महिलाओं पर अत्याचार हो रहे हैं। दूसरी बडी स्त्रीदेवता, न्यायदेवता भी महिला ही है पर अंधी है।

पर्यावरण और अविष्कार

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प्रकृति सबसे बड़ी निर्माता भी है और नवनिर्माता भी। निर्माण का यह खेल प्रत्येक क्षण खेला जाता है। इस दुनिया में अभी तक लाखों लोगों ने जन्म लिया है और हर सेकंड़ में लोग जन्म ले रहे हैं। परंतु कोई भी एक दूसरे जैसा नहीं है।

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