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मा नव ईश्वर का सब से बड़ा नर्माण है। मानव ही ऐसा है जो बहुत सारी चीज़ों का निर्माण करता है। इन चीज़ों को खुद की भलाई के लिए इस्तेमाल करता है। परंतु मानव को इन वस्तुओं के निर्माण में सिर्फ अपना ही फायदा देखने की आदत है, फिर चाहे उस निर्माण में या उपयोग के बाद, प्रकृति की कितनी भी बड़ी हानि क्यों न हो !

इस नव निर्माण की धारा में, नव निर्माण की स्पर्धा में, मानव ने पिछले सौ सालों में ऐसी तमाम वस्तुओं का निर्माण किया है, कि इनको बनाते हुए ही प्रकृति की अपरिमित हानि पहले ही हो चुकी है। उन्हीं से एक तथा सब से ज्यादा निर्मित तथा इस्तेमाल होने वाली खतरनाक वस्तु है – प्लास्टिक।

प्लास्टिक एक ऐसा पदार्थ है जिसके निर्माण में कई ऐसे रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है जो अपनी धरती को, पर्यावरण को धीरे – धीरे नष्ट कर रहे हैं। हम इस प्लास्टिक के निर्माण को तो आज रोक नहीं सकते हैं पर हम अपने आप इस प्लास्टिक के पुनर्प्रयोग का विचार तो जरूर कर सकते हैं। इससे हम इस प्लास्टिक के कचरे से होने वाले नुकसान को थोड़ा सा कम करने की कोशिश तो ज़रूर कर सकते हैं ना।

आज हर घर में प्लास्टिक कई रूपों में, मार्ग से आ रहा है। उसमें भी अगल – बगल में सब से ज्यादा दिखने वाला और नुकसान करने वाला प्लास्टिक आता है पानी की या कोल्ड ड्रिंक्स की बोतल से। इन प्लास्टिक बोतलों को हम घर पर ही अलग तरीके से पुनर्प्रयोग कर सकते हैं। इन्हें अच्छी तरह से अलग – अलग तरीके से काट कर, बहुत सारी वस्तुएं घर पर ही बना सकते हैं।

किचन में इस्तेमाल होने वाली कई चीज़ें जैसे चम्मच, चाकू, छूरी, कैची को रखने के लिए इन काटे हुए बोतलों का इस्तेमाल कर सकते हैं, साथ ही स्टेशनरी जैसे कि क़लम, पेन, पेन्सिल, पट्टी जैसी चीजों के लिए भी ये काटे हुए बोतल प्रयोग कर सकते हैं।

इन प्लास्टिक के बोतलों से लोगों ने काफी सारी चीजें बनाई हैं। ख़ास कर पौधों के लिए इनका बेहतरीन इस्तेमाल किया गया है। घर में, आंगन में, दीवारों पर छोटे – छोटे पेड़ पौधे लगाने में और उन्हें सुरक्षा देने में इन बोतलों का अच्छा उपयोग किया जा सकता है।

इन बोतलों से पेड़ों को सुरक्षा भी मिल सकती है और हम अपने घरों में भी प्रकृति का आनंद ले सकते हैं। कई लोगों ने तो इनका बहुत ही अलग तरीके से इस्तेमाल किया है। किसी ने पानी में तैरने वाली नाव बनाई है तो कुछ ने रहेने के लिए मकान तक बनाया है।

ऐसी ही दूसरी वस्तु है सीडी। हम सभी अपने घरों में सीडी का इस्तेमाल करते थे। किंतु अब इन सीडीज का जमाना लद चुका है। इन सीडीज का लोगों ने बिल्कुल अलग तरीके से प्रयोग किया है। इनसे काफी वस्तुएं बनाई जा सकती हैं।

आजकल कंप्यूटर का जमाना है। आज कंप्यूटर से जुड़ी हुई कई सारी चीजें उपयोग के बाद नष्ट करने में तकलीफ का सामना करना पड़ता है। इनको ई – वेस्ट के नाम से जाना जाता है। इन ई – वेस्ट में खास कर दो चीजों होती हैं। एक है धातु और दूसरा है प्लास्टिक तथा रबर। इन ई – वेस्ट में से निकलने वाले धातु का तो पुनर्प्रयोग अच्छी तरीके से हो सकता है। इन धातुओं में लोहा, तांबा, एल्युमिनियम के साथ – साथ सोना भी प्राप्त होता है। किंतु इन धातुओं के साथ जो प्लास्टिक और रबर मिलता है उनका पुर्नप्रयोग बहुत ही क़ठिन होता है। यह एक बहुत बड़ी चुनौती दुनिया के सामने है। आज सिर्फ १२ प्रतिशत ई – वेस्ट का पुनर्प्रयोग हो पा रहा है। इससे सात गुना ज्यादा ई – वेस्ट सिर्फ पड़ा रहता है और अपनी इस धरती का काफी ज्यादा नुकसान इसी से हो रहा है। आज इस ई – वेस्ट का वजन लगभग ४५ अरब किलो के आसपास है। इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि आज कितने बड़े पैमाने पर इस ई वेस्ट का निर्माण हो रहा है। इसके दायरे में आज हम पूरी तरह फंस चुके हैं। इसमें सब से बड़ा हिस्सा है टेलीविजन और कंप्यूटर, प्रिंटर, कैमरा, पेनड्राइव, मोबाईल फ़ोन का। इनके साथ ही कई सारे मेडिकल इन्स्ट्रूमेंट्स, टेलीकम्युनिकेशन साधनों, विद्युत साधनों का भी काफी बड़ा हिस्सा है।

इन ई – वेस्ट के रीसाइकलिंग के समय काफी ख़तरनाक गैस का निर्माण होता है। इनसे कई सारी बीमारियां भी फैलती हैं। साथ ही इन सब चीजों से सिर्फ़ मनुष्य को ही नहीं, अपितु सारी सजीव सृष्टि की अपरिमित हानि हो रही है।

अतः हम सभी का यह कर्तव्य है कि अपनी सृष्टि को इस संहार से बचाएं। इसीलिए हमें इन चीजों का सदुपयोग करते हुए उनके पुनर्प्रयोग को भी बढ़ावा देना चाहिए।

मोबा . ९८६७९०००५५

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