मुद्रा स्फीति पर अंकुश हेतु आरबीआई ने रेपो दर बढ़ाई

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अभी हाल ही में दिनांक 04 मई 2022 को भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो दर में 40 अंकों की वृद्धि कर इसे 4 प्रतिशत से बढ़ा कर 4.40 प्रतिशत कर दिया है। रेपो दर में उक्त वृद्धि 45 महीनों पश्चात अर्थात अगस्त 2018 के बाद की गई है। इसके तुरंत…

ग्लोबलाइजेशन और लोकलाइजेशन मॉडल

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मेष संक्रांति के दिन हमारे गांव में हर साल मेला लगता है जिसमे पूरा गांव सम्मिलित होता है और मेले से घरेलू प्रयोग की हर वस्तु लेते हैं बनाने वाले सब आस पास गांव के ही होते हैं लेकिन दुर्भाग्य अब कोई मेला देखने जाता नही और दुकाने कम होती…

राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस: ग्राहक जानें अपना अधिकार

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  इस दुनिया में इस्तेमाल करने योग्य लाखो सामान है जिसे कंपनी या फिर कारखानों में तैयार किया जाता है और फिर उसे आम जनता अपने इस्तेमाल के लिए खरीदती है। सामान को तैयार करने वाले की लागत और लाभ से लेकर दुकानदार के लाभ के साथ सभी पैसे खरीदने…

अंधाधुंध उत्पादन से बेहतर है संयम से खर्च

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बिजली बनाने के हर सलीके में पर्यावरण के नुकसान की संभावना है। यदि उर्जा का किफायती इस्तेमाल सुनिश्चित किए बगैर उर्जा के उत्पादन की मात्रा बढ़ाई जाती रही तो इस कार्य में खर्च किया जा रहा पैसा व्यर्थ जाने की संभावना है और इसका विषम प्रभाव अर्थ व्यवस्था के विकास पर पड़ेगा।

सीपीईसी को लेकर पाकिस्तान में असंतोष और विरोध

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इस गलियारे को ऊपरी तौर पर केवल व्यापारिक दृष्टि से एक व्यापार संबंधी नया रूट खोलने के रूप में प्रदर्शित किया जा रहा है मगर तथ्य यह है कि सीपीईसी के कारण चीन की पकड़ इस क्षेत्र में जबरदस्त ढंग से मजबूत हो जाएगी और इससे सामरिक संतुलन बिगड़ेगा। खासकर अरब सागर में चीनी विस्तारवाद के लिए ग्वादर एक नया आधार बनेगा। 

प्रगति की मिसाल भीलवाड़ा टेक्सटाइल उद्योग

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भीलवाड़ा जिला काफी समय से पानी की कमी के चलते डार्क जोन में रहा है। अत: यहां नए प्रोसेस की अनुमति प्रशासन द्वारा नहीं दी जा सकती। इसलिए कपड़ा फिनिश करवाने के लिए यहां के उद्यमियों को बालोतरा भेजना पड़ता है परंतु पिछले दो-तीन वर्षों में कुछ क्षेत्रों में पानी की कमी दूर हुई है, परंतु इसका तहसील के अनुसार पुनर्मूल्यांकन आवश्यक है। जिससे नए प्रोसेस हाउस की अनुमति मिल सके।

प्रगति की ओर अग्रसर मर्दा ग्रुप

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मर्दा बंधुओं ने अरविंद ब्राण्ड धोती के व्यवसाय पर अपना ध्यान केंद्रित किया और उसके लिये खूब मेहनत की। रणनीतिक और तकनीकी रुपसे परिश्रम कर उन्होंने अपने व्यापार को पुरे भारतवर्ष में फैलाया। कुछ ही समय में धोती किंग के रुप में विख्यात हुए। उस समय धोती बहुत ही लोकप्रिय वस्त्र हुआ करता था, जिसे भारत के ह्रदय को छुने वाला वस्त्र भी माना जाता था।

भारत के वस्त्रोद्योग का भविष्य

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कोविड-19 की स्थिति में फेस मास्क और पीपीई कवरऑल जैसे बुनियादी उत्पादों के लिए भारत को स्थानीय मांगों को पूरा करने में संघर्ष करना पड़ा। अन्य देश जैसे वियतनाम, मलेशिया और इंडोनेशिया जो तकनीकी वस्त्रों के लिए ज्यादा जाने नहीं जाते हैं, इन मेडिकल डिस्पोजबल्स की आपूर्ति करके बड़ी मात्रा में यूएसडी राजस्व पैदा कर रहे हैं। निर्यात प्रतिबंधों में हालिया बदलाव के साथ, भारत ने भारी संख्या में पीपीई किट का निर्यात करना शुरू कर दिया है।

भारतीय वस्त्र उद्योग और निवेश के अवसर

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भारतीय निर्मित वस्त्र और हस्तशिल्प कई देशों को निर्यात किए जाते हैं। निर्यात के लिए अमेरिका प्राथमिक बाजार है, लेकिन देशों की कुल संख्या 100 तक है। निर्यात में 41% हिस्सेदारी के साथ रेडीमेड वस्त्र सबसे बड़ा खंड है। कपड़ा मंत्रालय के रिकॉर्ड के अनुसार, भारत ने पिछले साल की तुलना में 7% की वृद्धि के साथ 17 बिलियन अमेरिकी डॉलर का कपड़ा निर्यात किया।

विश्व बाजार में उभरता भारतीय वस्त्र उद्योग

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सकारात्मक संकेत यह है कि मौजूदा सरकार वस्त्रोद्योग क्षेत्र में ढांचागत सुधार कर इसे फिर से पटरी पर लाकर तेज गति देने की दिशा में प्रयास कर रही है। ’मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम के माध्यम से भारत को निर्माण तथा निर्यात का हब बनाने का अभियान चल ही रहा है।

वस्त्र कामगारों के लिए कल्याणकारी योजनाएं

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वस्त्र मंत्रालय समय-समय पर वस्त्र कामगारों को लाभान्वित करने वाली योजनाओं की निगरानी करता रहता है। कामगार और उनके लिए बनाई गई विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की लगातार बेहतरी मंत्रालय की सर्वोच्च प्राथमिकता है। केंद्र सरकार ने वस्त्र उद्योग से हर क्षेत्र में ऐसी योजनाएं शुरू की हैं। 

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