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दो दिन पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का काशी में एक भव्य रोड शो हुआ | इस रोड शो में लगभग ६ लाख से भी अधिक लोग शामिल हुए. इस रोड शो की कई  तस्वीरे आज पूरे सोशल मीडिया पर व्हायरल हुई हैं, और जहां तक नजर जाती है केवल लोग ही लोग दिखाई पड़ते हैं | यह तस्वीरें देख कर मानो लगता है कि जनता ने इस रोड शो के माध्यम से चुनाव के पहले ही नतीजों के संकेत दे दिये हैं ? जिस प्रकार सोशल मीडिया पर इस रोड शो की तस्वीरों के नीचे कमेंट्स आ रहे हैं, उससे यह ज्ञात होता है कि केवल काशी की जनता ही नहीं बल्कि  देश की जनता भी फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम आदि के माध्यम से कुछ संकेत दे रही है | देश में बदलाव अवश्य चाहिये, जो विकास हुआ है, उससे अधिक चाहिये. लेकिन क्या बदलाव का अर्थ केवल देश की सत्ता जिसके हाथ में हो वह पार्टी बदलना है ?
वाराणसी के दृश्यों में एक बात जो कई टी.व्ही. चॅनलों ने दिखाई, प्रधानमंत्री जी का सामान्य आदमी के साथ का “कनेक्ट” अर्थात, इस रोड शो में आये सामान्य व्यक्तियों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बर्ताव बहुत ही भावनात्मक रहा | जब काशी के मुस्लिम बंधु प्रधानमंत्री का स्वागत कर रहे थे, तब उसी समुदाय का एक व्यक्ति प्रधानमंत्री के लिए एक शॉल लिये खड़ा था, लेकिन वह उन तक पहुंच नहीं पा रहा था, प्रधानमंत्री मोदी जी ने इशारा कर उसे अपनी ओर शॉल फेंकने के लिये कहा | उनके इस व्यवहार ने एक ओर सभी का दिल जीत लिया, दूसरी ओर जनता का इतना भव्य समर्थन देख कर इस कारण विरोधी नेताओं की परेशानी में वृद्धि तो नहीं हुई यह प्रश्न उपस्थित होता है | प्रधानमंत्री के इस रोड शो के बाद काशी से प्रियंका गांधी वाड्रा चुनाव नहीं लड़ेगी, ऐसा निर्णय लिया गया | उसका कारण बुरी तरह से हारने का डर तो नहीं ? साथ ही ६ लाख लोगों का उपस्थित होना, एक बड़ा  शक्ति प्रदर्शन यह सब एक बड़े पैमाने पर प्रभाव डालने वाली बात है | ऐसे में जो आत्मविश्वास शायद विरोधी नेताओं में बना होगा वह भी अब डगमगाया सा दिखता है, हालांकि इसे कोई मानेगा नहीं, लेकिन जो दिख रहा है उस पर से तो यही मत बनाया जा सकता है |

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अक्षय कुमार का साक्षात्कार भी दो दिन पूर्व प्रदर्शित हुआ | और इस साक्षात्कार में प्रधानमंत्री जी को आम पसंद है या नहीं, वे चाय कितने बजे पीते हैं, जुकाम होता है तब वे क्या करते हैं ? जैसे एकदम ही सामान्य प्रश्न पूछे गये | यह साक्षात्कार भी इंटरनेट पर चर्चा का विषय बना और उसका कारण था, सरल साधारण और राजनीति से परे पूछे गये प्रश्न और उनका उतनी ही ईमानदारी और सरलता से दिया गया जवाब | एक ही समय में ये दो घटनायें होने के कारण जनता का प्रधानमंत्री जी के प्रति आकर्षण और भी बढ़ा है | इसका सीधा असर चुनाव के नतीजों पर हो सकता है |

अब प्रश्न ये उठता है कि विरोधी नेताओं द्वारा इसका प्रतिउत्तर देने की कोई तैयारी है या नहीं ?  क्या राहुल गांधी के केरल में निकाले गये रोड शो की तुलना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काशी में निकाले गये रोड शो से की जा सकती है ? और यदि की भी गयी तो सोशल मीडिया पर जो जनता का मत दिख रहा है, वह क्या बयां करता है ?  केरल में राहुल गांधी के रोड शो में उपस्थित हरे ध्वजों पर भी सोशल मीडिया पर काफी सवाल उपस्थित किये गये, केरल के वायनाड में निकाले रोड शो में काँग्रेस के ध्वज से अधिक ध्वज मुस्लिम लीग के थे | उल्टा काशी हिंदु बहुल क्षेत्र होने पर भी मुस्लिम बंधुओं ने भी प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत किया | तो यह चित्र परिस्थिती को काफी स्पष्ट करता है |

खैर जनता का फैसला तो २३ मई को ही सामने आयेगा लेकिन तब तक सामान्य व्यक्ति पर, नेटीझन्स पर और विरोधी नेताओं पर एक बड़ा प्रभाव स्थापित करने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कामयाब हुए हैं, यह कहना गलत नहीं होगा |

– निहारिका पोल सर्वटे

 

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विगत 6 वर्षों से देश में हो रहे आमूलाग्र और सशक्त परिवर्तनों के साक्षी होने का भाग्य हमें प्राप्त हुआ है। भ्रष्ट प्रशासन, दुर्लक्षित जनता और असुरक्षित राष्ट्र के रूप में निर्मित देश की प्रतिमा को सिर्फ 6 सालों में एक सामर्थ्यशाली राष्ट्र के रूप में प्रस्तुत करने में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की अभूतपूर्ण भूमिका रही है।

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