राजनाथ सिंह का चीन के खिलाफ ज़ोरदार भाषण | देश का मस्तक कभी नही झुकने दूंगा |


रक्षा मंत्री का राज्य सभा में भाषण
केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भारत और चीन के बीच जारी विवाद को लेकर बयान दिया और यह साफ कहा कि चीन की कथनी और करनी में अंतर है। वह किसी भी तरह से भारत को दबाना चाहता है लेकिन फिलहाल वह सफल नहीं हो रहा है इसलिए वह अलग अलग पैरते आजमा रहा है हालांकि राजनाथ सिंह ने यह साफ कर दिया कि देश किसी भी कीमत पर चीन से पीछे हटने के मूड में नही है उसके लिए चाहे कितने भी कड़े कदम उठाने पड़ जाए। रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत किसी के सामने मस्तक नहीं झुकाएगा और ना ही किसी का मस्तक झुकाना चाहता है। सदन में अपने भाषण के दौरान रक्षा मंत्री ने सभी से अनुरोध किया कि सदन से देश के उन जवानों के लिए सभी को प्रशंसा करनी चाहिए जो देश की रक्षा के लिए सीमा पर तैनात है।  
 
सीमा पर आंख से आंख मिला खड़े है जवान
राज्य सभा में भाषण के दौरान राजनाथ सिंह ने कहा कि देश की सेना पूरे जोश के साथ तैयार है और वह अपने दुश्मनों को धूल चटाना चाहती है हालांकि सेना इस समय के चुनौती से गुजर रही है लेकिन फिर भी देश के जवान सीमा पर चीनी सैनिकों से आँख से आँख मिलाकर खड़े है और अगर चीन किसी भी तरह की हिमाक़त करता है तो सेना उसे मुंह तोड़ जवाब देने के लिए तैयार है। 


चीन कर रहा अंतराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत हर मुद्दे को पहले द्विपक्षीय वार्ता के द्वारा सुलझाना चाहता है और इसके लिए ही चीन से सेना के कमांडर स्तर से लेकर विदेश मंत्री और रक्षा मंत्री स्तर तक की बैठक हो चुकी है लेकिन चीन हर बार अपनी कथनी से पलट जाता है और सभी बातों को नजर अंदाज करते हुए सीमा पर चीनी सैनिक अंतराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन करने लगते है। राजनाथ सिंह ने सदन को जानकारी देते हुए बताया कि दोनों देशों के बीच वर्ष 1993 और 1996 के बीच हुए समझौते के मुताबिक LAC पर दोनों ही देशों की सेनाएँ कम से कम संख्या में रहेंगी और किसी भी हाल में सीमा के नियमों का पालन किया जायेगा। भारत के तमाम निर्देशों के बाद भी चीन की तरफ से सीमा नियमों का उल्लंघन लगातार किया जा रहा है। 
 
चीन के कब्ज़े में भारत की ज़मीन
राज्य सभा में जानकारी देते हुए रक्षा मंत्री ने बताया कि भारत की 38000 स्वायर किमी जमीन अनिधिकृत तौर से चीन के कब्ज़े में है जिसे चीन ने गलत तरीके से हथिया लिया है। इसके साथ ही सन 1963 में पाकिस्तान ने भी भारत की 5163 स्वायर किमी जमीन चीन को सौंप दी थी और फिर पीओके की इस जमीन पर चीन ने कब्ज़ा भी कर लिया है हालांकि अभी तक भारत और चीन के बीच रजामंदी से LAC नहीं तैयार किया गया है जिसको लेकर अक्सर विवाद होता रहता है। 

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