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भारतीय समाज के ताने-बाने में ही निहित है सेवा- सहयोग के मूल्य – डॉ. मनमोहन वैद्य

भारतीय समाज के ताने-बाने में ही निहित है सेवा- सहयोग के मूल्य – डॉ. मनमोहन वैद्य

by pallavi anwekar
in ट्रेंडींग, संघ, सामाजिक
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. मनमोहन वैद्य जी ने पत्रकार वार्ता में (वेबिनार) कोरोना के कारण देश की स्थिति  तथा इस कठिन परिस्थिति में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वारा किए जा रहे सेवाकार्यों का विस्तृत वर्णन पत्रकारों के समक्ष रखा. साथ ही पत्रकारों द्वारा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर भी दिए.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. मनमोहन वैद्य जी ने कहा कि कोरोना का संकट एक अभूतपूर्व संकट है और भारत अच्छे से इसका सामना कर रहा है. उन्होंने 130 करोड़ की जनसंख्या वाले देश में निर्णयों को लागू कराने में सरकार के कदमों की सराहना की. उन्होंने कहा कि जिस तरह से चरणबद्ध ढंग से, जैसे पहले 1 दिन के कर्फ्यू और फिर 21 दिन के देशव्यापी लॉकडाउन का फैसला लिया गया, इससे समाज का मन बना और समाज का सहकार्य भी मिला है. उन्होंने भारतीय समाज के सहयोगी स्वभाव की भी सराहना की. उन्होंने कहा कि हमारे समाज का तानाबाना कुछ ऐसा है कि संकट के मौके पर लोग एक दूसरे की सहायता को आगे आ जाते हैं. दूसरे देशों में सरकार पर निर्भरता अधिक है.

उन्होंने कहा कि संकट के दौरान संघ के स्वयंसेवक समाज के सहायतार्थ कार्य शुरू करते हैं और स्वयंसेवकों ने उत्तर पूर्वी राज्यों अरुणाचल, मणिपुर, त्रिपुरा से लेकर देश के प्रत्येक राज्य में सेवा कार्य शुरू कर दिया है. उन्होंने बताया कि इस समय देश भर में 26 हजार स्थानों पर 2 लाख स्वयंसेवक सेवा कार्यों में लगे हैं. इन सेवा कार्यों से 25.5 लाख परिवारों, व्यक्तियों को इसका लाभ मिला है.
समाज की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए स्वयंसेवकों ने 25 प्रकार के सेवा कार्य आरंभ किए हैं. अनेक प्रांतों में हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए है, जिनके माध्यम से लोगों की आवश्यकता अनुसार सहायता की जा रही है. भोजन, चिकित्सा, अन्य प्रांतों से आए परिवारों की व्यवस्था करने का कार्य स्वयंसेवकों ने किया.

तमिलनाडु के तिरुपुर में स्वयंसेवकों ने स्वास्थ्य विभाग के लिए सेफ्टी ड्रेस बनाकर वितरण किया है. सेनेटाइज़र, मास्क का वितरण कर रहे हैं. आयुर्वेदिक काढ़ा और होम्योपैथिक दवाइयां भी लाखों लोगों को वितरित किया है. धार्मिक स्थानों पर आश्रित रहने वाले भिक्षुकों के लिए भी भोजन की व्यवस्था हो रही है. चित्रकूट और हम्पी में बंदरों के लिए भी भोजन की व्यवस्था की जा रही है. देश में कई स्थानों सोलापुर, यवतमाल, कोल्हापुर, उत्तर प्रदेश में घुमंतू जनजातियों और कई प्रदेशों में जनजातीय इलाकों में लोगों की सहायता के लिए स्वयंसेवक सतत लगे हैं. रक्तदान की व्यवस्था भी स्वयंसेवकों ने की है.

उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश में विद्या भारती ने 16 जिलों में अपने 115 भवन प्रशासन को उपयोग के लिए दिए हैं. दैनिक मजदूरी करने वालों की भी चिंता कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि दिव्यांगों के बीच काम करने वाले सक्षम नाम के संगठन ने इस संकट के दौरान मनोचिकित्सकों की सेवाएं भी उपलब्ध करवाई हैं. दिल्ली से काफी संख्या में मजदूर बाहर जा रहे थे, तो ऐसे 8 लाख लोगों के आवास व भोजन की व्यवस्था स्वयंसेवकों ने की, तथा उत्तर प्रदेश सरकार के सहोयग व योजना से पांच हजार बसों के माध्यम से अपने-अपने स्थान पर पहुंचाने की व्यवस्था की है. सेवा के इस विशाल कार्य में समाज के सहयोग से सेवा भारती, राष्ट्र सेविका समिति, विद्या भारती, आरोग्य भारती, भारतीय मजदूर संघ, वनवासी कल्याण आश्रम, सक्षम, नेशनल मेडिकॉज़ आर्गनाइजेशन, भाजपा, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, भारतीय किसान संघ, आरोग्य भारती, सीमा जन कल्याण समिति, सभी संगठों के कार्यकर्ता लगे हैं.

सह सरकार्यवाह ने बताया कि साथ मिलकर सांघिकता का भाव बनाए रखने के लिए व टेक्नोलॉजी का उपयोग करते हुए ई शाखाएं चला रहे हैं, अनेक स्थानों पर परिवार साथ आ रहे हैं, परिवार शाखाओं का भी प्रयोग हो रहा है.

उन्होंने बताया कि संघ के लिए यह समय शिक्षा वर्ग का समय होता है. अप्रैल के मध्य से जून अंत तक स्वयंसेवकों को प्रशिक्षण देने के लिए गर्मियों की छुट्टियों का लाभ लेकर 90 से अधिक संघ शिक्षा वर्गों का आयोजन होता है. वर्तमान स्थिति को देखते हुए संघ के नेतृत्व ने निर्णय किया है कि जून अंत तक होने वाले सभी वर्गों, एकत्रीकरण के कार्यक्रमों को निरस्त कर दिया है. संघ पर जब प्रतिबंध लगा था, तभी केवल शिक्षा वर्ग नहीं हुए थे. संघ के इतिहास में 1929 से लेकर अभी तक ऐसा पहली बार हुआ है कि पूर्ण योजना बनने के पश्चात भी देश में सभी वर्गों को निरस्त कर दिया गया है.

एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि रोज कमाने वाल लोगों पर संकट आया है, ऐसा नही है, सभी पर आया है. हमारे एक मित्र के पास 125 लोग काम करते हैं, वो मुझे कह रहे थे उन्होंने बिना कमाई के एक माह का वेतन सभी को दिया है. संकट सभी  पर है, सभी एक साथ मिलकर बाहर निकलेंगे. पहले महामारी के संकट से बाहर आना चाहिए, और बाद में समाज व सरकार मिलकर विचार करके बाहर आएंगे. आने वाले कुछ महीनों में हम फिर से अच्छी स्थिति में आएंगे, ऐसा मुझे विश्वास है.

एक अन्य प्रश्न के उत्तर में कहा कि सभी जगह निर्देशों का पालन हो रहा है, सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क लगाने, सेनेटाइजंग करना, व अन्य सावधानियों को ध्यान में रखते हुए स्वयंसेवक कार्य कर रहे हैं. लेकिन जहां सेवा पहुंचानी है, वह भी आवश्यक है. सभी नियमों का पालन करते हुए स्वयंसेवक कार्य कर रहे हैं.

तबलीगी जमात से जुड़े प्रश्न के उत्तर में कहा कि इसके कारण से संख्या अचानक बढ़ रही है, यह बात सभी लोग मान रहे हैं. समाचार पत्रों में रिपोर्ट आ रही हैं, The Figures Tell the Truth, यह बात तो सही है. अगर उनका नेतृत्व समय पर इसको कैंसल करता तो अच्छा होता. मैं इसके समान एक उदाहरण बताउंगा, – 15, 16, 17 मार्च को संघ की भी अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा बेंगलुरु में तय थी, करीब 1500-1600 कार्यकर्ता देशभर से आने वाले थे, 300 स्थानीय कार्यकर्ता उनकी व्यवस्था में थे. लेकिन संघ के नेतृत्व ने (लॉकडाउन की घोषणा से पहले) सारी गंभीरता को ध्यान में रखते हुए समय पर निर्ण लेकर बैठक निरस्त की. कुछ लोग फ्लाइट से आने वाले थे, उनको फ्लाइट में न बैठने के लिए कहा गया. ट्रेन से आने वाले कुछ लोग बीच में उतर गए, जो बेंगलुरु पहुंचे उन्हें भी एक स्थान पर न रखते हुए अलग-अलग स्थानों पर व्यवस्था की, उनको वापसी गाड़ी से भेजने की व्यवस्था की. यह जो नेतृत्व की सेंसिबल रिस्पॉंसिबिलिटी होती है, जो संघ के नेतृत्व ने दिखाई. वो यदि इनके लोग दिखाते तो ऐसा नहीं होता.

दूसरी बात है, मानो यह जानकारी के समय निर्णय नहीं कर सके, बाद में छिपे रहना, छिपाना, जो उनकी सेवा के लिए, जांच के लिए आ रहे हैं, उनके साथ बेहुदा व्यवहार करना, यह तो कुछ विकृति का ही दर्शन है. कहीं थूकना, उपचार कर रही नर्सों के साथ दुर्व्यवहार करना.

उन्होंने कहा कि यह भी सच है कि मुस्लिम समुदाय के बड़े वर्ग ने सरकार के निर्देशों का समर्थन किया है, वो सहयोग भी कर रहे हैं, लेकिन एक तबका है जो समझ नहीं रहा है. यह एक साजिश है या नहीं यह उन्हें नहीं पता, लेकिन उनके समाज में ये लोग खुद एक्सपोज़ हो रहे हैं. उनके ही समाज के लोग प्रशासन का सहयोग कर रहे हैं, उनके मस्जिद में छिपे होने की जानकारी दे रहे हैं.

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