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राजनैतिक प्रचार अपने आप में अनोखा होता है | लोगों की चाल-ढाल, बात-व्यवहार, पहनावा सब बदल जाता है | यहाँ तक की धार्मिक प्राथमिकता भी बदल जाती है | गुजरात के विधान सभा चुनावों के समय राहुल गांधी जी जनेऊधारी हिन्दू बन गए थे | इसी राह पर प्रियंका वाड्रा भी निकल चलीं | उत्तर प्रदेश से चुनावी प्रचार की शुरुआत प्रयागराज के बड़े हनुमान मंदिर से की | किसी ने बताया कि उनकी दादी और भारत की भूतपूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न इंदिरा गांधी जी ने भी इसी मंदिर से चुनाव प्रचार की शुरुआत की थी कभी |
बस फिर क्या था, सारे कांग्रेसी लग पड़े प्रियंका जी को भारत रत्न इंदिरा गांधी जैसा साबित करने में |

ऑल इंडिया प्रोफेशनल्स कांग्रेस ने प्रियंका वाड्रा और भारत रत्न इंदिरा गांधी जी का फोटो एक साथ रखकर लिखा :
“होश उड़ गए शत्रु के, जो हमने ली अंगड़ाई है ; दुश्मन खेमा भयसूचक है, के, छोटी इंदिरा आयी है”
कांग्रेस ने प्रियंका वाड्रा को छोटी इंदिरा के रूप में प्रस्तुत करने का पूरा प्रयास किया | सोशल मीडिया पर प्रचारित किया जाने लगा कि प्रियंका वाड्रा जी की नाक भारत रत्न इंदिरा गांधी जी से मिलती है | इंदिरा जी से मेल खाते फ़ोटो ट्वीट किये गए | उन्हें साड़ी का पल्लू ठीक भारत रत्न इंदिरा जी के जैसे ही संभालना और ठीक करना सिखाया गया | प्रियंका जी ने ठीक समय पर मीडिया के सामने हूबहू भारत रत्न इंदिरा जी की तरह ही साड़ी का पल्लू संभाला भी | कांग्रेसियों की बांछे खिल गयी जब मीडिया ने इस ऐतिहासिक घटना को वैसे ही प्रस्तुत किया जैसा कांग्रसियों की कल्पना थी | कांग्रेस ने अपने परंपरागत चुनावी नारे को भी यथावत रखा “गरीबी हटाओ” | ये नारा भी प्रियंका वाड्रा जी को छोटी इंदिरा साबित करने में सहायक हो इसलिए चलाया गया | अब प्रियंका जी छोटी इंदिरा के रूप में स्थापित होने लगी |
लेकिन,
कांग्रेस का श्रीमती वाड्रा को छोटी इंदिरा या नयी इंदिरा के रूप में जनता के सामने प्रस्तुत करना कांग्रेस के चुनाव प्रचार की सबसे बड़ी मूर्खताओं में से एक है |
सभी राजनैतिक दल युवाओं को आकर्षित करने में लगे हैं | भाजपा, अपने जीवन में पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए “हमारा पहला वोट मोदी को”, इस प्रकार का अभियान चला रही है | कांग्रेस भी अपने 48 वर्ष के राष्ट्रीय अध्यक्ष को युवा नेता के रूप में प्रस्तुत करती है | राहुल जी के युवाओं के साथ संवाद के कार्यक्रम भी कांग्रेस कर रही है |

फिर प्रियंका वाड्रा जी को 1975 में भारत पर आपातकाल थोपने वाली नेत्री से समानता को क्यों प्रचारित किया होगा ? यह यक्ष प्रश्न है |

चुनाव आयोग के मार्च 2019 तक के डेटा के अनुसार
8.5 करोड़ मतदाता पहली बार मतदान करनेवाले हैं | इनमें से 1.5 करोड़ मतदाता 18-19 वर्ष के हैं |

अर्थात, वर्ष 1999 से 2001 के बीच जन्मे लोग इस साल पहली बार वोट करेंगे | ये वो लोग हैं जिनका जन्म इंदिरा जी की मृत्यु के लगभग 14 से 16 वर्षों के बाद हुआ था | इन्हें यदि इंदिरा जी के बारे में कुछ जानते हैं तो वो है:
– भारत रत्न इंदिरा गांधी देश की प्रधानमंत्री थी,
– भारत रत्न इंदिरा गांधी, प्रियंका वाड्रा और राहुल गांधी की दादी थी,
– उन्होंने स्वयं को भारत रत्न दिया था,
– 1975 में अपनी तानाशाही प्रकृति का परिचय देते हुए भारत में आपातकाल लगाया था |
– उन्होंने बांग्लादेश के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी |

ये सब भी इसलिए जानते हैं कि इनकी चर्चा होती रही है |
कांग्रेस 2019 का चुनाव 1964-65 की मानसिकता से लड़ना चाहती है | गांधी-नेहरू परिवार की चार पीढियां बदल गयी लेकिन गरीबी हटाओ का नारा नहीं बदला | हालात ऐसे आ गए कि कांग्रेस को 72000 रुपये सीधे गरीबों के बैंक खातों में डालने का वादा करना पड़ा |

कांग्रेस की महासचिव और पूर्वी उत्तरप्रदेश की प्रभारी प्रियंका वाड्रा जी के लिए यह चुनाव नाक का सवाल बन गया है |

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