अभियान में जन भागीदारी आवश्यक

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हम समस्याएं खड़ी करने के विशेषज्ञ हैं; लेकिन उन समस्याओं के प्रभाव के प्रति हमारी स्थिति मूकदर्शक जैसी होती है। मुंबई के साथ ही देश के सभी प्रमुख शहरों में वाहनों की भीड़ से सड़कें तंग हो चली हैं। मिनटों का सफर घंटों में तय होना अब रोजमर्रा की बात हो गई है। विकास के नारों के बीच ज्यादातर नदियां दयनीय और रसायन मिश्रित हो चुकी हैं। देश की सभी नदियां मैला ढोने वाली गटर बन गई हैं। अनेक शहरों में कूड़ों के पहाड़ हो गए हैं जो जहरीली गैस से जनता का जीना बेहाल कर रहे हैं।

बुजुर्गों ने दी समाज को ‘पर्यावरण की सीख’

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मुंबई के उपनगर सांताक्रूज में प्राकृतिक वायु पर आधारित अनोखा शवदाह गृह बनाया गया है। देश में यह अपने किस्म का पहला प्रयोग है। हिंदुओं के अलावा कैथलिक, ईसाई और पारसी भी अब इसे स्वीकार कर रहे हैं, ताकि पर्यावरण की रक्षा हो। समय के साथ बदलने की यह सीख सांताक्रूज के बुजुर्गों ने पूरे देश को दी है।

जनजातीय विकास का रास्ता सुझाती‘विश्‍व की जनजातियां’

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जनजातीय विकास का रास्ता सुझाती ‘विश्‍व की जनजातियां’

ईमेल – आपका ई-अस्तित्व

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सभी ईमेल सेवाएं स्मार्टफोन पर एप के साथ या एप के बिना भी उपलब्ध हैं, जिसके कारण दुनिया के किसी भी कोने में बैठ कर आप ईमेल के माध्यम से संवाद स्थापित कर सकते हैं। ये सेवाएं एक सीमा तक नि:शुल्क हैं। दुनिया के साथ संवाद रखना है तो आपको भी आधुनिकता के साथ कदम मिलाना ही होगा।

कश्मीर में बाढ़ के समय सहयोग

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कश्मीर के कुछ लोग,अलगाववादी तथा पड़ोसी पाकिस्तान क्या सोचता है? इन सबसे ऊपर उठकर समस्त भारतवर्ष के करोड़ों हाथ सेवा कार्य हेतु उठ गये। विभिन्न प्रांतों की सरकारों ने भी अपने अपने स्तर पर कश्मीर को नगद एवं वस्तुओं के रूप में सहायता भेजी। विभिन्न सेवाभावी संस्थाओं से सीधे वहां पंहुचकर या वहां की स्थानीय संस्थाओं के मिलकर राहत कार्य शरू कर दी। यह अलग बात है कि कुछ अलगाववादी नेताओं ने सरकारी सहायता या अन्य समाजसेवा संस्था की सहायता से भरी नावों को छीनकर उन्हें अपनी सहायता बताने का ढोंग रचा।

कर्म, सत्य, सेवा व परोपकार के धनी

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हरियाणा की पवित्र भूमि ने देवकीनंदन जिंदल नाम के सपूत को जन्म दिया जिसने आगे चल कर विश्‍व हिंदू परिषद कोंकण प्रांत में हिंदू संस्कृति की अनन्य उपासना कर अपनी सेवा साधना से समाज में हिंदू चेतना के निर्माण में एक नवीन व अनुपम अध्याय जोड़ा।

‘निर्मल ग्राम निर्माण केंद्र’स्वच्छता की ठोस पहल

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{H$ सी भी राष्ट्र के निर्माण व उसकी प्रगति में तमाम अन्य विकल्पों के साथ ही साथ सफाई का बहुत बड़ा योगदान होता है। स्वच्छता न केवल लोगों को बीमारियों से बचाती है बल्कि बाहर से आने वाले लोगों के मन में उस राष्ट्र विशेष के प्रति एक सकारात्मक भाव भी पैदा करती है।

घर में पौधे, रोकें प्रदूषण

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हम घर के अंदर के प्रदूषण की ओर भी ध्यान दे सकते हैं, जो कि पेंट, वार्निश, इलेक्ट्रानिक सामान इत्यादि से पैदा होने वाले बेन्जीन, फॉर्मेल्डिहाइड, ट्राइक्लोरो एथिलीन आदि से होने वाला प्रदूषण होता है। घरों के अंदर हवा का समुचित प्रवाह भी नहीं हो पाता तथा हवा का स्तर भी काफी खराब हो जाता है।

स्मार्ट सिटी में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण

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भारत में स्मार्ट सिटी की सफलता इस बात पर भी निर्भर करेगी कि उसकी मूलभूत पहचान, इसके प्राचीन संस्कारों और मूल्यों को किसी प्रकार की हानि न पहुंचे। हरित पट्टा कायम करना और कचरे का बेहतर प्रबंधन करना स्मार्ट सिटी की विशेषता होगी। इन्दौर ने देश का सब से स्वच्छ शहर बन कर इसकी मिसाल कायम की है।

पर्यावरण, प्रदूषण और बच्चों की स्थिति

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खाद्य प्रदूषण भी विश्‍व के लिए एक बहुत बड़ा खतरा है। आज खाने-पीने की हर वस्तु प्रदूषित है। रासायनिक प्रभाव प्रत्येक वस्तु पर दिखाई देता है। पेड़ पर लगने वाले फल और सब्जी भी प्रदूषित हैं क्योंकि खाद भी रासायनिक है। वायु में भी जहर है। जल भी प्रदूषित है तथा हथियारों की होड़ तथा आतिशबाजी में किए जा रहे बारूद के कण भी पूरे वातावरण में व्याप्त हैं।

प्रधान मंत्री उज्ज्वला योजना की सफलता

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‘‘गांव में रहने वाली तीन करोड़ से ज्यादा महिलाओं की जिंदगी उज्ज्वला योजना ने हमेशा-हमेशा के लिए बदल दी है। उन्हें सिर्फ गैस कनेक्शन नहीं मिला, उन्हें सुरक्षा मिली है, सेहत मिली है, परिवार के लिए समय मिला है।’’ - प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी

कचरे के ढेरों से बढ़ता प्रदूषण

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शहरी कचरे को ठिकाने लगाने के अवैज्ञानिक तरीकों के कारण शहरों के आसपास कूड़े के पहाड़ के पहाड़ खड़े हो गए हैं। इनसे निकलती लैंडफिल गैसों से जनजीवन ही नहीं, अन्य उपकरण भी संकट में पड़ गए हैं। कचरे से बिजली निर्माण के प्रयोग शैशवावस्था में ही हैं, बहरहाल केंचुओं के माध्यम से औद्योगिक कचरे से खाद निर्माण का प्रयोग सफल हुआ है। ऐसे प्राकृतिक उपाय करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है।

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