एक सच्ची, सामान्य लेकिन अजीब मानसिकता…

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भारत में क्रिकेट, सिनेमा और राजनीति को कल्पना से परे प्यार किया जाता है।  समर्थकों या प्रशंसकों और सेलिब्रिटी के बीच भावनात्मक बंधन बहुत तीव्र है।  स्टारडम फॉलोअर्स, तथाकथित स्टार के भीतर  एक अलग तरह का एटीट्यूड बनाता है।  कुछ हस्तियां यह सोचने लगती हैं कि वे भूमि के कानून…

शस्त्र पूजन: शक्ति की उपासना

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भारतवर्ष एक प्राचीन परंपरा और सांस्कृतिक देश है। कई हजार साल पहले रामायण, महाभारत से लेकर आज से सत्तर साल पीछे देश की आजादी तक हमने एक चीज बहुत निरंतरता से आजमाई है, वो संघर्ष है। कोई भी संघर्ष शस्त्र के बिना अधूरा है। यही नहीं बल्कि हमारे सभी देव-देवताओं के हाथ में भी कोई न कोई आयुध शस्त्र नजर आते हैं।

हरियाणा के सरकारी कर्मचारी क्यों नहीं ले सकते थे संघ में हिस्सा, खट्टर सरकार ने बदला नियम?

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  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने अपनी स्थापना के बाद से सिर्फ राष्ट्र प्रेम किया और लोगों की सेवा की, यह बात भी किसी से छिपी नहीं है लेकिन इन सब के बाद भी कुछ राजनीतिक पार्टियों के निशाने पर संघ हमेशा रहा है। हरियाणा सरकार की तरफ से वर्ष…

जयप्रकाश नारायण जयंती विशेष – सवाल तो जेपी के चेलों से बनते ही है…!

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जेपी के महान व्यक्तित्व को लोग कैसे स्मरण में रखना चाहेंगे यह निर्धारित करने की जबाबदेही असल मे उनके राजनीतिक चेलों की भी थी। जेपी का मूल्यांकन उनके वारिसों के उत्तरावर्ती योगदान के साथ की जाए तो जेपी की वैचारिकी का हश्र घोर निराशा का अहसास कराता है। आजादी के…

रिजर्व बैंक की तरफ से आम जनता को राहत!

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भारतीय रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की तीन दिनों से चल रही मौद्रिक नीति समिति की बैठक शुक्रवार को खत्म हुई। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने बैठक के बाद ऐलान किया कि इस बार ब्याज दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं की जा रही है। आरबीआई के इस फैसले से आम…

हिंदुत्व : धर्म की अवधारणा, सत्य एवं भ्रांति

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हिंदुत्व का दूसरा नाम सनातन संस्कृति या सनातन धर्म है। सनातन का अभिप्राय ही यह है कि जो काल की कसौटी पर सदैव खरा उतरे, जो कभी पुराना न पड़े, जिसमें काल-प्रवाह में आया असत्य प्रक्षालित होकर तलछट में पहुँचता जाय और सत्य सतत प्रवहमान रहे। फिर यह भ्रांति कब,…

पेट्रोल डीजल में लगी महंगाई की आग

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मेरा मानना है कि सरकार को डीजल-पेट्रोल के दाम को कम करना चाहिए और वैकल्पिक ईंधन पर भी काम करना चाहिए। पेट्रोलियम में पुनः पूल फंड का इस्तेमाल करना चाहिए तथा इस तेल को जीएसटी के दायरे में लाना चाहिए ताकि इस पर एक यूनिफार्म टैक्स आल इंडिया लग सके। अलग-अलग राज्यों की अलग-अलग दर ना हो।

धार्मिक शिक्षण संस्थानों को सरकारी अनुदान?

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न्यायालय ने यह भी पूछा है कि क्या धार्मिक शिक्षा देने वाले अन्य धर्मों के लोगों लिए भी प्रदेश में कोई शिक्षा बोर्ड है? कोर्ट ने सरकार से यह भी जानना चाहा है कि क्या मदरसा बोर्ड से मान्यता प्राप्त व राजकीय सहायता प्राप्त मदरसों में लड़कियों को प्रवेश दिया जाता है अथवा नहीं?

जातिगत जनगणना कितनी सही?

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विचारणीय यह भी है कि जब देश में वर्दीधारियों के नाम पट्टिका से जाति हटा दी गई है, वाहनों पर जाति-धर्म को प्रदर्शित करना अपराध है, तो जातिगत जनगणना कैसे युक्तिसंगत हो सकती है? जब सब कुछ जनसंख्या और आरक्षण आधारित तय होने लगेगा तो पारस्परिक सौहार्द्र, भाईचारा तथा शांति व्यवस्था भंग होगी। जिस जाति की संख्या कम होगी, उस जाति के लोग अधिकाधिक बच्चे पैदा करेंगे। सामाजिक ताना बाना छिन्न-भिन्न हो जाएगा। नियुक्ति और शिक्षा में प्रवेश केवल जाति देख कर किया जाएगा तो योग्यता के लिए समाज में कोई स्थान ही नहीं रहेगा इसलिए जातिगत जनगणना में देश का समग्र दृष्टिकोण ध्यान में रखना आवश्यक है।

प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन एवं उपराष्ट्रपति कमला हैरिस से मुलाकात भारत अमेरिकी संबंधों की नियति की झलक

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यह बताने की आवश्यकता नहीं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा  पर संपूर्ण दुनिया की नजर थी । संयुक्त राष्ट्र के वार्षिक सम्मेलन में भाग लेने के साथ  अमेरिका के राष्ट्रपति जो बिडेन तथा उपराष्ट्रपति कमला हैरिस के साथ द्विपक्षीय मुलाकात का कार्यक्रम निर्धारित था। क्वाड का भी पहला…

विश्व-बंधुत्व की भावना को साकार करता एकात्म मानवदर्शन और पंडित दीनदयाल उपाध्याय

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सरलता और सादगी की प्रतिमूर्त्ति पंडित दीनदयाल उपाध्याय बहुमुखी एवं विलक्षण प्रतिभा के धनी थे। उनका जीवन परिश्रम और पुरुषार्थ का पर्याय था। वे कुशल संगठक एवं मौलिक चिंतक थे। सामाजिक सरोकार एवं संवेदना उनके संस्कारों में रची-बसी थी। उनकी वृत्ति एवं प्रेरणा सत्ताभिमुखी नहीं, समाजोन्मुखी थी। एक राजनेता होते…

भारतबोध के साथ वैश्विक कल्याण का पथ ‘एकात्म दर्शन’

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धरती के हर  मनुष्य के साथ  ठीक वैसा व्यवहार हो, जैसा हम दूसरों से अपने लिए चाहते हैं। परिवार, समाज,देश और यहां तक कि विश्व के सभी शासक अपने पर निर्भर लोगों के साथ उनके हित को ध्यान में रखते हुए एक जैसा व्यवहार करें को एकात्म मानव दर्शन का…

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