धमाकों से आम मुसलमान भी उतना ही दु:खी

जुलाई की मनहूस शाम को मुंबई बम धमाकों पर सारे देश की आवाज बनकर भारतीय मुसलमानों और उनके नेताओं ने गहरा शोक जताया। ऐसे देशद्रोहियों के खिलाफ अपना गुस्सा प्रकट किया है। मुजरिमों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की मांग की है। इसी के साथ हर विचारधारा के मुस्लिम नेताओं ने कौम से शांति बनाए रखने और देश विरोधी तत्वों से सावधान रहने को कहा है।
देश भर में मुस्लिम संगठनों के फेडरेशन- मुस्लिम मजलिस मशावरात- के कार्यकारी अध्यक्ष, दिल्ली निवासी डाक्टर जफरुल इस्लाम खां ने कहा कि हिंदुस्तानी मुसलमान कायरतापूर्ण, इस मुजरिमाना धमाकों की कड़ी निंदा करते हैं। सुरक्षा एजेंसियों का यह फर्ज है कि मुजरिमों को सजा दिलाने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़े। दिल्ली के जामा मस्जिद के शाही इमाम ने कहा कि दहशतगर्दी की घटनाओं की जब तक स्वतंत्र रूप से न्यायपूर्ण जांच नहीं कराई जाएगी, ऐसी घटनाओं पर काबू पाना मुश्किल है।
जमीअत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना सैय्यद अरशद मदनी और महासचिव मौलाना सैयद महमूद मदनी ने मुंबई धमाकों को इंसान दुश्मन और शैतानी हरकत करार दिया। उन्होंने अपने बयान में कहा कि यह बम धमाके मुल्क में शांति और भाईचारे की फिजा को बिगाड़ने की नापाक साजिश है, जिसकी जितनी भी निंदा की जाए कम है। वास्तव में हिंदुस्तानी मुसलमान इतना तो समझता ही है कि ऐसे धमाकों से उसकी छवि खराब होती है। उस पर शक किया जाता है। इसालिए वह इस प्रकार की वहशियाना कार्रवाइयों से दूर रहता है। लेकिन इसका क्या किया जाए कि दो चार काली भेड़ें हर जगह होती हैं। इन काली भेड़ों ने ही सारा माहौल बिगाड़ने का प्रयास किया है। लेकिन उन नादानों को पता नहीं कि महानगर मुंबई से लेकर गांव देहातों तक में हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, जैन, सिख, पारसी एक दूसरे से हर क्षेत्र में जुड़े हुए हैं। उन्हें किसी तरह भी अलग नहीं किया जा सकता है। मुंबई के मुसलमानों के हर वर्ग ने इस धमाके पर गहरा शोक व्यक्त किया है। कई मस्जिदों के जुमा की नमाज में मरने वालों और उनके परिवार के सदस्यों के लिए दुआएं की गईं। मजबही, सामाजिक और सियासी लीडरों ने खुलकर इस वहशियाना दरंदिगी की निंदा की। मशहूर धार्मिक रहनुमा मौलाना सैय्यद मोईनउद्दीन अशरफ ने एक बयान में फर्माया कि बम धमाका जिसने भी किया है वह इंसान नहीं वहशी और दरिंदा होगा। आपने कहा कि इस्लाम मजहब ने दहशतगर्दी की हमेशा निंदा की है। मुल्क और इंसानियत के दुश्मन अमन और शांति को भंग करने के पीछे पड़े हैं, मगर जब तक लोग एकजुट हैं उनके नापाक इरादे नाकाम ही रहेंगे।

जमाते इस्लामी, महाराष्ट्र के अध्यक्ष नजर मुहम्मद का मानना है कि जब जब पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान से रिश्ते सुधारने की बात होती है, कहीं न कहीं बम धमाके हो जाते हैं। इस तरह बात अधूरी रह जाती है। आल इंडिया उलेमा काउंसिल के जनरल सेक्रेटरी डाक्टर महमूद दरियाबादी, आल इंडिया तालिमी फाउंडेशन के अध्यक्ष और लोकसभा सदस्य मौलाना असरारुल हक कासमी, आल इंडिया मिल्ली काउंसिल महाराष्ट्र के संयोजक मुफती अब्दुल रहमान आदि ने भी इस हरकत को मुल्क में शांति प्रयासों को ध्वस्त करने की कोशिश बताया। ध्यान देने की बात है यह है कि हिंदुस्तानी मुसलमानों को यह मालूम है कि ऐसे धमाकों और दहशत की कार्रवाइयों से उन्हें कुछ भी मिलने वाला नहीं। उन्हें मालूम है कि लोकतांत्रिक ढंग से ही उसे सब कुछ प्राप्त हो सकता है और वह इसी लोकतांत्रिक व्यवस्था का हामी है।

आपकी प्रतिक्रिया...