भ्रष्ट दिमाग, भ्रष्टाचार की जड़ – डा. प्रवीणभाई तोगड़िया

धर्मनिरपेक्ष टाइप के लोग, कम्युनिस्ट और अंग्रेजी शिक्षा से प्रभावित काले अंग्रेज मिलकर हिंदुत्व और भारत को खत्म करने का षड्यंत्र कर रहे हैं।

 हिंदू हेल्पलाइन, यह आधुनिक सेवा प्रकल्प आपके नेतृत्व में प्रारंभ हुआ है। इस प्रकल्प का स्वरूप कैसा है?

देश के करोड़ों की संख्या में हिंदू घर-नगर छोड़कर प्रवास करते हैं। आज की दुनिया काफी जटिल हो गयी है। परिवहन सुविधा के तेजी से विकास और आधुनिकीकरण के परिणामस्वरूप प्रवास काफी व्यापक हुआ है। आज मुंबई का हिंदू चेन्नई, गुवाहाटी, काशी, कोलकाता, उज्जैन पहुंचता है। उसे किसी मंदिर का पता जानना है, प्रवास में कोई दुर्घटना हो जाती है, तत्काल चिकित्सकीय सहायता की जरूरत होती है। अनजान शहर में वह किसी को जानता नहीं, किसी पर ऐसी दशा में वह भरोसा भी नहीं कर सकता। तो ऐसे में वह क्या करेगा?  हिंदू-हेल्पलाइन ऐसे में उसकी मदद करेगा। इस तरह हम लाखों हिदुओं को जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। इसके हजारों स्वयंसेवक हैं। साल के 365 दिन और 24 घंटे इसकी टेलीफोन पर सेवा उपलब्ध है। कोई हिंदू देश के किसी भी जिले से टेलीफोन, हिंदू हेल्पलाइन पर कॉल करता है, या ैैै.प्ग्ह्ल्पत्ज्त्ग्हा.म्दस्  पर संपर्क कर सकता है, उसे आधे घंटे में सेवा उपलब्ध हो जायेगी। पूजा-पाठ में ज्यादा दक्षिणा मांगी जाती है, गलत तरीके से पूजा-श्राद्ध आदि कराया जाता है, लूटा जाता है। हेल्पलाइन से एक घंटे

में पूजा करानेवाला पंडित मिल जायेगा, सही रेट पर शास्त्रोक्त-विधि से पूजा करायेगा। कॉल करने वाले और मदद करने वाले को आधे घंटे में जोड़ दिया जाता है। 25 हजार स्वयंसेवक उपलब्ध हैं – इस संख्या को बढ़ाकर एक लाख करने जा रहे हैं। जो भी चाहे स्वयंसेवक बन सकता है। हर तरह की सेवा उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है। हिंदू हेल्पलाइन कॉल सेंटर पर संपर्क कर सकते हैं। 24 घंटों किसी भी समय में मदद मांगी जा सकती है।

आप विश्व-हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय महासचिव का दायित्व यशस्वी रूप से सम्हालते हुए कई आंदोलनों का संचालन कर रहे हैं। अब राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी बदलाव आये हैं। ऐसे में क्या अब इस तरह के आंदोलनों की जरूरत है? या फिर आपने अपनी कार्य-प्रणाली और नीतियों में बदलाव कर लिया है। अगर हां, तो किस तरह के?

तोगड़िया: जब बदलाव करेंगे तो हम बतायेंगे। कल की रणनीति क्या होगी, आज ही पता नहीं होता है?

अयोध्या स्थित राम मंदिर का मुद्दा हिदुओं के लिए काफी अहम् रहा है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के बाद इस मुद्दे किस हद तक सुलझा है?

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के लखनऊ खंडपीठ के फैसले से तीन बातें साफ होती हैं: हम कहते आये हैं कि रामजन्मभूमि की जमीन है, यहां मंदिर था, बाबर ने तोड़ा था। मंदिर था तो जमीन में उसके अवशेष होने चाहिए। जियो प्रिंट रडार और भारतीय पुरातत्व विभाग के उत्खनन में जमीन में मंदिर मिल गया। इसलिए मंदिर तोड़ा गया सिद्ध हो गया। इसलिए तीनों जजों ने स्वीकार किया कि यहां मंदिर था।

दूसरा कि यह राम की जन्मभूमि है, कानूनन यह सिद्ध हो गया। आज तक जो श्वद्धा की बात थी, तो श्वद्धा तो है। कानून ने भी श्रद्धा का समर्थन कर दिया है। तीसरी बात कि तीनों जजों ने स्वीकार किया कि मंदिर को बाबर ने तोड़ा था। अब जमीन में मदिंर था, मंदिर मिल गया। अब ऐसे में कोई मंदिर पर मस्जिद बनाने की बात करता है, तो इसका मतलब कि वह बाबर के इतिहास को दोहराने की बात करता है। मैं नहीं मानता कि भारत में अब कोई ऐसा करने का साहस करेगा। अगर ऐसा करेगा तो उसका मुंहतोड़ जवाब मिलेगा।

 जनगणना 2011 के अनुसार भारत की जनसंख्या 121 करोड़ तक पहुंच गई है। आप जनसंख्या वृद्धि को किस नजर से देखते हैं?

बस चार बीवियां करवाने को बंद करवाओ। चार बीवियों के कारण 25 बच्चे पैदा करते हैं, उस पर प्रतिबंध लगाओ। इसका मतलब कि समान नागरिक संहिता लागू करके ऐसे लोगों को अरबस्तान भेजा जाए, जो चार बीवियां रखने का अधिकार मांगते हैं। इनके लिए भारत में कोई स्थान नहीं है।

देश की राजनीतिक स्थिति में भारी गिरावट देखी जा रही है। इसमें सकारात्मक बदलाव के लिए आप क्या कहना चाहेंगे?

मेरा मानना है कि भ्रष्टाचार देश के लिए बहुत घातक साबित हो रहा है। सामान्य नागरिक के जीवन में इसके कारण काफी कठिनाई आ गई है। भ्रष्टाचार दूर करने के जो रास्ते हम ढूंढ़ रहे हैं, वह अपूर्ण है, इससे भ्रष्टाचार दूर नहीं होगा। पूरे देश में भ्रष्टाचार दूर करने के कानून हैं, राज्यों में लोकायुक्त है, क्या इससे भ्रष्टाचार दूर हुआ है? कल लोकपाल लाओगे, लोकायुक्त लाओगे, फिर भ्रष्टाचार बंद नहीं हुआ, तो नहीं हुआ। तो क्या कानून नहीं होना चाहिए, होना चाहिए। लेकिन सबसे बड़ा मुद्दा है, करप्ट माइंड, भ्रष्ट दिमाग- यह भ्रष्टाचार की मूल वजह है।  देश के लोगों का मन कैसे बदला जाये? यह धर्म की शिक्षा से बदला जा सकता है। देश में भ्रष्टाचार था नहीं, यह कब आया – जब अंग्रेज आये। उन्होंने धर्म की शिक्षा बंद कर दी। स्वतंत्रता के बाद काले अंग्रेजों ने धर्म को देश-निकाला दे दिया।

इसका कुल परिणाम है करप्ट माइंड- इसी वजह से देश भ्रष्टाचार की तरफ जा रहा है। यदि भ्रष्टाचार नहीं चाहते हैं, लोगों का दिलो-दिमाग ठीक रहे – इसके लिए प्राथमिक से ऊपर तक हिंदू धर्म की शिक्षा प्रारंभ करनी चाहिए। लोकपाल बिल बनाया जायेगा तो भ्रष्टाचार कम होगा, समाप्त नहीं होगा। इसे समाप्त करना है तो हिंदू धर्म की शिक्षा प्रारंभ करना चाहिए।

हिंदू -हेल्पलाइन के जरिए हम लाखों हिदुओं को जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। इसके हजारों स्वयंसेवक हैं। साल के 365 दिन और 24 घंटे इसकी टेलीफोन पर सेवा उपलब्ध है। कोई हिंदू देश के किसी भी जिले से टेलीफोन से हिंदू हेल्पलाइन पर कॉल कर सकता है, या  WWW.hinduhelpline.com  पर संपर्क कर सकता है। उसे आधे घंटे में सेवा उपलब्ध हो जायेगी।

अण्णा हजारे ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान शुरू किया है। आप इसे किस नजरिए से देखते हैं? क्या यह पर्याप्त है?

पूरे देश के लोग भ्रष्टाचार को समाप्त करना चाहते हैं। जहां तक अण्णा हजारे के आंदोलन की बात है, तो हम बता दें कि यह महज कानून तक सीमित है। कानून से भ्रष्टाचार कम होता है, समाप्त नहीं होता है। लेकिन भ्रष्टाचार नहीं करने की लोगों में भावना का जन्म हिंदू धर्म की शिक्षा से आता है। अण्णा हजारे ने अपने आंदोलन के साथ हिंदू धर्म की शिक्षा भी अनिवार्य करने की बात भी उठायी होती, तो उनका भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन पूरी तरह सफल होता। कहने को तो देश के 18 राज्यों में लोकायुक्त हैं, लेकिन अण्णा हजारे बतायें कि कहां पर भ्रष्टाचार खत्म हुआ है।

 हर राजनीतिक पार्टी, वह चाहे भाजपा हो, कांग्रेस हो या सपा हो या कोई अन्य दल भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी है। आप इन्हें किस कोटि में रखते हैं?

चाहे राजनीतिक दल हों या नौकरशाही हर जगह भ्रष्ट व्यक्ति है। मगर यह भी सच है कि अब भी दोनों जगहों पर ईमानदार लोग मौजदू हैं। मगर माहौल ऐसा चल रहा है कि ईमानदार लोगों को अपमानित और प्रताड़ित किया जा रहा है। नौकरशाही हो या राजनीति की बात, यहां पर बेईमानों की वाह-वाह हो रही है। परेशान ईमानदार हो रहे हैं।

 गुजरात और बिहार को विकास के माडल के रूप में पेश किया जा रहा है। यह माडल देश के विकास में कितना कारगर हो सकता है?

मैं इसके बारे में कुछ नहीं कहूंगा। महज पीआर के आधार पर कहीं विकास हुआ है क्या? इसकी धारणा सिर्फ बनायी गयी है। वास्तविकता के धरातल पर उतरकर ही इसकी बात की जा सकती है कि कितना विकास हुआ है। पीआर पर नहीं जाना चाहिए ।

 

आपकी प्रतिक्रिया...