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राष्ट्रीय जांच एजेंसी या एनआईए ने तमिलनाडु तथा केरल में छापेमारी कर जो सच सामने रखा है उससे रोंगटे खड़े हो जाते हैं। सबसे अंतिम छापा 20 जुलाई को थी। तमिलनाडु में एक साथ 16 स्थानों पर मारे गए छापे में अंसारउल्ला संगठन की ऐसी साजिशों का भंडाफोड़ हुआ जिसमें भारत के अलग-अलग भागों में हमले किए जाने थे। पिछले दिनों अंसारुल्ला से जुड़े जिन 14 लोगों को गिरफ्तार किया गया था वे सारे सऊदी अरब में पकड़कर भारत डिपोर्ट किए गए थे। सउदी अरब ने पुख्ता सूचना के आधार पर ही इन लोगों को संदिग्ध माना एवं उन्हें भारत भेज दिया। इनसे पूछताछ के बाद पहले 13 जुलाई 2019 को एनआईए ने चेन्नै और नागपट्टिनम जिले में स्थित तीन संदिग्धों के ठिकानों पर छापेमारी की। जानकारी की पुष्टि होने के बाद अंसरउल्लाह संगठन एवं इसकी साजिशों के बारे में देश को सूचित किया गया। पूरी जानकारी सामने आने के बाद यह स्वीकार करने में कोई समस्या नहीं है कि देश अनेक आतंकवादी हमलों से बच गया है।

एनआईए ने 13 जुलाई को चेन्नई स्थित सैयद बुखारी के घर और कार्यालय तथा नागपट्टिनम जिले में हसन अली और मोहम्मद युसुफुद्दीन के घर पर छापेमारी की थी। वहां से जो कुछ प्राप्त हुआ उनके आधार पर 20 जुलाई की सबसे बड़ी छापेमारी हुई। थोड़े शब्दों में कहा जाए तो भारत में किसी एक राज्य में आज तक के सबसे बड़े और विस्तृत आतंकवादी संगठित तंत्र तथा हमलों की साजिशों का पर्दाफाश हुआ है। इस संगठन की विचारधारा में कहा गया है कि हमारा लक्ष्य भारत को एक इस्लामिक राज में तब्दील करके शरिया कानून लागू करना है। अंसारउल्ला का अर्थ है, अल्लाह के समर्थक। अंसारउल्ला का संबंध यमन के आतंकवादी संगठन अंसारउल्ला से जुड़ा पाया गया है। यमन के संगठन अंसारउल्ला को हूती विद्रोही के नाम से भी जाना जाता है। यह अल कायदा का ही विस्तार था लेकिन जबसे अल कायदा कमजोर हुआ और आईएसआईएस मजबूत तब से यह आईएस से भी जुड़ गया।

इस आतंकवादी संगठन ने यमन की क्या दशा कर दी है यह पूरी दुनिया को पता है। अंसारउल्ला का इनसे जुड़ाव यह बताता है कि किस तरह तमिलनाडु के किसी कोने में बैठा एक व्यक्ति सुदूर सक्रिय आतंकवादियों से प्रेरणा लेकर उनसे जुड़कर अपने देश को लहूलहान करने की तैयारी कर सकता है। अंसारउल्ला के संदिग्धों ने अलकायदा और आईएस से भी संबंध स्थापित किया। ध्यान रखिए इस समय ये दोनों संगठन छिन्न-भिन्न किए जा चुके हैं, पर इनके प्रभाव खत्म नहीं हुए हैं। इनसे प्रत्यक्ष-परोक्ष प्रभावित संगठन और व्यक्ति दुनिया भर में जेहाद के नाम पर हिंसा करने के लिए खड़े हैं।

आईएस ने चार वर्ष पहले आह्वान किया था कि दुनिया में खलीफा का साम्राज्य खड़ा करने के समर्थक संगठित बड़े हमले करने में अक्षम हैं तो वे अकेले हमला करे। जो कुछ उनके पास है उसे ही हथियार बनाकर जितनी जनधन की क्षति पहुंचा सकते हैं पहुंचाएं। इसे लोन वूल्फ हमला कहा जाता है। हमने बेल्जियम से लेकर ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी तक ऐसे हमले देखे हैं। एक चालक वाहन को भीड़ पर चढ़ा देता है तो कोई चाकू लेकर ही कूद पड़ता है। अंसारउल्लाह इसी तरह के लोन वूल्फ हमले की योजना बना चुका था। हालांकि इसके आतंकवादी संगठन की योजनानुसार हमले करते। इसका तरीका लोन वूल्फ का होता, पर वे अकेले व्यक्ति की योजना और संसाधन से नहीं होता। इनकी योजना में  जहर देकर भी हत्या करने की साजिश शामिल थी।

तमिलनाडु में जिन 16 ठिकानों पर छापा मारा गया, उनमें एक मोहम्मद शेख का भी घर शामिल है। एनआईए का कहना है कि सैयद मोहम्मद बुखारी, हसन अली और मोहम्मद युसुफुद्दीन और उसके सहयोगियों ने दुबई में बड़े पैमाने पर धन जुटाया है। इन्होंने भारत में मुसलमानों पर हो रहे अत्याचारों की झूठी बातें फैलाकर लोगों को प्रभावित किया एवं धन जुटाए। उस धन का उपयोग ये हमलों में करने वाले थे। अभी तक तो इनके दो ही केन्द्र पाए गए हैं, चेन्नई और नागपट्टिनम जिला। हो सकता है आगे कुछ और केन्द्रो का भी पता चले। एनआईए की ओर से 9 जुलाई को दर्ज प्राथमिकी के अनुसार संदिग्ध आतंकवादी चेन्नै और नागपट्टिनम जिले के रहने वाले हैं। इसके अलावा पूरे देश और उससे बाहर भी कई लोग इससे जुड़े हैं जो भारत के खिलाफ जंग छेड़ने की साजिश रच रहे थे। प्राथमिकी के अनुसार अंसारउल्ला संगठन भारत में वहादत-ए-इस्लाम, जिहादिस्ट इस्लामिक यूनिट और जमात वहादत-ए-इस्लाम अल जिहादिया के नाम से भी सक्रिय है। अभी छानबीन जारी है। हो सकता है कुछ और नाम से अन्य क्षेत्रों में भी इनके मॉड्यूल हों। एनआईए ने ऐसे जेहादी वीडियो इनके पास से बरामद किए हैं जिसे दिखाकर ये अपने संगठन से लोगों को जोड़ते थे।

तमिलनाडु में जेहादी आतंकवादियों का जड़ जमाने के प्रमाण पहले भी मिले थे। 21 अप्रैल को श्रीलंका में हुए हमले के संकेत यहीं से मिले थे। यहीं से संकेत मिलने के बाद भारत ने श्रीलंका को तीन चेतावनियां दी थीं। एनआईए ने पिछले वर्ष दिसंबर में इस्लामिक स्टेट के कोयंबटूर मॉडल की जांच की थी। एनआईए को जांच के दौरान जो वीडियो मिला उसमें श्रीलंका में हमले करने वाले संगठन नेशनल तौहीद जमात के नेता श्रीलंकाई मौलवी जहरान बिन हाशिम श्रीलंका, तमिलनाडु और केरल के मुस्लिम युवाओं को इस्लामिक शासन की स्थापना के लिए काम करने को उकसा रहा है

। ये वीडियो 19 दिसंबर, 2018 को कुनियामुथुर, उक्कदम, चेन्नई के ओटेरी, तिंदीवनम और कोयंबटूर के वैराइटी हॉल रोड पर आईएस के छह संदिग्धों के आवासों पर छापेमारी में बरामद किए गए थे। इनको कोयंबटूर में हिंदू नेताओं और कार्यकर्ताओं पर हमला करने की योजना बनाने के आरोप में 1 सितंबर, 2018 को गिरफ्तार किया गया था। एनआईए ने इस मामले में 7 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया है। पिछले 12 जून को भी एनआईए ने तमिलनाडु में सात स्थानों पर छापा मारा था। आईएस मॉड्यूल्स का पता चलने पर तमिलनाडु के कोयंबटूर शहर में मारे गए छापों के संबंध में एक नया मामला दर्ज किया गया जिसमें कहा गया कि यह मॉड्यूल श्री लंका में ईस्टर के दिन बम धमाका करने के आरोपी हमलावर जहरान हाशिम से काफी प्रभावित है। इन छापों से पता चला कि आईएस के एक मॉड्यूल का प्रमुख हाशिम के संपर्क में था।

इसके पहले केरल में भी आईएस मॉड्यूल का पर्दाफाश हुआ था। पता चला है कि केरल मे आईएस के सदस्यों ने श्रीलंकाई आतंकवादी आदिल के पोस्ट शेयर किए थे। आदिल एक फेसबुक अकाउंट चलाता था जिसका नाम था डिड यू नो। उस पर वह जो पोस्ट शेयर करता था केरल में आईएस से जुड़े आतंकवादी इनको काफी शेयर करते थे। एजेंसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि श्रीलंका हमले का मास्टरमाइंड जहरान हाशिम केरल और तमिलनाडु के आईएस सदस्यों से पिछले तीन साल से सोशल मीडिया के जरिए संपर्क में था।

एनआईए ने पुख्ता सबूत के बाद मोहम्मद आशिक, इस्माइल, शम्सुद्दीन, जफर सादिक अली और शाहुल हमीद को गिरफ्तार किया। हाशिम और केरल के इन सलाफी प्रचारकों के भाषणों में भी समानताएं पाई गई। दोनों ने ही दारुल कुफ्र (काफिरों की जगह) में मुस्लिमों के लिए खतरा बताया है और काफिरों से दूर रहने की जरूरत बताई है। 30 अप्रैल को केरल में कासरगोड इलाके से रियाज अबु बकर नाम के संदिग्ध को गिरफ्तार किया जिसके बारे में कहा गया कि यह इस्लामिक स्टेट से जुड़ा है। जुलाई 2016 में कासरगोड से 15 युवाओं के लापता होने के बाद केस दर्ज किया गया था। छानबीन में पता चला था कि लापता युवक अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठन आईएस के संपर्क में हैं। कासरगोड आईएस मॉड्यूल मामला पहली बार पिछले साल सामने आया था, जब एनआईए ने एक 25 साल के युवक हबीब रहमान को गिरफ्तार किया था। जांच में खुलासा हुआ था कि 14 लोगों ने इस्लामिक स्टेट से जुड़ने के लिए जुलाई, 2016 में भारत और मध्य-पूर्व एशियाई देशों में स्थित अपने दफ्तरों को छोड़ दिया था।

इन सारे तथ्यों को देखने के बाद निस्संदेह, तमिलनाडु और केरल ही नहीं पूरे भारत को लेकर डरावना दृश्य बनता है। इस तरह यदि आतंकवादी मॉड्यूल खड़े हो रहे हैं, उनके पास विचार एवं संसाधन पहुंच रहे हैं, वे दूसरों को प्रभावित कर अपने साथ जोड़ने में सफल हो रहे हैं तो किसी दिन हमला भी कर सकते हैं। एनआईए ने तमिलनाडु एवं केरल के इन पर्दाफाशों से हमें बचा लिया है। किंतु जेहादी आतंकवाद ऐसा उन्मादी विचार है जो कहीं और किसी को अन्य रुपों प्रभावित कर रहा होगा।

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