…वरना महाराष्ट्र से चले जाएंगे उद्योग कारखाने

महाराष्ट्र में भी गुजरात व उप्र की तर्ज पर श्रमिक कानूनों में सुधार किया जाना परम आवश्यक है, अन्यथा राज्य के उद्योग उन राज्यों में चले जाएंगे। इसी तरह केंद्र सरकार के राहत पैकेज को भी व्यावहारिक दिशा देने की आवश्यकता है।

कोविड – 19 और लॉकडाउन का उद्योगों पर बहुत ही नकारात्मक परिणाम हुआ है। मजदूरों के पलायन से उद्योगों की गति थम सी गई है और जो स्थानीय मजदूर हैं वे भी कोरोना वायरस के डर से काम पर नहीं आ रहे हैं। बाहरी मजदूर तो अपने गांव चले गए हैं। धीरे – धीरे कुछ स्थानीय मजदूर काम पर आने भी लगे हैं। मजदूरों की कमी के कारण उद्योगों के उत्पादन में बहुत कमी आ गई है। बाजार में मांग की कमी से भी उद्योगों को नुकसान हुआ है। लेकिन रोहा केमिकल इंडस्ट्री़ज में इसका असर कम होगा; क्योंकि लगभग 70 प्रतिशत केमिकल का विदेशों में निर्यात होता है। इसलिए बड़े पैमाने पर विदेशी डॉलर देश में लाने वाला हमारा केमिकल उद्योग है। हालांकि विदेशों में भी कोविड – 19 का सर्वाधिक प्रकोप होने से कारोबार पर असर हुआ है और हमारे निर्यात में बेहद कमी आई है।

उद्योगों को राहत पैकेज मिलने की उम्मीद कम

केंद्र सरकार द्वारा जारी किए गए राहत पैकेज का लाभ उद्योग जगत को मिलने की उम्मीद बेहद कम दिखाई दे रही है। पैकेज देने का सर्वाधिकार बैंकों को दिया गया है। बैंकों को तो सरकार ने गारंटी दी है कि यदि उन्हें कोई आर्थिक नुकसान होगा तो सरकार उसे संभाल लेगी। लेकिन उद्योगों को ऐसी कोई सुविधा नहीं दी गई है। सही तरीके से राहत पैकज का लाभ नहीं मिलने से बड़ी संख्या में उद्योग कारखाने बंद होने की प्रबल संभावना है। मेरा सरकार से आग्रह है कि राहत पैकेज को धरातल पर अमल में लाया जाए और उद्योगों एवं कारखानों के हित में राहत पैकेज को दिशा दी जाए तभी उद्योग-धंधे बचेंगे और संघर्ष करने के काबिल बने रहेंगे।

गैर-जरूरी कानूनों को खत्म किया जाए

उद्योग-धंधे आसानी से चलने के लिए नियम – कानून को सुलभ व पारदर्शी बनाया जाए, ना कि नियमों व कानून की आड़ में उद्योगों की राह में बाधा पहुंचाई जाए। राज्य सरकार के गैरजरूरी नियमों – कानूनों को खत्म या कम किया जाना चाहिए। कारखानों में यदि कोई दुर्घटना हो जाए तो सीधे मालिक को जिम्मेदार ठहराया जाता है और उसके खिलाफ कार्रवाई की जाती है। यदि मालिक का कोई दोष है तो कार्रवाई करना उचित है लेकिन यदि मालिक ने मजदूरों को सारी सुविधा उपलब्ध कराई है और सुरक्षा सामग्री दी है तथा बावजूद इसके मजदूरों की लापरवाही या गलती से कोई हादसा हो जाए तो भी मालिक को दोषी ठहराना उचित नहीं है।

महाराष्ट्र में लागू किया जाए श्रमिक कानून सुधार

वर्तमान समय की मांग है कि महाराष्ट्र में भी तत्काल लेबर रिμफॉर्म किया जाए। गुजरात एवं उप्र सहित देश के अन्य राज्यों में श्रमिक कानूनों में सुधार किए गए हैं। उसी तर्ज पर महाराष्ट्र में भी तत्काल श्रमिक कानूनों में सुधार लागू किया जाए। जो कामगार अच्छा काम करता है और पूरी निष्ठा से परिश्रम करता है उसे कोई क्यों काम पर से निकालेगा? लेकिन जो मजदूर काम करने के बजाए टाइम पास करेगा, अडियलबाजी करेगा, ठीक से काम नहीं करेगा उसका क्या किया जाए? जैसे कि हमारे इंडस्ट्रीμज में काम चालू है, लोग काम कर रहे हैं लेकिन कुछ कामगार ऐसे भी हैं कि कोविड – 19 के संक्रमण का हवाला देकर काम नहीं करना चाहते हैं और काम नहीं कर रहे हैं। कोंकण क्षेत्र में स्थानीय लोगों का काम नहीं करना यह उनकी खासियत है, योग्यता है। ऐसी दिक्कतों का भी हमें सामना करना पड़ता है। इससे हमारे उत्पादन पर बुरा असर होता है। इसलिए श्रमिक कानूनों में सुधार होना परम आवश्यक है। यदि समय रहते महाराष्ट्र में नियम – कानून और श्रमिक कानूनों में सुधार नहीं किया गया तो यहां के उद्योग – कारखाने अन्य राज्यों में चले जाएंगे।

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