कंस्ट्रक्शन उद्योग सबसे बुरी हालत में

कंस्ट्रक्शन उद्योग नोटबंदी, जीएसटी, रेरा और आर्थिक मंदी के कारण सबसे बुरे वक्त से गुजर ही रहा था कि कोरोना ने उसकी कमर तोड़ दी। इस उद्योग को उबारने के लिए सरकार को फौरन कदम उठाने चाहिए।

तकरीबन तीन चार साल से कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्रीज की हालत काफी बिगड़ी हुई है। नोटबंदी, जीएसटी, रेरा और आर्थिक मंदी के कारण हम पहले से ही बहुत बुरे वक्त से गुजर रहे थे। इससे बाहर निकल कर कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री थोड़ा बहुत संभलने का प्रयास कर रही थी कि कोविड-19 का कहर आ गया।

पूरे भारत में अब मंदी का दौर चल रहा है। अभी लोगों के पास पैसे नहीं है। खरीदारी अब और कम हो जाएगी। हमारे काम के लिए मजदूर अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। कोरोना वायरस संक्रमण के शुरुआती 30 दिनों तक मजदूरों को खाना-पीना सब देकर कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री के लोगों ने संभाल कर रखा था। लेकिन जैसे- जैसे लॉकडाउन के दिन बढ़ने लगे वैसे-वैसे मजदूरों का हौसला और हमारे पास के पैसे भी खत्म होने लगे। आज 90% मजदूर अपने गांव की तरफ निकल चुके हैं।

अब लॉकडाउन उठता भी है तो हमारे पास मजदूरों की बहुत कमी है। कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री गत 4 सालों से विभिन्न प्रकार की समस्याओं से जूझ रही है इस कारण इंडस्ट्री के पास ़फंड की भी बहुत कमी है। सरकार ने लघु-मध्यम उद्योगों को रियायत देने संदर्भ में घोषणा की है। 20% लोन देने का वादा तो सरकार ने किया है लेकिन जब हम बैंक में जाते हैं तो उनका कहना होता है कि हमारे पास अब तक कोई गाइडलाइन नहीं आई है। इसका हमारे काम के ऊपर जबरदस्त असर होने वाला है।

हमारी बृहन्मुंबई डेवलपर्स एसोसिएशन है। बीएमसी के कमिश्नर से हमने इस संदर्भ में मुलाकात की थी। उन्होंने प्रीमियम कम करने का वादा हमसे किया था। डेवलपमेंट चार्जेस, एसएसआई फंड, प्रीमियम स्पेस, लॉबी प्रीमियम इस प्रकार के अलग-अलग तरह के कर हमसे वसूल करते हैं, जिसे हम प्रीमियम कहते हैं। हमारा कहना ऐसा है कि उसे कम किया जाए। लेकिन उस बात को अनसुना कर दिया जाता है।

हमें ज्यादातर रुकावटें मुंबई महानगर पालिका की ओर से ही आती हैं। विभिन्न प्रकार के प्रीमियम हम से बरसों से वसूल किए जा रहे हैं। बीएमसी हमसे लेबर फंड वसूल करती है, हमने अभी बीएमसी को निवेदन किया कि वो लेबर फंड हमें वापस कर दीजिए, जिससे हम मजदूरों की सुविधाओं पर ध्यान दे सकते हैं। मुंबई का रेडी रेकनर का जो रेट है उससे प्रीमियम को जोड़ा गया है। अगर प्रीमियम को कम कर देते हैं तो हमे कुछ राहत मिल जाती।

वन विंडो सिस्टम के संदर्भ में बरसों से बात चल रही है। लेकिन अभी तक उनकी व्यवस्था में कोई परिवर्तन नहीं आया है।कोई भी प्रपोजल 60 दिन में कभी भी क्लियर नहीं होता है। अर्बन डेवलपमेंट डिपार्टमेंट के मंत्री जितेंद्र आव्हाड से हमारी बात हुई है। उन्होंने हमें ओशासन दिया है कि यूडी डिपार्टमेंट से जितना हो सकेगा उतना आपका प्रीमियम कम करने का प्रयास करेंगे।

कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री गत 4 सालों से थपेड़े खा रही है। अभी कोरोना के कारण कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री पूरी तरह बैठ गई है। ऐसे में मुंबई महानगरपालिका और सरकार की तरफ से कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री पर जो कड़े नियम लगाए हैं उन कड़े नियमों को शिथिल करने का निवेदन हमने किया है।

घाटकोपर में नेवल डिपार्टमेंट का यूनिट है। इस कारण अगल बगल में 5 हजार बिल्डिंग को हाइट बढ़ाने की अनुमति नहीं है। यह सेंट्रल गवर्नमेंट का विषय है। 2 साल से इस विषय के लिए हम लड़ रहे हैं, कोई विचार-विमर्श नहीं हो रहा है। सी आर जेड की एनओसी, सिविल एनिमेशन की एनओसी, पेड़ कटवाने की एनओसी इस प्रकार की कम से कम 40 से 50 एनओसी हमें लेनी पड़ती हैं।

लैंड अंडर कंस्ट्रक्शन (एलयूसी) के अन्तर्गत हमारे ऊपर बहुत सारे टेक्स लगाए जाते हैं।

रीडिवेलपमेंट का काम तो झुग्गी-झोपड़ियों का विकास करने का होता है। झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले के लिए हम मुफ्त में घर बना कर दे रहे हैं। घर बनाने से पहले उनको भाड़ा देते हैं। ऐसा होते हुए भी सरकार एग्रीमेंट के ऊपर जीएसटी, टीडीआर के ऊपर जीएसटी इस प्रकार के बहुत सारे टैक्स वसूला करती हैं।

ये सब बातें कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री की कमर तोड़ने वाली है।

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