ममता बनर्जी के लिए दूर है दिल्ली

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इसी साल के पूर्वार्द्ध में संपन्न पश्चिम बंगाल विधानसभा सभा के चुनावों में तृणमूल कांग्रेस की शानदार विजय के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के अंदर यह महत्वाकांक्षा जाग उठी है कि अगर वे देश के विपक्षी दलों को एकजुट करने में सफल हो जाएं तो उनके लिए  पश्चिम बंगाल से…

इस तस्वीर के मायने 

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एक मुख्यमंत्री अपने प्रधानमंत्री के साथ टहलते हुए बातचीत करे और उसकी तस्वीर देशव्यापी सघन बहस का मुद्दा बन जाए इसकी आसानी से कल्पना नहीं की जा सकती थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी का टहलते हुए बात करने का वीडियो शायद पिछले कुछ समय में राजनीति का…

देश के दो प्रधानमंत्री के अहम की कहानी

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नरेंद्र दामोदर दास मोदी देश के 15वें प्रधानमंत्री हैं जबकि इंदिरा गांधी देश की 4 चौथी प्रधानमंत्री थी। इन दोनों ही लोगों में एक समानता यह थी इन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान बड़े और साहसी फैसले लिए थे। हालांकि दोनों लोगों के कार्यकाल में यह फर्क हैं कि जब इंदिरा गांधी…

जनता ने किसे बताया उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री ?

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उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले है जिसे लेकर सभी पार्टियों ने अपनी अपनी कमर कस ली है। सभी नेता अपने कार्यों और बयानों के माध्यम से जनता को लुभाने की कोशिश में लगे हुए हैं लेकिन इस बीच सवाल यह है कि आखिर जनता किसे अपना…

हिमालय क्षेत्र में प्रकृति संरक्षण एवं आपदा प्रबंधन

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पहाड़ी क्षेत्रों में बादल का फटना एवं भूस्खलन एक साधारण घटना है, लेकिन केदारनाथ क्षेत्र में इतनी बड़ी आपदा पहली बार हुई है। इसी तरह से बादल का फटना, भूस्खलन, नदी की धारा बाधित होना, अल्पकालिक झील का निर्माण, झील का ध्वस्त होना एवं त्वरित बाढ़ का आना एवं अवसाद के अपवहित होने की घटना पर गंगोत्री हिमनदीय क्षेत्र में शोध अध्ययन किए गए हैं।

अनुदान बहुत हुआ अब श्रमदान करें

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महाराष्ट्र के वर्तमान मा. राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी उत्तराखंड के पूर्व मुख्य मंत्री भी रह चुके हैं। उत्तराखंड के गठन से उनकी सक्रीय राजनीति में अहम भूमिका रही है। उन्होंने उत्तराखंड के विकास के लिए कई योजनाएं बनाईं थीं। अब 21 वर्षों के उपरांत प्रदेश की प्रगति के संदर्भ में उन्होंने हिंदी विवेक से विशेष बातचीत की। प्रस्तुत हैं उसके कुछ प्रमुख अंश-

सरकार की जन कल्याणकारी योजनाएं

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बदलते परिवेश में राजनीतिक शुचिता व नैतिकता को नये सिरे से गढ़ा जा रहा है। जन कल्याणकारी योजनाओं की प्रमाणिकता व विश्वसनीयता अपेक्षाकृत बढ़ी हैं। घोटाले व भ्रष्टाचार जैसे शब्दों की पुनरावृत्ति पर अंकुश लगा है, जिससे आम लोगो ने राहत की सांस ली है। परिणामत: दुनियाभर के देशों में भारत की साख बढ़ी है।

राज्य में राजनैतिक अस्थिरता

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इसे छोटे राज्य का दुर्भाग्य कहें या राजनीतिक लिप्सा का एक अंग कि अब तक नारायण दत्त तिवारी को छोड़कर कोई भी मुख्य मंत्री अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाया है। 2022 में उत्तराखंड में चुनाव होने हैं। जनता को जिस दल का कार्यकाल अच्छा लगेगा उसे जनता चुनेगी।

राजनीतिक सामाजिक हालातों की चिंताजनक कहानी

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राज्य गठन के बाद उत्तराखंड को अटल सरकार ने दस साल के लिए औद्योगिक पैकेज दिया था। इसके तहत राज्य के मैदानी इलाकों में इंडस्ट्री तो आयी लेकिन पैकेज सब्सिडी अवधि खत्म होने के बाद उत्पादन ठप्प कर दिया। नतीजतन स्थानीय युवकों को रोजगार के संकट से गुजरना पड़ा और भू माफियाओं की दखलंदाजी बढ़ने से कृषि योग्य भूमि भी घटती चली गई।

२१ साल ११ मुख्यमंत्री

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नारायण दत्त तिवारी के मुख्य मंत्री काल में जब तत्कालीन प्रधान मंत्री वाजपेयी नैनीताल आए तो उनसे मुख्य मंत्री ने राज्य के विकास के लिए मदद मांगी। बावजूद इसके कि राज्य सरकार कांग्रेस की थी, वाजपेयी ने बड़े हृदय का परिचय दिया और उत्तराखंड को विशेष राज्य का दर्जा और आर्थिक पैकेज प्रदान करने की घोषणा की।

त्वरित समाधान की मिसाल – नितिन गडकरी

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महामारी के दौरान महाराष्ट्र के करीब 22 जिलों पर ध्यान रखने की जिम्मेदारी नितिन गडकरी को दी गई थी जो उन्होंने बखूबी निभाई। एक दौर तो ऐसा आया कि उन्होंने संपूर्ण महाराष्ट्र राज्य के साथ-साथ देश के अन्य राज्यों को भी मदद की। नितिन गडकरी ने छोटी-छोटी ऐसी कई चीजें, कई काम कोरोना के दौरान किए जिनकी गिनती नहीं की जा सकती। वे खुद भी ऐसे कामों की गिनती नहीं करना चाहते क्योंकि वे मानते हैं कि लोकप्रतिनिधि के लिए ये सब स्वाभाविक है।

हिंदुत्व, विकास और जातिगत समीकरणों के सहारे भाजपा की रणनीति

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उत्तर प्रदेश में आगामी 2022 में होने वाले विधनसभा चुनावों के लिए सभी दलों ने अपने अपने तरकश के तीरों को बाहर निकालना शुरू कर दिया है। जिसमें सपा, बसपा, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी सहित प्रदेश की राजनीति में उगे हुए  बहुत सारे छोटे -छोटे दलों भी अपनी भागीदारी व…

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